क्या आपको याद है? जब भारत में आया था वेनेजुएला जैसा भूकंप

राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर भव्य परेड की तैयारी चल रही थी. लेकिन इस बीच पश्चिम भारत के गुजरात के भुज में सुबह 8.46 बजे भूकंप का जोरदार झटका लगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर भव्य परेड की तैयारी चल रही थी. लेकिन इस बीच पश्चिम भारत के गुजरात के भुज में सुबह 8.46 बजे भूकंप का जोरदार झटका लगा. इस झटके ने रंग में भंग डाल दिया. भूकंप से तबाह हुए गुजरात को हर ओर से मदद पहुंचने लगी.

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार 2 शक्तिशाली भूकंप (7.2 और 7.5) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. जोरदार भूकंप की वजह से कई इमारतें ढह गईं. ज्यादातर सड़कों में बड़ी दरारें पड़ गईं. इस जलजले में 10 हजार से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. अमेरिका, जापान, ब्राजील और कोलंबिया में भी बड़े झटके लगे हैं. दुनिया हर ओर इसी विनाशकारी भूकंप की चर्चा हो रही है, लेकिन भारत में ऐसा ही एक भूकंप 25 साल पहले आया था जब 15 हजार से अधिक लोग इस भूकंप की चपेट में आकर मारे गए थे तो भारी तबाही भी मचाई थी.

बात हो रही है 25 साल पहले 26 जनवरी 2001 को गुजरात के अहमदाबाद से 300 किलोमीटर दूर भुज क्षेत्र में आए विनाशकारी भूकंप की. देश अपना 52वां गणतंत्र दिवस मना रहा था. राजधानी दिल्ली में परेड की तैयारी चल रही थी. लेकिन इस बीच पश्चिम भारत के गुजरात के भुज में सुबह 8.46 बजे भूकंप का जोरदार झटका लगा. रंग में भंग पड़ गया और तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने पीड़ितों के लिए अभियान शुरू कर दिया.

7 से अधिक रही भूकंप की तीव्रता
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने इसकी तीव्रता 7.5 मापी तो भारतीय मौसम विभाग ने इसे 6.9 की तीव्रता वाला भूकंप करार दिया. भूकंप का असर गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान तक भी रहा. साथ ही पड़ोसी मु्ल्क पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी भूकंप ने तबाही मचाई.

26 जनवरी 2001 को सुबह आए भूकंप का केंद्र गुजरात के कच्छ जिले के भचाऊ तालुका में चोबारी गांव से करीब 9 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में था. इस भूकंप की अधिकतम मर्काली तीव्रता (Mercalli intensity) XII (सबसे अधिक) थी. भूकंप की वजह से डेढ़ करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए थे.

20 हजार मारे गए, 1.66 लाख जख्मी
भूकंप ने अपनी विनाशलीला दिखाई और कुछ देर में हर ओर तबाही के निशान छोड़ गया. इस भूकंप में हजारों लोग मारे गए. करीब 2 लाख लोग घायल हुए. हजारों की संख्या में घर भी जमींदोज हो गए. भूकंप के विनाश को लेकर भारत सरकार की ओर से 20 मार्च को रिपोर्ट जारी की गई जिसमें 20 हजार से अधिक लोग मारे गए. 1.66 लाख से अधिक लोग जख्मी हो गए तो 37 हजार से घर पूरी तरह से तबाह हो गए.

देश के अधिकतर हिस्सों में इस भूकंप के झटके महसूस किए गए और बड़े इलाके में खासा नुकसान भी हुआ. अकेले गुजरात के कीरब 20 जिलों में हलचल महसूस किया गया और कई जगहों पर नुकसान भी हुआ. राज्य का पूरा कच्छ इलाका – जो 3 ओर से ‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’, ‘लिटिल रन ऑफ कच्छ’ और अरब सागर से घिरा है- सबसे अधिक प्रभावित हुआ.

अकेले कच्छ क्षेत्र में 18 हजार मौतें
यह तबाही कच्छ क्षेत्र के भुज के अलावा अनजार, भचाऊ, रापड़ और अहमदाबाद तक में खासी देखी गई. कच्छ इलाके में हुए अन्य बड़े नुकसानों में जमीन तक धंस (लिक्विफैक्शन) गई. करीब 20 मीटर की ऊंचाई वाले मिट्टी के बांध टूट गए, कई पुलों को नुकसान पहुंचा. कई जगहों रेलमार्ग और हाईवे टूट गए. इस वजह से लोगों की लंबे समय तक भूकंप राहत केंद्रों में रहने को मजबूर होना पड़ा.

भूकंप से लगा 22 हजार करोड़ का झटका
भूकंप की वजह से कच्छ क्षेत्र में 18 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई. इसके बाद सबसे अधिक मौत अहमदाबाद में हुई. भुज एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार, कच्छ जिले के अकेले भुज शहर में 2,370 लोगों की मौत हो गई जबकि 3,187 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. भूकंप में 11,036 घर पूरी तरह से ढह गए और 27,617 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा.

वहीं अहमदाबाद में 760 लोग मारे गए तो 60 से अधिक 4 मंजिला इमारतें और 10 मंजिला 4 इमारतें ढह गईं. राजकोट 433 लोग और जामनगर में 119 लोग मारे गए. पिछले 5 दशक में आए इस सबसे भीषण भूकंप की वजह से देश को करीब 22 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में 19 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 2 हजार घर तबाह हो गए.

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