लखनऊ अग्निकांड के बाद नींद से जागा केडीए, कई कोचिंग संस्थान किए सील.. लेकिन बड़े शोरूमों को केवल नोटिस देकर बचाने का प्रयास..?
लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण ने 16 कोचिंग संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की। वहीं बड़े शोरूमों को नोटिस दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और KDA का पक्ष।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कानपुर [प्रांजुल मिश्रा] : लखनऊ में कोचिंग संस्थान में लगी आग ने प्रशासनिक मशीनरी को झकझोर दिया। नतीजा यह हुआ कि कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) भी अचानक सक्रिय हो उठा। शहर के अलग-अलग जोनों में अभियान चलाकर 16 कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों, अग्निशमन व्यवस्था और भवन नियमों के पालन का हवाला देते हुए इसे जनहित की बड़ी कार्रवाई बताया।

केडीए के जोन-1ए में 3, जोन-2बी में 5, जोन-3 में 3 और जोन-4 में 5 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई हुई। साथ ही 22 अन्य प्रतिष्ठानों को भी चिन्हित कर आगे कार्रवाई का दावा किया गया। लेकिन इस कार्रवाई के बीच शहर वासियों के दिमाग में एक सवाल तो जरूर घूम रहा होगा —क्या केडीए की सख्ती सभी के लिए बराबर है..?

क्योंकि शहर के कुछ बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर लंबे समय से चर्चा है कि उनका निर्माण स्वीकृत नक्शों और निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। इनमें शॉपर्स स्टॉप, रिलायंस डिजिटल, रिलायंस ट्रेंड्स, जुडियो, आदित्य विजन और डीआईवाई जैसे प्रतिष्ठानों के नाम भी चर्चाओं में शामिल बताए जाते हैं। सुरक्षा मानकों और भवन नियमों की अनदेखी इतनी गंभीर है कि छोटे प्रतिष्ठानों को सील किया जा सकता है, तो फिर बड़े प्रतिष्ठानों के मामले में कार्रवाई की गति अचानक धीमी क्यों पड़ जाती है…?

केडीए का एक नया प्रशासनिक सूत्र भी चर्चा में है—“छोटा हो तो सील करो, बड़ा हो तो नोटिस दो।” सूत्र बताते हैं कि जब कुछ मामलों में कार्रवाई की बात उठी तो जवाब मिला—”नोटिस काट देंगे, शमन शुल्क जमा करवा देंगे।” क्या केडीए की प्रवर्तन नीति का अंतिम अध्याय नोटिस और शमन शुल्क ही है….? यदि किसी भवन में सेटबैक, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा या स्वीकृत मानचित्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो क्या उसका समाधान केवल आर्थिक शुल्क है?

क्या नियमों का पालन कराना उद्देश्य है या फिर नियम तोड़ने की दर तय करना? दिलचस्प बात यह है कि लखनऊ की घटना के बाद अचानक शहर में सुरक्षा मानकों की याद आ गई। जिन भवनों के सामने ज़िम्मेदार अधिकारी वर्षों से गुजरते रहे, जिनकी ऊंचाई, पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियां किसी से छिपी नहीं थीं, वे अचानक जांच के दायरे में आ गए। सवाल यह भी है कि यदि खतरा था तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि खतरा नहीं था तो अब इतनी हड़बड़ी क्यों..? अग्निकांड कोई वीआईपी और आम आदमी में फर्क नहीं करता। आग लगने पर न तो प्रतिष्ठान का टर्नओवर देखा जाता है और न ही ब्रांड का नाम। ऐसे में सुरक्षा मानकों पर कार्रवाई भी बिना भेदभाव के होनी चाहिए…..।

