संजय राउत ने लगाया करोड़ों की चोरी का आरोप, विपक्ष बोला- आखिर जिम्मेदार कौन?
कुछ पूर्व सदस्यों और नेताओं ने आरोप लगाया है कि चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जो हो जाए वही कम है। फर्जी हिंदुत्व का ढोल पीटने वाली भाजपाइयों की बोलती अचानक एक मामले को लेकर बंद होती हुई नजर आ रही है।
वहीं विपक्षी दल के नेता इसी मामले को लेकर सियासी गलियारों में लगातार सवाल उठा रहे हैं। जी हाँ दोस्तों हम दरअसल बात कर रहे हैं राममंदिर में हुई चोरी की घटना को लेकर। दरअसल अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर हाल ही में विवाद सामने आया है।
यह मामला तब चर्चा में आया जब चढ़ावे की गिनती से जुड़े एक पूर्व सदस्य महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले दान और नकदी की गिनती के दौरान गड़बड़ी हो रही है। उनका दावा है कि नोटों की गड्डियों में अनियमितताएं थीं और जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो उनकी बात पर उचित ध्यान नहीं दिया गया। इन आरोपों के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस संबंध में लखनऊ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई, जिसमें दान राशि की जांच सीबीआई से कराने और वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराने की मांग की गई है।
कुछ पूर्व सदस्यों और नेताओं ने आरोप लगाया है कि चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद निष्पक्ष जांच की मांग भी उठी है और इस मामले को लेकर अदालत में याचिका तक दायर की गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि जब राम मंदिर को भाजपा ने अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में शामिल किया, तब चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर सरकार को अधिक पारदर्शिता दिखानी चाहिए थी।
आलोचकों का कहना है कि यदि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन पर सवाल उठ रहे हैं, तो केवल ट्रस्ट की आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उनका मानना है कि स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। वहीं इस मामले को लेकर राजनेताओं ने भी जमकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
इसी कड़ी में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने राम मंदिर के चढ़ावे में हुए चोरी को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि चोरी की तस्वीर सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी जिम्मेदार डबल इंजन की सरकार है. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने अयोध्या राम मंदिर में 5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया है.
उन्होंने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिस भगवान राम के लिए पीएम मोदी ने 12 दिनों का व्रत किया और इसका वीडियों देश- दुनिया में वायरल किया. इस कार्यक्रम को देखने लिए पूरे विश्व लोगों को बुलाया और पार्टी के लोगों ने कहा ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे’. आपके राज में राम के घर में चोरी हो गई. नेता राउत ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार है, लेकिन अयोध्या राम सुरक्षित नहीं हैं.
संजय राउत ने कहा कि बीजेपी पहले ईवीएम,वोट और सीटें चुराती थी, लेकिन अब वो मंदिर के चढ़ावे भी चुराने लगी है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के राज में हर जगह चोरी और भ्रष्टाचार हो रही है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं अयोध्या जाऊंगा और प्रभु राम के समक्ष सिर झुकाकर माफी मांगूंगा.
राम मंदिर में दान की गई राशि के गबन का मामला तूल पकडे हुए है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी से लेकर स्थानीय नेताओं ने भी सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे मामले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य महंत कमल नयन दास ने जांच की मांग की है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया में महासचिव चंपत राई ने कहा कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर काम हो रहा है। अभी तक कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली। लेकिन विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जो दिखाता है कि मामला गंभीर है।
संजय राउत से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस मामले पर सरकार को घेरते हुए नजर आ चुके हैं। अखिलेश यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की चुप्पी शक पैदा करती है। उन्होंने न्यायपालिका से मामले का संज्ञान लेने की अपील की और मंदिर प्रशासन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग भी की।
बीजेपी सरकार पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि राम मंदिर का ट्रस्ट केंद्र और यूपी सरकार की देखरेख में काम करता है। मंदिर का निर्माण और रखरखाव में भक्तों के करोड़ों रुपये लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी संस्था में पारदर्शिता क्यों नहीं है? दान कैसे जमा होता है, कैसे गिना जाता है, और कहां खर्च होता है—इसका साफ हिसाब क्यों नहीं दिया जाता?
जब भक्त गरीबी में भी राम के नाम पर पैसा देते हैं, तो उसका गबन होना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। कुछ बीजेपी नेता भी चुप नहीं रहे। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सच्चाई पता है लेकिन बोलने से मुसीबत हो सकती है। अयोध्या के बीजेपी नेता राजनिश सिंह और कुछ अन्य ने सीबीआई या ईडी जांच की मांग की है। आरएसएस ने भी रिपोर्ट मांगी है। यह दिखाता है कि मामला सिर्फ विपक्षी हमला नहीं है, अंदरूनी सवाल भी हैं।
यह मामला राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहा है। भक्तों का विश्वास टूटना किसी भी धर्म के लिए अच्छा नहीं। बीजेपी सरकार राम मंदिर को अपना बड़ा प्रतीक बताती रही है। इसलिए जवाबदेही भी उसी की बनती है। अगर गड़बड़ी साबित हुई तो यह न सिर्फ आर्थिक घोटाला है, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था का अपमान है।पारदर्शिता की जरूरत है। दान का पूरा हिसाब ऑनलाइन पब्लिक किया जाना चाहिए। हर महीने की आय-व्यय रिपोर्ट जारी हो।
स्वतंत्र ऑडिट हो। सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी जाए। जो गलती करे, उसे सजा मिले—चाहे कोई भी हो।अभी तक कोई अदालती फैसला या अंतिम साबित आरोप नहीं है, लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महंत कमल नयन दास जैसे व्यक्ति का बयान इस बात को और मजबूत करता है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। भगवान राम सत्य और न्याय के प्रतीक हैं। उनके मंदिर में अगर कोई गलत काम हुआ है तो उसे छिपाना उचित नहीं।
हालांकि कहीं भाजपा फिर से इस मामले को गोल-गोल घुमाकर जनता को गुमराह करने में कामयाब न हो जाये इसे लेकर विपक्ष लगातार एक्टिव नजर आ रही है। अब देखना ये होगा कि इस मामले में और कितने नेताओं की सफाई सामने आती है या क्या कार्यवाई होती है।



