रेलवे की हरित पहल को मिली पहचान, वटवा लोको शेड बना मिसाल
अहमदाबाद के वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को CII की 'ग्रीनको गोल्ड रेटिंग' मिली है. पश्चिम रेलवे में यह रेटिंग पाने वाला यह पहला शेड है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अहमदाबाद के वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को CII की ‘ग्रीनको गोल्ड रेटिंग’ मिली है. पश्चिम रेलवे में यह रेटिंग पाने वाला यह पहला शेड है. इसने डीजल पर निर्भरता खत्म कर, बिजली-पानी की बचत और वेस्ट मैनेजमेंट में शानदार काम किया है. यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
रेलवे की ओर से डीजल पर निर्भरता कम करते हुए इलेक्ट्रिक लोको शेड का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. अहमदाबाद मंडल के वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को एक बड़ा सम्मान मिला है. इसे CII (कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) की तरफ से “ग्रीनको गोल्ड रेटिंग” (GreenCo GOLD Rating) दी गई है. पश्चिम रेलवे में यह रेटिंग पाने वाला यह पहला शेड है. वटवा शेड ने बिजली बचाने, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए शानदार काम किया है. GreenCo Rating भारत की पहली ऐसी मूल्यांकन प्रणाली है, जो यह देखता है कि कोई कंपनी पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रही है या फिर कितना बचा रही है.
इस शेड ने ट्रेनों को डीजल से चलाने के बजाय पूरी तरह बिजली से चलाना शुरू कर दिया. इससे बड़ा फायदा हुआ. साल 2022-23 में 1.88 करोड़ लीटर से ज्यादा डीजल की बचत हुई. डीजल की खपत शून्य होने से Scope-1 उत्सर्जन में लगभग 100 प्रतिशत की कमी आई. शेड के बड़े हॉल (असेंबली बे) की छत पर खास तरह की चमकदार ट्यूब लगाई गईं, जिसे लॉन्ग-ट्यूब डेलाइट हार्वेस्टिंग कहते हैं.
इसके अलावा कम बिजली खर्च करने के लिए शेड में कई बदलाव किए गए. पुराने बल्ब, CFL और हैलोजन लाइट हटाकर LED लाइटें लगाई गईं. ज्यादा बिजली खाने वाले पुराने पंखों की जगह कम बिजली लेने वाले 5-स्टार BLDC पंखे लगाए गए. ऑक्यूपेंसी सेंसर और एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर का इस्तेमाल कर बिजली की बचत सुनिश्चित की गई.
पानी की बचत
वटवा शेड ने पानी बचाने और लोको पायलटों की साफ-सफाई के लिए बेहतरीन इंतजाम किए हैं. शेड में बारिश के पानी को इकट्ठा करने (Rainwater Harvesting) और उसे जमीन के अंदर भेजने (Groundwater Recharge) का सिस्टम लगाया गया है. इससे हर साल लगभग 20.5 लाख लीटर पानी को बहने से बचाकर सुरक्षित रखा जाता है. अहमदाबाद रेलवे मंडल के रेल प्रबंधक) वेद प्रकाश ने बताया कि अहमदाबाद के ‘वटवा इलेक्ट्रिक ट्रेन इंजन कारखाने’ (लोको शेड) को पर्यावरण के अनुकूल काम करने के लिए ‘CII ग्रीनको गोल्ड रेटिंग’ एक बड़ा सम्मान मिला है. यह पूरे अहमदाबाद मंडल और पश्चिम रेलवे के लिए गर्व की बात है.
उन्होंने कहा कि वटवा कारखाने ने नई तकनीकों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले तरीकों का इस्तेमाल किया है. इन्होंने साबित कर दिया है कि ट्रेनों का बेहतर संचालन करने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी की जा सकती है. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल साल 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर कार्य कर रही है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
अहमदाबाद मंडल में लगभग 1,863 किलोवाट पीक (kWp) क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे प्रतिवर्ष अनुमानित 24.22 लाख यूनिट क्लीन एनर्जी का उत्पादन हो रहा है. इसके अलावा वटवा शेड के लिए समर्पित रूफटॉप सौर परियोजना भी प्रस्तावित है. इससे भारतीय रेल के वर्ष 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को बल मिल रहा है.
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
Scope-1, Scope-2 तथा Scope-3 के अंतर्गत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता में निरंतर साल दर साल कमी दर्ज की गई है. लोकेशेड में 800 से अधिक वृक्षों का संरक्षण किया गया है.
वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में कदम
वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. इसके लिए Zero Waste to Landfill दृष्टिकोण अपनाया गया है. इसके तहत सही रीसाइक्लिंग और शुरुआत में ही कचरों की छंटाई करना शामिल है. मतलब अलग किए गए कचरों को ऐसी एजेंसियों को देना जो इससे नई चीजें बनाती हैं. इन दोनों तरीकों से सालाना करीब 38 लाख रुपये की बचत सुनिश्चित की गई है.



