महमूद गजनवी का नाम लेकर संजय राउत ने अमित शाह को जमकर घेरा, कर दिया एक्सपोज!

पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय के जरिए बीजेपी पर सीधा निशाना साधते हुए इसे 'राम मंदिर की लूट' करार दिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जो हो जाए वही कम है। जिस राम मंदिर का मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा उसी मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब हो गया और भाजपाई हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गए।

हिंदुत्व का नारा देने वाले भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए नजर आ रहे हैं। वहीं जनता योगी मोदी से जवाब मांग रही है कि आखिर मंदिर से इतना बड़ा पाप हुआ कैसे और दोषियों को क्यों नहीं पकड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं विपक्षी नेता भी लगातार हमलावर हैं और सवाल दाग रहे हैं। इसे लेकर शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे में हेराफेरी हुई हैं।

पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय के जरिए बीजेपी पर सीधा निशाना साधते हुए इसे ‘राम मंदिर की लूट’ करार दिया। संपादकीय में कहा गया कि अयोध्या में राम मंदिर के दान-पात्रों से नकदी, सोना, चांदी और आभूषणों की कथित चोरी यह दिखाती है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। शिवसेना यूबीटी ने दावा किया कि जिन कार सेवकों ने मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया, उसी मंदिर को अब सत्ता में बैठी बीजेपी ने ‘लूट’ लिया है।

इसके साथ ही संपादकीय में लिखा गया है कि देश ने अब देख लिया है कि मंदिर विकास का असली मतलब क्या है। राम मंदिर में भगवान के दान-पात्रों को लूटा गया। कार सेवकों ने इसके लिए अपना खून बहाया, लेकिन आखिर में मंदिर की संपत्ति पर ही डाका डाल दिया गया।

जिस तरह महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, उसी तरह बीजेपी ने राम मंदिर को लूटा है। कम से कम अंबाबाई मंदिर में ऐसी चोरी और डकैती तो नहीं हुई। राम मंदिर में दान-पात्र की लूट कानून-व्यवस्था के पूरी तरह से फेल होने को दिखाती है। वे राम मंदिर की सुरक्षा भी नहीं कर सकते। फिर भी वो हमारे अंबाबाई मंदिर के विकास की बात करने की हिम्मत करते है।

इतना ही नहीं संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘पिछले एक दशक में देश के कई प्रमुख मंदिरों को लूटा गया और ये सभी लुटेरे भाजपा के भीतर ही मौजूद हैं और अमित शाह की गोद में बैठे हैं। अमित शाह आरोप लगाते हैं कि उद्धव ठाकरे, कांग्रेस की गोद में बैठे हैं। यह उनका महाराष्ट्र विरोध है। ये लोग खुद राम मंदिर के लुटेरे और लोकतंत्र के हत्यारे हैं।’ इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता अरविंद केजरीवाल भी राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर भाजपा पर निशाना साध चुके हैं।

इसके साथ ही चढ़ावा चोरी विवाद के बीच हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत और पूर्व रामलला पक्षकार महंत धर्मदास बाबा का बड़ा बयान सामने आया हैं. उन्होंने मंदिर की पूरी व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की और कहा कि इस मामले की जाँच एसआईटी द्वारा की जा रही हैं. जो भी दोषी होंगे, सीएम योगी किसी को नहीं बख्शेंगे.. अगर बख्शेंगे तो भगवान नहीं माफ नहीं करेंगे. महंत धर्मदास बाबा ने इस पूरे मामले पर दुख जताया और ट्रस्ट को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि इस मामले की एसआईटी जांच तो हो रही है, जो-जो लोग जाँच कर रहे हैं, हमें पूरा विश्वास है कि जाँच में पूरा सत्य निकल जाए.

योगी जी इसमें बिलकुल कोई लापरवाही नहीं करेंगे क्योंकि वो भी मठ-मंदिर वाले हैं और जानते हैं कि मंदिर कैसे चलाए जाते हैं. हनुमानगढ़ी के महंत ने कहा कि “पूरे भारत वर्ष में जितना बड़ा निंदनीय कार्य किया है इसका क्या सजा दिया जाए, इसका मापदंड नहीं है. ब्राह्मण का हक खाना ये कितना बड़ा अपराध है. ब्राह्मण का अहित करके किसी का वंश नहीं चलता हैं. उन्होंने दावा किया कि राम जन्मभूमि में बाहर लोगों को लाकर लूट हुई, ये आज से नहीं बहुत दिनों से चल रही है.”

गौरतलब है कि इसी महीने में यह विवाद तेज हुआ जब इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने आरोप लगाया कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान देशभर के सराफा कारोबारियों द्वारा दान की गई करीब 60 किलो चांदी को गलाकर विशेष ईंटें बनाई गई थीं, लेकिन इन ईंटों, चांदी के दीपकों, कटोरों और अन्य धार्मिक सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या उपयोग का हिसाब मंदिर प्रबंधन द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

दानदाताओं ने पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि इन मूल्यवान दान का क्या हुआ। अनुराग रस्तोगी ने खुद अपने परिवार की ओर से गुमनाम दान में दिए 3 किलो चांदी के दीपक का भी जिक्र किया, जो बाद में कहीं नहीं मिला। उन्होंने बताया कि सदस्यों से 10 ग्राम चांदी का छोटा दान इकट्ठा करके कुल 34 किलो से अधिक चांदी नींव में लगाने के लिए दी गई थी, लेकिन अब उसका हिसाब नहीं मिल रहा।

इस विवाद ने मंदिर के दैनिक चढ़ावे की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। हुंडी बॉक्स से निकाले गए नकद, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य दान की गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंक जमा करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे। कुछ कर्मचारियों पर कम राशि दर्ज करने, रसीद न जारी करने और मूल्यवान वस्तुओं को बिना हिसाब के ले जाने के आरोप हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की, जो मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों, SBI और TCS कर्मियों से पूछताछ कर रही है, CCTV फुटेज, फाइनेंशियल रिकॉर्ड और दान की फ्लो की जांच कर रही है। SIT की जांच में 60 किलो चांदी की सिल्लियां यानी ईंटें, गोल्ड चरण पादुकाएं और अन्य सामग्री गायब पाई गई हैं, जो प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े रिकॉर्ड से मैच नहीं कर रही हैं।

मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों से इनकार किया है और नियमित ऑडिट का हवाला दिया है, लेकिन विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बड़े स्तर पर घोटाले का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच और FIR की मांग की है। कुछ रिपोर्ट्स में कुल गायब राशि को 5 से 7.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक बताया गया है, जिसमें नकद, गोल्ड और सिल्वर शामिल हैं। इस विवाद का असर मंदिर के चढ़ावे पर भी पड़ा है, जहां दान में काफी कमी देखी गई।

दानदाता अब पारदर्शी रिकॉर्ड, रसीद प्रणाली और सार्वजनिक लेखा-जोखा की मांग कर रहे हैं, ताकि भक्तों का विश्वास बहाल हो सके. इसी बीच खबर यह भी आई कि राम मंदिर के चढ़ावा और दान में कथित तौर पर गबन की चल रही जांच के बीच बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक दान के पैसों की गिनती करने वाली टीम को बदल दिया गया है. बैंक की ओर से नकदी गणना में शामिल कर्मचारियों की टीम भी नई कर दी गई है. इसके साथ ही प्रक्रिया में लगाए गए स्वयंसेवकों की ड्यूटी और निगरानी व्यवस्था में तैनात कर्मियों को भी बदल दिया गया है.

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