स्वामित्व योजना से गांवों में आया बदलाव, गुजरात ने दर्ज की बड़ी उपलब्धि

पीएम मोदी के 12 साल: स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में गुजरात नंबर 1 प्रदेश बन है. देश के आधे से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड गुजरात में बने हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पीएम मोदी के 12 साल: स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में गुजरात नंबर 1 प्रदेश बन है.

देश के आधे से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड गुजरात में बने हैं. योजना के दूसरे चरण (2021-22) में पूरे देश में बने 32.35 लाख प्रॉपर्टी कार्ड्स में से अकेले गुजरात ने रिकॉर्ड 18.50 लाख कार्ड तैयार कर मिसाल कायम की.

पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में जो बड़े कदम उठाए हैं, उनमें ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ एक ‘गेमचेंजर’ के रूप में सामने आई है. दशकों से गांवों में आवासीय संपत्तियों के सटीक कागजात न होने के कारण ग्रामीण अपने ही घरों के कानूनी अधिकारों और वित्तीय लाभों से वंचित थे.

आज इस योजना के ज़रिए न सिर्फ ग्रामीणों को उनका असली हक मिल रहा है, बल्कि इस महाअभियान में गुजरात ने पूरे देश में ‘नंबर 1’ बनकर एक नया इतिहास भी रच दिया है. राज्य की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि योजना के दूसरे चरण में देश भर में जितने भी प्रॉपर्टी कार्ड बने हैं, उनमें से आधे से अधिक (50% से ज्यादा) की हिस्सेदारी अकेले गुजरात की रही है.

स्वामित्व योजना’ में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के कुशल नेतृत्व में गुजरात ने ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ को अभूतपूर्व गति देते हुए पूरे देश के सामने एक ‘रोल मॉडल’ पेश किया है. अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक से ग्रामीण संपत्तियों का सटीक मानचित्रण कर, राज्य सरकार द्वारा अब तक 18.50 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों के वैधानिक ‘प्रॉपर्टी कार्ड’ तैयार किए जा चुके हैं.

वर्ष 2021-22 में इस योजना के दूसरे चरण से जुड़ने वाला गुजरात आज अपने बेहतरीन प्रबंधन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर पहुँच गया है. आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस चरण में देश भर के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं और कुल 32,35,260 प्रॉपर्टी कार्ड बने. इनमें से अकेले गुजरात ने 14,900 गांवों में ड्रोन उड़ान और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण कर देश में सर्वाधिक 18,50,614 कार्ड तैयार किए हैं.

4,900 ड्रोन उड़ानों से पारदर्शी हुई व्यवस्था

इस महाअभियान को सफल बनाने में भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गुजरात राजस्व विभाग और गुजरात पंचायती राज विभाग का बेहतरीन समन्वय रहा है. ड्रोन सर्वेक्षण और GIS आधारित मैपिंग ने ग्राम नियोजन को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है.

इस प्रक्रिया में ज़िला स्तर पर मेहसाणा (1,66,504 कार्ड) और अहमदाबाद (1,53,125 कार्ड) सबसे आगे हैं. इसके अलावा खेड़ा, बनासकांठा और आणंद में भी 1-1 लाख से अधिक कार्ड तैयार किए गए हैं. पारदर्शी सत्यापन के बाद कार्ड जारी होने से पीढ़ियों से चले आ रहे भूमि विवाद और अदालती मामले लगभग खत्म हो गए हैं.

प्रॉपर्टी कार्ड पर मिल रहा ₹50 लाख तक के लोन की सुविधा

इस योजना ने ग्रामीण संपत्तियों को एक ‘वित्तीय परिसंपत्ति’ में बदल दिया है. कानूनी मान्यता मिलने के बाद अब नागरिक अपने प्रॉपर्टी कार्ड का उपयोग कर बैंकों से आसानी से लोन की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं. गुजरात में इस कार्ड के आधार पर ₹50 लाख तक के बड़े बैंक लोन भी स्वीकृत किए गए हैं.

इससे गांवों में व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिसने महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में एक ‘गेमचेंजर’ की भूमिका निभाई है. योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्यभर में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया है, जो ‘डिजिटल और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत’ के विजन को साकार कर रहा है.

Related Articles

Back to top button