सांसदों की बगावत पर आगबबूला उद्धव गुट, बागियों के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को 51 हजार का इनाम!

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक घमासान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई से नागपुर जाने वाली एक ही फ्लाइट में साथ-साथ सफर करते नजर आए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 6 सांसदों के बगावत करने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

इसमें उन्होंने कहा, “मुझे अब शर्म आ रही है कि वे सब हमारे साथ कैसे रहे।” यह बयान बहुत भावुक और गुस्से भरा था। उद्धव ने कहा कि शिव सैनिक उनके साथ हैं और बागी सांसदों का व्यवहार देखकर उन्हें शर्मिंदगी हो रही है।

ये 6 सांसद उद्धव गुट से अलग होकर एकनाथ शिंदे के गुट में चले गए। उन्होंने आगे कहा, “यह सांसद मेरी बात पर चुने गए थे. अब वे कह रहे हैं कि आने से कोई फायदा नहीं है, लेकिन वे मेरे आने की वजह से चुने गए थे.” सांसदों पर आगे निशाना साधते हुए कहा, “किसान के लिए कोई गारंटी नहीं है लेकिन इन सांसदों के पास झूठ लिए गारंटी है. CM फडणवीस से मुलाकात पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “हमारी एक हाई-लेवल मीटिंग हुई थी. कल की मीटिंग की रिपोर्ट आने वाले दिनों में पता चलेगी.”

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक घमासान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई से नागपुर जाने वाली एक ही फ्लाइट में साथ-साथ सफर करते नजर आए. यह अचानक मुलाकात राज्य में चल रहे गंभीर राजनीतिक तनाव के समय हुई है. फ्लाइट में मौजूद लोगों ने बताया कि गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद दोनों नेताओं ने कड़वाहट को दरकिनार रखते हुए सौहार्दपूर्ण अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की.

यह घटना महाराष्ट्र की सियासत को समझने के लिए बहुत जरूरी है। 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की सरकार गिराई थी, तब भी यही खेल चला था। अब लोकसभा में उद्धव गुट के 9 सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी। इनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। बचे हुए सिर्फ 3 सांसद उद्धव के साथ हैं। यह BJP और शिंदे गुट की मिलीभगत का नतीजा माना जा रहा है।

उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि ये सांसद उनकी वजह से चुने गए थे। लोग उद्धव ठाकरे के नाम पर वोट देते हैं, शिवसेना के असली प्रतीक और बाल ठाकरे की विचारधारा के लिए वोट देते हैं। लेकिन अब ये सांसद कह रहे हैं कि फायदा नहीं हुआ। उद्धव जी ने पूछा – क्या किसानों के लिए कोई गारंटी है? नहीं। लेकिन इन बागियों के पास झूठी गारंटियां जरूर हैं। BJP और शिंदे इनको पैसे, पद और धमकियों से तोड़ रहे हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।

हालांकि सांसदों के दल बदलने को लेकर नेताओं की भी लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी बीच शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे की ओर से पार्टी के बागी सांसदों को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है. UBT के बागी सांसदों के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को 51 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. उद्धव ठाकरे के विदर्भ और मराठवाड़ा दौरे से पहले हिंगोली में शिवसेना (UBT) के जिला प्रमुख संदेश देशमुख ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि पार्टी से बगावत करने वाले छह सांसदों में से किसी एक के चेहरे पर कालिख पोतने वाले व्यक्ति को 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा.

संदेश देशमुख ने कहा, “इन सांसदों ने लगातार पार्टी के साथ बगावत की है और उन्हें सबक सिखाने के लिए यह घोषणा की गई है. शिवसेना जिला प्रमुख संदेश देशमुख ने बताया कि छह बागी सांसदों में से किसी भी एक सांसद के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को हिंगोली जिला शिवसेना (UBT) की ओर से 51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. उनके इस ऐलान के बाद सियासी गलियारों में हलचल पैदा हो गई है.

