कानपुर: दो दोस्तों की आखिरी ड्यूटी! लखनऊ अग्निकांड की अंदर तक झकझोर देने वाली कहानी

लखनऊ अग्निकांड में कानपुर के दो दोस्तों संयम विज और सूरजभान सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों एक एनीमेशन स्टूडियो में थ्रीडी आर्टिस्ट थे। एक घर में दादी की तेरहवीं की तैयारी थी, जबकि दूसरे परिवार ने मां से बेटे की मौत की खबर तक छिपा ली।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कानपुर के दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। हादसे में गोविंद नगर निवासी 28 वर्षीय संयम विज और बर्रा-सात निवासी 25 वर्षीय सूरजभान सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों एक एनीमेशन स्टूडियो में थ्रीडी आर्टिस्ट के रूप में काम करते थे और नौकरी के साथ-साथ गहरी दोस्ती भी साझा करते थे। हादसे की खबर जैसे ही कानपुर पहुंची, दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। परिजन और परिचित तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हो गए। जिस घर में धार्मिक कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी, वहां अचानक मातम पसर गया।

दादी की तेरहवीं में आना था, उससे पहले पहुंच गई मौत की खबर

संयम विज के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महज दस दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनका सत्रहवां संस्कार होना था। परिवार संयम के घर पहुंचने का इंतजार कर रहा था, लेकिन उससे पहले मौत की खबर आ गई। संयम के पिता पुष्पराज का वर्षों पहले निधन हो चुका था। परिवार के लोगों ने बताया कि वह मेहनती और जिम्मेदार युवा थे। उनकी शादी के लिए भी रिश्ते देखे जा रहे थे और जल्द ही शुभ समाचार की उम्मीद थी।

वहीं बर्रा-सात निवासी सूरजभान सिंह की मौत ने भी परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पिता के निधन के बाद वह परिवार की बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। नौकरी के कारण लखनऊ में रहते थे, लेकिन हर सप्ताहांत घर जरूर आते थे। रविवार को वह काम पर लौटे थे, किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी।

सूरजभान के परिवार में उनकी मां मीरा और छोटा भाई सम्राट हैं। परिजनों ने फिलहाल उनकी मां को बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी है। परिवार को आशंका है कि अचानक यह खबर मिलने से उन्हें गंभीर सदमा लग सकता है।

सेंसर गेट पर उठे सवाल, परिजनों ने बताई हादसे की बड़ी वजह

संयम के मामा सौरभ दुआ ने हादसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस कॉम्प्लेक्स में उनका भांजा काम करता था, वहां सेंसर आधारित गेट लगे थे। आग लगने के बाद सेंसर सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया, जिससे गेट समय पर नहीं खुल सके। कई लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन धुएं और दम घुटने के कारण जान नहीं बच सकी।

परिजनों का आरोप है कि यदि आपात स्थिति में गेट खुल जाते या पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। दोनों युवकों के परिजनों ने बताया कि वे हंसमुख स्वभाव के थे और हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहते थे। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव कानपुर लाए जाने की तैयारी की जा रही है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा

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