बागी सांसदों के खिलाफ उद्धव ठाकरे उनके लोकसभा क्षेत्रों का करेंगे दौरा, लगाएंगे क्लास!
उद्धव ठाकरे अपना यह दौरा 26 जून से शुरू करेंगे. 27 जून को उद्धव ठाकरे यवतमाल-वाशिम और हिंगोली लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इन दिनों महाराष्ट्र में सियासी हलचल बढ़ गई है। जबसे शिवसेना UBT के 6 सांसदों ने बगावत की है तबसे राज्य में नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में बगावत के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है. उद्धव ठाकरे ने पार्टी में बगावत के बीच बड़ा प्लान तैयार किया है.
पार्टी के सभी 6 बागी सांसदों के खिलाफ उद्धव ठाकरे 26 जून से 29 जून तक उनके लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे. उद्धव ठाकरे की तरफ से लिए गए इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल पैदा हो गई है. यह दौरा सिर्फ घूमने का नहीं, बल्कि जनता से सीधा संवाद करने और बागियों की सच्चाई उजागर करने का है। शिंदे और बीजेपी की मिलीभगत से पार्टी तोड़ने की कोशिश हो रही है, लेकिन उद्धव जी पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे असली शिवसेना की विचारधारा को बचाने के लिए मैदान में उतर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे अपना यह दौरा 26 जून से शुरू करेंगे. 27 जून को उद्धव ठाकरे यवतमाल-वाशिम और हिंगोली लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे. वहीं 28 जून को वे परभणी और धाराशिव लोकसभा क्षेत्रों में जाकर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा 29 जून को वे शिर्डी लोकसभा क्षेत्र में जाकर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से संवाद करेंगे.
सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे लगातार चार दिनों तक छह लोकसभा क्षेत्रों का दौरा कर बागी सांसदों के क्षेत्रों में संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रयास करेंगे. वहीं, बीते शनिवार को उद्धव ठाकरे ईशान्य मुंबई लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे. इस दौरान वे भांडुप और घाटकोपर में दो अलग-अलग स्थानों पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे.
शिवसेना बाल ठाकरे की बनाई पार्टी है, जो मराठी मानूस की आवाज थी। लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे ने बगावत कर पार्टी तोड़ी। बीजेपी की मदद से उन्होंने सत्ता हासिल की। अब फिर वही खेल दोहराया जा रहा है। 6 सांसदों को तोड़कर शिंदे गुट मजबूत करना चाहता है। लेकिन उद्धव ठाकरे चुप नहीं बैठे। उन्होंने इन बागी सांसदों को नोटिस दिया, पार्टी मीटिंग में व्हिप जारी किया, और अब उनके क्षेत्रों में जाकर जनता को सच बताएंगे।
यह मास्टर प्लान बहुत सोचा-समझा है।उद्धव ठाकरे जानते हैं कि असली ताकत जनता में है। लोकसभा क्षेत्रों में घूमकर वे पूछेंगे कि क्या बागी सांसदों ने जनता की सेवा की या सिर्फ पैसे और पद के लालच में बिक गए? शिंदे-बीजेपी गठबंधन ने महाराष्ट्र को बर्बाद किया है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की परेशानी बढ़ी है। उद्धव जी इन मुद्दों पर जनता से बात करेंगे और बताएंगे कि असली शिवसेना कैसे लड़ रही है।
बात की जाए यह 6 बागी विधायक कौन हैं तो आपको बता दें कि ये 6 बागी सांसद हैं – संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटील अष्टिकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल, और ओमराजे निंबालकर ये लोग 2024 के चुनाव में उद्धव ठाकरे के साथ थे। लेकिन अब शिंदे गुट की तरफ जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें करोड़ों रुपये की पेशकश की गई है। बीजेपी और शिंदे मिलकर ‘ऑपरेशन टाइगर’ चला रहे हैं।
हालांकि यह नई बात नहीं है। 2022 में भी शिंदे ने 40 विधायकों के साथ बगावत की। बीजेपी ने उन्हें सपोर्ट दिया क्योंकि उन्हें सत्ता चाहिए थी। अब लोकसभा में भी वही खेल। लेकिन उद्धव ठाकरे की टीम मजबूत है। बाकी 3 सांसद उनके साथ हैं। वे पार्टी की एकता के लिए लड़ रहे हैं। उद्धव जी का प्लान इन बागियों को उनके क्षेत्र में घेरना है। जनता के बीच जाकर पूछना है – क्या आप ऐसे सांसद चाहते हो जो पैसे के लालच में पार्टी छोड़ दें?
वहीं इन बागी सांसदों पर विपक्ष के नेता भी लगातार हमलावर हैं। इसी बीच इस मामले को लेकर संजय राउत ने भी जोरदार हमला बोला। शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह एक जैविक चमत्कार माना जाना चाहिए कि एक चार साल पुराना संगठन स्थापना दिवस ऐसे मना रहा है जैसे यह 60 साल पुराना हो। एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए राउत ने दोहराया कि वास्तविक शिवसेना अभी भी उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व में है, जबकि शिंदे का कैंप अमित शाह का टेस्ट ट्यूब बेबी है।
राउत ने मुंबई में एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान मराठी में कहा कि मैं कुछ डीएनए नमूने जैविकी के प्रोफेसरों को अध्ययन के लिए भेजना चाहता था। मेरा मतलब है कि जिस समूह की आप बता कर रहे हैं वह जो चार साल पहले बना था। वह टेस्ट ट्यूब बेबी है। ऐसे में आप चार साल के टेस्ट ट्यूब बेबी को 60 साल का प्रमाण पत्र कैसे दे सकते हैं।
इस बीच एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मौजूदा सियासी माहौल की नैतिकता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई भी हमेशा के लिए सत्ता में बने रहने के लिए नहीं आया है. कांग्रेस ने देश पर 60 साल तक राज किया और आज उसकी हालत देख लीजिए. राज ठाकरे ने उद्धव गुट के 6 सांसदों के पाला बदलने का जिक्र करते हुए केंद्र की सरकार को घेरा.
