पश्चिम बंगाल में छापों का मानसून
अभिषेक बनर्जी से मदन मित्रा तक ताबड़तोड़ एक्शन

- कानून की कार्रवाई या चुनावी राजनीति का नया अध्याय?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में पुलिस की गाडिय़ों की सायरनों की आवाजे गूंज रही हैं। दरवाजों पर दस्तक है और जांच एजेंसियों की हलचल है फाइलों की सरसराहट के बीच टीएमसी से जुड़े लोगों के बीच बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। आज सुबह तड़के तीन बजे तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम पहुंचती है। तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच में टीएमसी विधायक मदन मित्रा के 7 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी जाती है।
देखने मे तो यह अलग-अलग कार्रवाइयां है। अलग-अलग नाम लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा एक ही है कि छापे की लिस्ट में अगला नाम किसका है और कहां छापा पडऩे की संभावना है। अभिषेक बनर्जी कोई साधारण नेता नहीं हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में उनकी गिनती होती है। संगठन पर उनकी पकड़ कार्यकर्ताओं में उनकी स्वीकार्यता और राज्य की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका उन्हें टीएमसी का भविष्य माना जाने वाला चेहरा बनाती है। यही वजह है कि जब भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई उनके आसपास पहुंचती है तो उसका असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य में महसूस किया जाता है। उधर मदन मित्रा का नाम भी बंगाल की राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनके ठिकानों पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर भर्ती घोटाले की जांच को सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन इसके साथ ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर भी शुरू हो गया है। दिलचस्प बात यह है राजनीतिक दल हर एक्शन प्रत्येक कार्रवाई को अपने-अपने चश्मे से देख रहे हैं। सत्ता पक्ष पक्ष इसे कानून का राज बताते नहीं थक रहा तो विपक्ष इसे राजनीतिक टारगेटिंग बता रहा है। सच आखिर क्या है यह जांच और अदालतों की प्रक्रिया तय करेगी। लेकिन फिलहाल बंगाल में चर्चा विकास रोजगार या प्रशासन की नहीं बल्कि छापों पूछताछ और राजनीतिक संदेशों की है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ यह नया छापों का मानसून सिर्फ कानूनी कार्रवाई की कहानी नहीं बल्कि सत्ता रणनीति और राजनीतिक मनोविज्ञान की भी कहानी बन चुका है।
अभिषेक के आवास पर छापेमारी, सुमित रॉय की तलाश तेज
पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी पुलिस स्टेशन की एक टीम जिसकी अगुवाई डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस कर रहे थे और जिसके साथ सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान भी थे ने तड़के करीब 3 बजे दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड पर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर पर दबिश दी। इसके कुछ ही देर बाद स्थानीय कालीघाट पुलिस स्टेशन की एक और टीम वहां पहुंची सबसे पहले पुलिस टीम जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी बड़ी संख्या में थीं ने घर के मुख्य दरवाजे पर बार-बार दस्तक दी। कोई जवाब न मिलने पर यह संयुक्त टीम घर के बाहर इंतजार करती रही। आखिरकार दो घंटे से ज्यादा इंतजार करने के बाद उन्होंने राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मचारियों की मदद से मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ा और घर के अंदर दाखिल हुए। पता चला है कि साल्बोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में सुमित रॉय का पता लगाने के लिए ये छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए गए थे रॉय अभी फरार चल रहे हैं।
पूर्व सीएम ममता बनर्जी आगबबूला मौके पर पहुंची
सुबह-सुबह यह छापेमारी उन इनपुट मिलने के आधार पर की गयी थी जिसमें कहा गया था कि सुमित रॉय अभिषेक बनर्जी के घर पर छिपे हो सकते हैं। इस बीच छापेमारी की खबर मिलते ही पूर्व सीएम ममता बनर्जी हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने पास के घर से तुरंत अभिषेक बनर्जी के उस आवास पर पहुंची जहां छापा मारा गया था। दो घंटे से ज्यादा चले ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम अभिषेक बनर्जी के घर से रवाना हो गई। बाद में अभिषेक बनर्जी ने पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाया और मीडियाकर्मियों को बताया कि सुरक्षाकर्मी मुख्य गेट का ताला तोड़कर उनके घर में घुस आए थे।
टीएमसी विधायक मदन मित्रा के 7 ठिकानों पर छापेमारी
- 125 से ज्यादा अवैध भर्तियों का मामला
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। कोलकाता जोन की टीम ने आज मदन मित्रा से संबंधित 7 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। यह पूरा ममाला नगरपालिकाओं में नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर करोड़ों रुपए के लेन देन से जुड़ा है। जांच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके मुताबिक मदन मित्रा ने विभिन्न नगर पालिकाओं में अवैध नियुक्तियों के बदले मध्यस्थों के जरिए नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली थी। इनमें कामारहाटी नगर पालिका भी शामिल है। आरोप है कि मदन मित्रा 125 से अधिक अवैध नियुक्तियों से सीधे जुड़े पाए गए हैं जिनमें अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दिलाई गईं। ईडी की टीम फिलहाल इन सभी ठिकानों से मिले दस्तावेजों डिजिटल उपकरणों और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। इस मामले की आगे की जांच जारी है। ईडी को इस बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की जानकारी सबसे पहले तब मिली थी जब एजेंसी पश्चिम बंगाल के स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी कर रही थी। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और सूचनाएं सामने आईं जिसके बाद नगरपालिका भर्ती घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भी नगरपालिका नौकरियों के बदले कैश मामले में समानांतर जांच शुरू कर दी। जैसे-जैसे इन दोनों केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने जांच को आगे बढ़ाया राज्य के मंत्रियों और सत्ताधारी दल के नेताओं सहित कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए।



