21 साल बाद सपा के गढ़ पर चला बुलडोजर, सुबह होते-होते मलबे में बदला कार्यालय

सीतापुर में समाजवादी पार्टी के 21 साल पुराने जिला कार्यालय पर प्रशासन का बुलडोजर चला। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद नजूल भूमि पर बने भवन को तड़के ध्वस्त कर दिया गया। जानिए पूरी कार्रवाई, नोटिस और प्रशासन का पक्ष।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सीतापुर में सोमवार सुबह प्रशासन की एक बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। शहर के टाउन हॉल परिसर में स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। करीब दो दशक से अधिक समय से संचालित यह कार्यालय कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश और राजस्व अभिलेखों के आधार पर की गई। तड़के करीब चार बजे पुलिस और पीएसी के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया। इसके बाद नगर पालिका, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम चार बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंची और ध्वस्तीकरण शुरू कराया। लगभग दो घंटे में पूरा भवन गिरा दिया गया।

नजूल भूमि पर था कार्यालय

प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर सपा का जिला कार्यालय संचालित हो रहा था, वह नगर पालिका परिषद की नजूल भूमि है। वर्ष 2005 में तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने करीब 2500 वर्गफीट भूमि पार्टी कार्यालय के लिए आवंटित की थी। इसके बदले 100 रुपये वार्षिक किराया तय किया गया था। हालांकि, आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद 14 अप्रैल 2005 को यह आवंटन निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद भवन में पार्टी का जिला कार्यालय लगातार संचालित होता रहा। मामला लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और न्यायिक स्तरों पर विचाराधीन था।

डीएम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

हाल ही में डीएम न्यायालय ने भूमि खाली कराने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद प्रशासन ने भवन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक सपा जिला नेतृत्व को लगभग 15 दिन पहले नोटिस देकर परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई की संभावना को देखते हुए कार्यालय में रखा फर्नीचर और अन्य सामान पहले ही हटा लिया गया था। यही कारण रहा कि ध्वस्तीकरण के दौरान किसी प्रकार का विरोध या टकराव देखने को नहीं मिला।

मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

कार्रवाई के दौरान नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह, सदर एसडीएम डॉ. जर्नादन कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। ध्वस्तीकरण के बाद प्रशासन ने मलबा हटाने का काम भी शुरू करा दिया। प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर जिले में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं, क्योंकि यह भवन लंबे समय से समाजवादी पार्टी की स्थानीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था।

रिपोर्ट – वली चौधरी

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