उन्होंने कहा, ”अब, जब UBT गुट के छह सांसद अलग हो गए हैं, तो पत्रकार मेरे पास आए और मेरी प्रतिक्रिया पूछी. मैंने उनसे बदले में एक सवाल पूछा कि केंद्र में किसकी सरकार है? उन्होंने कहा BJP की. फिर मैंने पूछा, ये सांसद BJP में शामिल होने के बजाय शिंदे के साथ क्यों जा रहे हैं? केंद्र में कैसी राजनीति हो रही है? अमित शाह 2029 की तैयारी कर रहे हैं. अगर BJP उनका विरोध करती, तो शायद दूसरे लोग उनके साथ खड़े नहीं होते, वरना ये नेता सीधे BJP में शामिल हो सकते थे.”
शिंदे और बीजेपी को उद्धव ठाकरे से डर लगता है। उद्धव जी विपक्ष में मजबूत आवाज हैं। वे महाराष्ट्र की असली समस्याओं को उठाते हैं। शिंदे सरकार में भ्रष्टाचार, परिवारवाद और बीजेपी का दबदबा बढ़ गया है। असली शिवसेना को कमजोर करके वे NDA को मजबूत करना चाहते हैं। लेकिन यह साजिश काम नहीं आएगी।उद्धव ठाकरे का 26-29 जून का दौरा बहुत महत्वपूर्ण है। वे हर बागी सांसद के क्षेत्र में जाएंगे। वहां रैलियां, बैठकें और जनसंपर्क करेंगे। जनता को याद दिलाएंगे कि बाल ठाकरे की विचारधारा क्या थी – हिंदुत्व, मराठी अस्मिता और गरीबों की लड़ाई।
शिंदे ने इस विचारधारा को बेच दिया है। वे बीजेपी के आगे झुक गए हैं। महाराष्ट्र की जनता चुप नहीं रहेगी। पिछले सालों में शिंदे-बीजेपी सरकार ने किसानों को परेशान किया, युवाओं को रोजगार नहीं दिया। उद्धव ठाकरे इन मुद्दों पर बोलते रहे। अब बागी सांसदों के क्षेत्रों में जाकर वे कहेंगे – “आपके सांसद ने पार्टी छोड़ी, लेकिन हम जनता के साथ हैं।” यह दौरा सिर्फ सांसदों के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ है। शिंदे गुट में पैसे और पद का खेल चल रहा है। उद्धव जी कह रहे हैं कि असली शिवसैनिक विचारधारा के साथ खड़ा होता है, न कि सत्ता के साथ।
उद्धव ठाकरे ने संसदीय बोर्ड की मीटिंग बुलाई, व्हिप जारी किया। बागियों ने मीटिंग मिस की तो नोटिस दिए। अब डिसक्वालिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लेकिन उद्धव जी सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ रहे। वे जनता की अदालत में भी लड़ रहे हैं। क्षेत्रों का दौरा इसी का हिस्सा है।शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता भी सक्रिय हैं। आदित्य ठाकरे और संजय राउत जैसे नेता बागियों की आलोचना कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि बागी बेईमान हैं।
उद्धव जी का प्लान पूरे पार्टी को एकजुट करेगा। यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति बदल सकती है। अगर 6 सांसद शिंदे के साथ चले गए तो यूबीटी कमजोर होगी। लेकिन उद्धव ठाकरे का मास्टर प्लान इसे मौका में बदल सकता है। जनता अगर बागियों को नकार दे तो शिंदे-बीजेपी की चाल उल्टी पड़ सकती है। उद्धव का संदेश साफ है – शिवसेना बाल ठाकरे की है, किसी की प्रॉपर्टी नहीं। बगावत करने वाले आखिर में हारेंगे। 26 जून से शुरू होने वाला दौरा इस बात का सबूत होगा कि उद्धव ठाकरे जनता के नेता हैं।
अब आपके मन में भी यह सवाल उठा होगा कि आखिर शिवसेना यह कदम क्यों उठा रही है। तो इसके कई कारण हैं पहले, जनता को असली चेहरा दिखाना। बागी सांसद पैसे के लालच में गए, सेवा नहीं की। दूसरे, पार्टी कार्यकर्ताओं को हौसला देना। तीसरे, विपक्षी दलों के साथ गठबंधन को मजबूत करना। चौथे, 2029 के चुनाव की तैयारी शुरू करना।शिंदे और बीजेपी सोचते हैं कि पैसे से सब कुछ खरीद सकते हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे दिखा रहे हैं कि सिद्धांत और जनता की ताकत ज्यादा बड़ी है।
यह दौरा आसान शब्दों में कहे तो “जनता से जुड़ो, बागियों को उजागर करो” का प्लान है। उद्धव ठाकरे शांत स्वभाव के हैं लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति वाले। 2022 की हार के बाद भी उन्होंने पार्टी को संभाला। अब फिर लड़ रहे हैं। उनका परिवार और साथी उनके साथ हैं। यह मास्टर प्लान दिखाता है कि वे हार मानने वाले नहीं।जनता भी समझ रही है। महाराष्ट्र में विकास के नाम पर सिर्फ सत्ता का खेल चल रहा है। उद्धव जी रोजगार, किसान, शिक्षा जैसे मुद्दे उठाते हैं। बागी क्षेत्रों में जाकर वे यही बताएंगे।



