अडानी समूह के एजीएम -2०26 में अडानी शेयरधारकों से बोले- ना हम झुके हैं और ना ही रुके हैं

चेयरमैन बोले- इन्फ्रास्ट्रक्चर देश की रीढ़

  • बोले- इंटेलिजेंस नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है
  • 25 हजार करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू जारी करना हमारी विश्वसनीयता की एक बड़ी कसौटी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपने शेयरधारकों एकबार फिर वादा किया है कि वह कभी रुके, न कभी झुके, मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहे हैं। अडानी ग्रुप की 34वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए, अरबपति उद्योगपति ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ की हड्डी बताया। इसमें सडक़ें, बंदरगाह, हवाई अड्डे, पावर प्लांट, ट्रांसमिशन नेटवर्क, रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, गैस पाइपलाइन, लॉजिस्टिक्स हब, जल प्रणालियां और औद्योगिक इकोसिस्टम जैसी संपत्तियां शामिल हैं। अडानी ने कहा कि एजीएम-2०26 में कहा कि कठिनाइयों के बावजूद ग्रुप कभी नहीं रुका और भारत के भविष्य पर अटूट विश्वास बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि किसी भी समूह के सफर में कुछ साल ऐसे आते हैं, जो सिर्फ एक पड़ाव नहीं होते, बल्कि उसकी पहचान बन जाते हैं। ऐसे साल, जो अपने विश्वास की ताकत को साबित करते हैं, जो हर चुनौती के बीच मजबूती से खड़े रहने का हौंसला दिखाते हैं और जो यह फर्क स्पष्ट करते हैं कि कौन लोग हालात सुधरने का इंतजार करते हैं और कौन मुश्किल समय में भी आगे बढ़ते हुए नया निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 आपके समूह के लिए ऐसा ही एक साल रहा। जब दुनिया पहले से ज्यादा जटिल होती गई, ऊर्जा सुरक्षा फिर से देशों की प्राथमिकता बन गई और तकनीक किसी भी देश की ताकत और आत्मनिर्भरता का अहम् हिस्सा बन गई। लेकिन, इन चुनौतियों के बाद भी आपका अडानी समूह एक अटूट विश्वास पर कायम रहा कि भारत की विकास यात्रा को थामकर नहीं रखा जा सकता। जब दूसरे लोग परिस्थितियों पर चर्चा कर रहे थे, तब समूह लगातार काम करता रहा। अपने शेयरहोल्डर्स से मैं कहना चाहता हूं कि आपके भरोसे, सब्र और हिम्मत के लिए धन्यवाद। आप न सिर्फ हमारी कामयाबी के समय में, बल्कि मुश्किल दौर में भी हमारे साथ खड़े रहे, आपका भरोसा ही हमारी ताकत है। बड़े पैमाने पर काम अकेले नहीं होता, यह सहयोग और इस साझा विश्वास से होता है कि भारत का आगे बढऩा किसी एक संस्था से कहीं ज्यादा बड़ी बात है। ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में दुनिया के सबसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के रूप में हमने अपने सफर को और आगे बढ़ाया। इसी विश्वास की एक झलक इस वर्ष की शुरुआत में लाए गए 25 हजार करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू में भी दिखाई दी। मेरे लिए यह सिर्फ पूंजी जुटाने का एक माध्यम नहीं था, बल्कि हमारी विश्वसनीयता की एक बड़ी कसौटी थी।

भविष्य के आने का इंतजार नहीं अभी से सभी तैयारी

आज हम दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हैं, जो भविष्य के आने का इंतजार नहीं कर रहीं, बल्कि उसके लिए पहले से तैयार हैं। सच तो यह है कि हम वर्षों से इसी दिशा में अपनी तैयारी कर रहे थे। हमने बहुत पहले ही यह समझ लिया था कि दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां भू-राजनीतिक समीकरण और जटिल होंगे, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं नए सिरे से आकार लेंगी और ऊर्जा सुरक्षा फिर से देशों की रणनीति के केंद्र में आ जाएगी। हमने यह भी देखा कि तकनीकी नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की दौड़ में सबसे बड़ी चुनौती महत्वाकांक्षा की कमी नहीं होगी, बल्कि मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता होगी। इसी बात को मैं थोड़ा विस्तार से समझाना चाहता हूं। हमारी सबसे बड़ी ताकत इस बात में है कि हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न हिस्से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

