सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, गाजा और ईरान-अमेरिका युद्ध बना मुद्दा

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने मध्यस्थता के मौके को खो दिया,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने मध्यस्थता के मौके को खो दिया, जिसका फायदा पाकिस्तान ने उठाया. सोनिया ने इजराइल के साथ बढ़ते संबंधों और पुराने सहयोगियों, जैसे फिलिस्तीन व ईरान से दूरी बनाने की आलोचना की.

कांग्रेस सभापति सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला किया है. उन्होंने इस मसले पर इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा होता तो पाकिस्तान की पूछ नहीं की जाती.

सोनिया गांधी ने लेख लिख कर सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि हम इजराइल के रणनीतिक दायरे में और गहरे धंसते जा रहे हैं, जबकि दुनिया उससे दूर हो रही है. ऐसे हालात में प्रधानमंत्री का इजराइल दौरा और वो भी ईरान के खिलाफ इजराइल की जंग और उसके टॉप राजनीतिक नेताओं की हत्या से कुछ दिन पहले, इतिहास में एक हैरान करने वाले रणनीतिक फैसले के तौर पर दर्ज होगा.

उन्होंने कहा कि हमने फिलिस्तीन, ईरान और पूरे मध्य पूर्व में अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बना ली है. हमने वैश्विक जनमत से भी खुद को दूर कर लिया है और हमने पाकिस्तान – एक ऐसा देश जो खतरनाक आतंकवादियों को पनाह देता रहा है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका हथियाने का मौका दे दिया है;

जबकि सभी पक्षों के साथ हमारे पुराने दोस्ताना रिश्तों की वजह से इस भूमिका पर हमारा स्वाभाविक हक बनता था. सोनिया गांधी ने कहा कि अपने रणनीतिक हितों और नैतिकता की बलि देकर हमें प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की दोस्ती के अलावा कुछ नहीं मिला, जबकि नेतन्याहू की अब अमेरिका समेत पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है.

गाजा पर भारत की चुप्पी पर सवाल
सोनिया गांधी ने गाजा में मानवीय संकट पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की. उन्होंनेने कहा कि गाजा पर भारत का मौन उसकी नैतिक और कूटनीतिक विरासत के विपरीत है. लेख में भारत से अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की गई. सोनिया गांधी ने कहा कि भारत अपनी ऐतिहासिक विदेश नीति से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है.

लेख में फिलिस्तीन के प्रति भारत के पारंपरिक समर्थन को बनाए रखने की वकालत की गई है. सोनिया गांधी ने गाजा में तत्काल युद्धविराम और मानवीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया. लेख में कहा गया कि गाजा पर भारत की चुप्पी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके नेतृत्व की छवि को प्रभावित कर सकती है. सोनिया गांधी ने लिखा कि भारत को न्याय, शांति और मानवता के पक्ष में खुलकर आवाज उठानी चाहिए.

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