इबोला के डर से सऊदी का बड़ा फैसला, 3 देशों की यात्रा पर रोक, वीजा नियम बदले

इबोला संक्रमण की आशंका के बीच सऊदी अरब ने एहतियाती कदम उठाते हुए 3 देशों से जुड़ी यात्रा... और वीज़ा नियमों में बदलाव किया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सऊदी अरब सरकार ने इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है.. सरकार ने अपने नागरिकों के लिए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.. यह सावधानी का कदम वायरस को सऊदी अरब में फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है.. और यह नया नियम 25 जून 2026 से लागू हो गया है..

वहीं इस फैसले के तहत सऊदी अरब के नागरिक अब इन तीन देशों में नहीं जा सकेंगे.. साथ ही, इन देशों से आने वाले यात्रियों के लिए वीजा जारी करना भी बंद कर दिया गया है.. सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर कोई यात्री किसी तीसरे देश के रास्ते सऊदी अरब आ रहा है.. लेकिन उसने पिछले 21 दिनों में इन तीनों देशों में यात्रा की है.. तो उसे भी देश में प्रवेश नहीं मिलेगा.. यह 21 दिन की समय सीमा इबोला वायरस के इनक्यूबेशन पीरियड को ध्यान में रखकर तय की गई है..

सऊदी पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी ने कहा कि देश का स्वास्थ्य निगरानी.. और महामारी प्रतिक्रिया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है.. विभाग अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है.. ताकि कोई भी संक्रामक बीमारी देश में न घुस सके.. अथॉरिटी ने यह भी बताया कि सऊदी अरब में अभी तक इबोला का कोई संदिग्ध या पुष्ट मामला सामने नहीं आया है.. और देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है..

आपको बता दें कि यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है.. क्योंकि सऊदी अरब दुनिया भर से लाखों मुसलमानों को हज.. और उमरा के लिए आकर्षित करता है.. स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर सरकार ने यह कदम उठाया है.. ताकि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान कोई खतरा न हो.. वेकाया ने भरोसा दिलाया है कि वे दुनिया भर में फैल रही बीमारियों पर लगातार नजर रख रहे हैं.. और जरूरत पड़ने पर नियमों में बदलाव करेंगे.. इबोला एक बहुत खतरनाक वायरस है.. जो इबोला वायरस डिजीज पैदा करता है.. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है.. लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त.. और शरीर में अंदरूनी खून बहना शामिल है.. यह बीमारी बहुत तेजी से फैल सकती है.. और मृत्यु दर भी काफी ज्यादा होती है..

वर्तमान में अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला का प्रकोप फैला हुआ है.. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं.. इन देशों में संघर्ष, अवैध खनन और लोगों का बार-बार स्थान बदलना वायरस के फैलाव को बढ़ा रहा है.. विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन देशों में महामारी नियंत्रण के प्रयास कर रही हैं..

सऊदी अरब ने केवल इन तीन देशों पर रोक नहीं लगाई है.. पड़ोसी देशों जैसे रवांडा, बुरुंडी, तंजानिया.. और रिपब्लिक ऑफ कांगो से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी भी बढ़ा दी गई है.. इन देशों से आने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच अब ज्यादा सख्ती से की जाएगी.. यह कदम वायरस के संभावित प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है.. सऊदी अरब में वेकाया (सऊदी पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी) स्वास्थ्य संबंधी सभी मुद्दों को संभालती है.. इस अथॉरिटी ने इबोला के खतरे को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की.. उन्होंने एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमा पार करने वाले सभी प्रवेश द्वारों पर स्वास्थ्य निगरानी बढ़ा दी है..

आपको बता दें कि अथॉरिटी के अधिकारियों ने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे WHO, CDC और अन्य देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.. सऊदी अरब में पहले से ही मजबूत महामारी नियंत्रण प्रणाली है.. जो कोविड-19 महामारी के दौरान भी अच्छा काम कर चुकी है.. सरकार ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे इन प्रभावित देशों की यात्रा टालें.. अगर कोई जरूरी यात्रा कर रहा है.. तो वापसी पर 21 दिन तक स्वास्थ्य निगरानी में रहना होगा.. सऊदी नागरिकों को भी विदेश यात्रा से पहले स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेनी चाहिए..

सऊदी अरब अकेला देश नहीं है जिसने इबोला को लेकर सख्ती की है.. अमेरिका, कनाडा, बहामास, बहरीन, जॉर्डन और कई अन्य देशों ने भी यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं.. अमेरिका ने DRC, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले गैर-नागरिकों पर 21 दिन का प्रतिबंध लगाया है.. कई देशों ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं.. कि वे प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की जांच सख्ती से करें.. कुछ देशों ने वीजा जारी करना भी रोक दिया है.. वहीं यह वैश्विक स्तर पर समन्वय दिखाता है कि देश इबोला जैसे खतरनाक वायरस से कैसे निपट रहे हैं..

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के कई मामले सामने आए हैं.. यहां जंगलों वाले इलाकों में वायरस का प्रसार तेज है.. युगांडा और दक्षिण सूडान में भी स्थिति नियंत्रण में लाने के प्रयास जारी हैं.. इन देशों की सरकारें स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही हैं.. लोगों को हाथ धोने, संक्रमित व्यक्तियों से दूर रहने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है.. ये देश पहले से ही गरीबी, संघर्ष और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं.. इबोला का प्रकोप इन समस्याओं को और बढ़ा रहा है..

 

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