BJP महाराष्ट्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए शिवसेना को तोड़ने का खेल लगातार खेल रही है। 2022 में शिंदे को CM बनाने के लिए उन्होंने 40 से ज्यादा विधायकों को तोड़ा। अब लोकसभा चुनाव के बाद फिर वही रणनीति अपनाई गई। ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम देकर उद्धव गुट को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। शिंदे कह रहे हैं कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ। मतलब और भी तोड़-फोड़ जारी रहेगी।यह खेल नैतिकता के खिलाफ है। शिवसेना बाल ठाकरे की बनाई पार्टी है।

उन्होंने मराठी मानूस और हिंदुत्व की आवाज उठाई। उद्धव ठाकरे ने उसी विचारधारा को आगे बढ़ाया। लेकिन शिंदे और BJP ने पार्टी को अपना फायदा देखकर तोड़ दिया। शिंदे पहले उद्धव के साथ थे, सरकार चला रहे थे। जब BJP ने लालच दिया तो वे चले गए। अब वही शिंदे उद्धव पर आरोप लगा रहे हैं। यह साफ विश्वासघात है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिव सैनिक अभी भी उनके साथ हैं। सड़क पर, मीटिंग में कार्यकर्ता उनका साथ दे रहे हैं। बागी सांसदों के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को 51 हजार इनाम देने का ऐलान भी हुआ। यह गुस्से का प्रतीक है। लोग बागियों को गद्दार मान रहे हैं।

संजय राउत जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि हर बागी सांसद को करोड़ों रुपये दिए गए। पब्लिक मनी यानी जनता का पैसा राजनीतिक सौदेबाजी में इस्तेमाल हो रहा है। BJP की सरकार में मंत्रियों और अधिकारियों का इस्तेमाल करके विपक्ष को तोड़ा जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

महाराष्ट्र में आम आदमी, किसान, युवा और महिलाएं महंगाई, बेरोजगारी और अन्य समस्याओं से परेशान हैं। लेकिन BJP और शिंदे गुट सिर्फ सत्ता और कुर्सी बचाने में लगे हैं। उद्धव ठाकरे ने हमेशा विकास, मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की बात की। लेकिन BJP ने शिवसेना को कमजोर करके अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश की।

इस बगावत के बावजूद उद्धव ठाकरे हारे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे निराश नहीं हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, मीटिंग की और आगे की रणनीति बनाई। उन्होंने इस्तीफे की पेशकश भी की लेकिन साफ कहा कि पार्टी चोरों के हाथ नहीं जाएगी। यह दिखाता है कि वे सिद्धांतों के लिए लड़ रहे हैं, न कि सिर्फ पद के लिए।आदित्य ठाकरे ने भी बागियों पर तीखा हमला बोला। उन्हें लालची और बिकाऊ बताया।

जनता ने वोट उद्धव गुट को दिया था, लेकिन ये सांसद वोटरों के साथ धोखा कर रहे हैं। BJP और शिंदे का गठबंधन दिखने में मजबूत लगता है लेकिन अंदर से खोखला है। शिंदे गुट में भी असंतोष है। वे सिर्फ BJP के सहारे टिके हैं। असली शिवसेना उद्धव ठाकरे के पास है क्योंकि कार्यकर्ता, भावना और इतिहास उनके साथ है।

BJP ने दूसरे दलों को तोड़कर सरकारें बनाई हैं – जैसे मध्य प्रदेश, कर्नाटक आदि में। महाराष्ट्र भी उसी का हिस्सा है।मराठी मानूस अब समझ रहा है कि BJP शिवसेना को सिर्फ इस्तेमाल कर रही है। बाल ठाकरे की विचारधारा को BJP ने अपना लिया लेकिन असली वारिस उद्धव हैं। शिंदे गुट सिर्फ नाम का शिवसेना है, असली ताकत उद्धव गुट में है।

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