क्या शॉपर्स स्टॉप को नोटिस थमा देना ही पर्याप्त कार्रवाई है? क्या जिन प्रतिष्ठानों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं, वहां केवल कागजी कार्रवाई हुई या वास्तविक निरीक्षण और वैधानिक कार्रवाई भी की गई? शहर में नया भवन निर्माण नियम लागू तो नहीं हो गया—पहले निर्माण करो, फिर शमन करवा लो, और अंत में नोटिस को फ्रेम करवाकर दीवार पर टांग लो..? फिलहाल केडीए की सीलिंग कार्रवाई की चर्चा जितनी हो रही है, उससे कहीं अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या यह अभियान वास्तव में नियमों का समान रूप से पालन कराने के लिए है या फिर कुछ जगह बुलडोजर और कुछ जगह नोटिस का संतुलन बनाए रखने के लिए। अब निगाहें केडीए के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। प्रवर्तन का मतलब केवल नोटिस, शमन और प्रेस विज्ञप्ति है या फिर मानकों के विपरीत निर्माणों पर निष्पक्ष और समान कार्रवाई भी देखने को मिलेगी।
जेई बोला नोटिस काट देंगे..शमन करवा लेंगे।
लखनऊ की एक छोटी बिल्डिंग जिसमें कोचिंग संचालित होती थी उसमें आग लगी तो कानपुर में कुछ कोचिंगों समेत 15-16 स्थानों पर कार्यवाही की बात सामने आ गई सवाल ये उठता है कि अगर लखनऊ में कोचिंग में आग लगी है तो कानपुर में अब केवल कोचिंगों में ही आग लगेगी क्या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पूरी तरह से सुरक्षित है या फिर उनकी आग और दुर्घटनाओं से उनकी दोस्ती हो गई है….? आपके अपने विश्वसनीय अख़बार 4PM में 12 जून को छपी ख़बर के बाद हरकत में आए केडीए के प्रवर्तन दस्ते ने शॉपर्स स्टॉप, रिलायंस डिजिटल, रिलायंस ट्रेंड्स, जुडियो, आदित्य विजन और डीआईवाई जैसे प्रतिष्ठानों पर केवल नोटिस काट कर अपनी पीठ थपथपा ली लेकिन क्या नोटिस काट देने से कार्यवाही पूरी हो गई जोन 1A के जेई अर्पण सिंह ने बताया था शॉपर्स स्टॉप को नोटिस दी गई है वहीं जोन 1A के ही जेई संतोष गोंड ने बेहद बेतुका या फिर यूँह कहें कि बचकाना बयान देते हुए कहा “सभी का नोटिस काट देंगे अगर नक्शा बिल्डिंग के अनुसार पास नहीं है तो पास अवशय करवाना पड़ेगा शमन जमा करवा देंगे” नयी भर्ती वाले जेई के अनमेच्योर बयान को सुनकर केडीए वीसी अंकुर कौशिक को जेई संतोष गोंड को स्वर्ण पदक का अवार्ड तो देना ही चाहिए नहीं तो उन्हें से प्रवर्तन जैसी जिम्मेदार विभाग से तत्काल प्रभाव से हटाकर मेच्योर और अनुभवी अभियंता को जोन 1 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लाना चाहिए जिससे केडीए भविष्य में उपहास का पात्र न बन सके…सवाल ये उठता है कि नोटिस काट का शमन जमा करवा कर लोगों की जान का सौदा ही असल कार्यवाही है…? लोग मरते रहें और केडीए नोटिस काट कर शमन शुल्क वसूलता रहे मतलब लोगों की जान की कीमत से ज्यादा प्राधिकरण के जिम्मेदारों के लिए शमन शुल्क(राजस्व) की कीमत है…? इस बेतुके बयान और कार्यवाही केवल नोटिस तक सीमित रह जाना कहीं न कहीं पूंजिपतियों से सेटिंग (भ्रष्टाचार) की ओर इशारा कर रहा है आखिर ये व्यावसायिक प्रतिष्ठान का रसूख इतना ज्यादा है कि केडीए सील करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है..?
वहीं इस पूरे मामले पर कानपुर विकास प्राधिकरण के सचिव अभय कुमार पाण्डेय ने बताया केडीए का प्रवर्तन दस्ता सभी जोनों में प्रभावी कार्रवाई कर रहा है कल भी कई कोचिंग को और अन्य निर्माण पर सीलिंग के कार्रवाई की गई है। मानक विहीन निर्माण बख्शे नहीं जाएंगे शॉपर्स स्टॉप, रिलायंस ट्रेंड्स, रिलायंस डिजिटल, जुडियो, डीआईवाई और आदित्य विजन सभी के खिलाफ कार्यवाही हेतु प्रवर्तन प्रभारी अधिकारी जोन 1A को निर्देशित कर रहा हूं।
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