तीन बुनियादी कदम उठाए

चेयरमैन ने कहा मैं उन तीन बुनियादी कदमों के बारे में बात करता हूं, जो हम ऐसे संगठन बनाने के लिए उठा रहे हैं, जो अगले दशक में हमारे विजन को हकीकत में बदलेंगे। पहला- हम अपने काम करने के तरीके को आसान बना रहे हैं, हम अपने हेडक्वार्टर और साइट्स, दोनों जगहों पर तीन-स्तरीय स्ट्रक्चर लागू कर रहे हैं, ताकि अफसरशाही कम हो, जवाबदेही बेहतर हो और फैसले लेने और उन्हें लागू करने के बीच की दूरी कम हो। हर भूमिका, हर प्रोसेस और हर स्तर से कुछ न कुछ वैल्यू मिलनी चाहिए। जो काम मुख्य काम नहीं हैं, उन्हें हमारे जीसीसी या चुने हुए पार्टनर्स को सौंप दिया जाएगा। दूसरा- हम अपने कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ काम करने का तरीका बदल रहे हैं। हम उन्हें देश-निर्माण में लंबे समय के पार्टनर के तौर पर देखते हैं। तीसरा- और सबसे अहम बात यह है कि हम अपने बदलावों में वर्कर की गरिमा को सबसे ऊपर रख रहे हैं। हमारे अपने और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लगभग 4 लाख लोगों में से करीब 85′ लोग हमारी साइट्स पर जमीनी स्तर पर काम करते हैं। यही वे लोग हैं, जो हमारे प्लांट्स को हकीकत का रूप देते हैं, और हम प्रतिबद्ध हैं कि हर वर्कर के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो, रहने की साफ-सुथरी जगह, साफ-स्वच्छ खाना, मेडिकल सुविधाएं, सुरक्षित माहौल और समय पर सही वेतन मिले।

देश के शानदार अध्याय अभी लिखे जा रहे

अडानी ग्रुप के चेयरमैन ने कहा, ‘अपने परिवारों से मैं कहना चाहता हूं कि हमारी सार्वजनिक कामयाबी के पीछे का बोझ आप ही उठाते हैं, आप हमें जमीन से जुड़े रहने की ताकत और आगे बढ़ते रहने के लिए भावनात्मक आधार देते हैं. भारत के प्रति, हम उस देश की सेवा करने के सौभाग्य के लिए बहुत आभारी हैं, जिसके सबसे शानदार अध्याय अभी लिखे जा रहे हैं और जिसके सबसे अहम पन्ने अभी आने बाकी हैं। तो आइए, यह साल ऐसा हो जब हमें हमारे किये कामों के लिए याद किया जाए. हमने तब निर्माण किया, जब निर्माण करना सबसे मुश्किल था, हमने तब भरोसा किया, जब भरोसा करना सबसे मुश्किल था, और हमने साबित किया कि हिम्मत और डटे रहना ही हमारे जीने का तरीका है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर की गति व इंटेलिजेंस की ताकत से राष्ट्र निर्माण

अडानी ने राष्ट्र निर्माण की इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष मेरे संबोधन का विषय है- इन्फ्रास्ट्रक्चर को गति देना तथा इंटेलिजेंस की ताकत का उपयोग करना। आज ये दोनों अलग-अलग प्राथमिकताएं नहीं रह गई हैं। ये ऐसे दो शक्तिशाली इंजन हैं, जो भारत की ताकत को नई दिशा देंगे, उसकी आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेंगे तथा इस सदी की अग्रणी वैश्विक शक्तियों में शामिल होने की उसकी यात्रा को गति देंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर में सडक़ें, पोट्र्स, एयरपोट्र्स, ट्रांसमिशन लाइन्स, पॉवर प्लांट्स, नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, गैस नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म, सीमेंट उत्पादन क्षमता, जल प्रबंधन प्रणालियां और औद्योगिक इकोसिस्टम जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर ही किसी देश की विकास यात्रा की मजबूत नींव तैयार करते हैं। इंटेलिजेंस में डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन, प्रेडिक्टिव सिस्टम्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम एनालिटिक्स और मशीन आधारित निर्णय सहायता जैसी क्षमताएं इन सभी परिसंपत्तियों को अधिक सक्षम, अधिक तेज और बदलती जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं।

देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च

गौतम अडानी ने ग्रुप द्वारा किए जा रहे निवेश की भारी-भरकम रकम के बारे में बताते हुए कहा, ‘वित्त वर्ष 26 के दौरान हमारे ग्रुप ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. यह खर्च इस साल भारत में पूरे प्राइवेट सेक्टर द्वारा किए गए कुल नए निवेश का 3० प्रतिशत से भी अधिक था। यह निवेश केवल एक वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ग्रोथ जर्नी में ग्रुप के गहरे और लंबे समय के भरोसे का प्रतीक है. इतनी बड़ी पूंजी का इस्तेमाल इस बात को साबित करता है कि हमारा ग्रुप देश के आर्थिक विकास के अगले चरण को मजबूत करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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