क्या 3 से ज्यादा बच्चों वाले परिवारों के लिए बदल गए नियम? जानिए पूरा मामला

असम में एक सरकारी अस्पताल ने तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं को फ्री जांच की सुविधा बंद कर दी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: असम में एक सरकारी अस्पताल ने तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं को फ्री जांच की सुविधा बंद कर दी है. मतलब जिनके 3 से ज्यादा बच्चे हैं या जो चौथी बार मां बनने वाली हैं, उन्हें अस्पताल में फ्री सुविधाएं नहीं मिलेंगी. इसे राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लागू करने की बात कही गई है.

असम के एक सरकारी अस्पताल ने बड़ा फैसला किया है. अब यहां तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं को फ्री जांच यानी मुफ्त डायग्नोस्टिक की सुविधा नहीं मिलेगी. एक जुलाई से यह नियम लागू होगा. बारपेटा के स्थानीय विधायक और राज्य विधानसभा के स्पीकर रंजीत कुमार दास ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल को सलाह दी है कि इस नियम को केवल एक अस्पताल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरे असम राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लागू कर दिया जाए.

दास बारपेटा रोड शहर में मौजूद ‘फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) की मैनेजमेंट कमिटी के अध्यक्ष हैं. एफआरयू में कल एक नई अल्ट्रासाउंड मशीन लगाई गई. इसके बाद उन्होंने कहा कि कमिटी ने यह नियम बनाया है कि जिन महिलाओं के 3 से ज्यादा बच्चे हैं या जो चौथी बार मां बनने वाली हैं, उन्हें अस्पताल में फ्री सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

जनसंख्या कंट्रोल की दिशा में कदम
उनका मानना है कि अगर इन महिलाओं को फ्री सुविधाएं दी गईं, तो जनसंख्या को नियंत्रित करने की उनकी योजना फेल हो जाएगी. इसके अलावा दास ने असम के स्वास्थ्य मंत्री से यह भी अपील की है कि वे पूरे असम राज्य में ही एक ऐसा नया नियम लागू करें.

असम में ‘दो-बच्चों’ का कानून
दरअसल, असम सरकार ने राज्य में ‘दो-बच्चों के नियम’ को कड़ा कर दिया है. पिछले साल दिसंबर में इसकी घोषणा की गई थी. इसके तहत सरकारी नौकरियों, स्वयं-सहायता समूहों के लाभ और पंचायत-नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त अनिवार्य है. राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में ‘दो-बच्चों के नियम’ को मजबूत करने के मकसद से जनसंख्या और महिला सशक्तिकरण पर 2017 की नीति में संशोधन की घोषणा की थी. हालांकि, इसमें कुछ विशेष समुदायों को छूट दी गई थी.

इन समुदायों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ‘चाय बागान जनजाति’ और मटक-मोरन समुदाय शामिल हैं. इन समुदायों के लोग तीन बच्चे होने तक भी सरकारी नौकरी, सुविधाओं और चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह योग्य रहेंगे. राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा 5 दिसंबर, 2025 को अधिसूचना जारी किए जाने के तुरंत बाद यह नीति लागू हो गई.

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