बांदा में किसानों का बड़ा विरोध, खेतों के बीच हाईटेंशन लाइन डालने पर मचा बवाल

बांदा के पिपरहरी गांव में किसानों ने खेतों से बिना सहमति हाईटेंशन लाइन और टावर लगाए जाने का विरोध किया है। किसानों ने डीएम को ज्ञापन देकर वैकल्पिक मार्ग और जांच की मांग की है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा जिले के पैलानी तहसील क्षेत्र में किसानों और विद्युत परियोजना से जुड़े कार्यों को लेकर नया विवाद सामने आया है। पिपरहरी गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी अनुमति के बिना खेतों के बीच से हाईटेंशन लाइन और टावर स्थापित किए जा रहे हैं। इससे न केवल खेती-किसानी प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में जमीन के उपयोग पर भी असर पड़ सकता है। अपनी मांगों को लेकर किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि उनकी आपत्तियों के बावजूद कार्य जारी है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

खेतों के बीच से लाइन निकालने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग और संबंधित ठेकेदार द्वारा खेतों के बीच से हाईटेंशन लाइन गुजारने का काम किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी सहमति नहीं ली गई और न ही उनकी चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान दिया गया। कई किसानों ने दावा किया कि एक ही परिवार की एक से अधिक कृषि भूमि से लाइन निकाली जा रही है, जिससे खेती का क्षेत्र प्रभावित होगा और जमीन का उपयोग सीमित हो सकता है।

खेती और भविष्य की योजनाओं पर असर की चिंता

किसानों का कहना है कि खेतों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनें भविष्य में कई तरह की समस्याएं खड़ी कर सकती हैं। उनका मानना है कि इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहेगी और जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, उनकी आजीविका पूरी तरह कृषि पर आधारित है। ऐसे में यदि खेती प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरण की मांग

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि प्रस्तावित हाईटेंशन लाइन और टावरों को किसी वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि किसानों की सहमति के बिना किसी प्रकार का कार्य न कराया जाए। किसानों का कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन ऐसे कार्यों में किसानों के हितों और अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन

ज्ञापन मिलने के बाद जिलाधिकारी ने किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अब किसानों की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि किसानों और संबंधित विभाग के बीच संवाद स्थापित होता है, तो विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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