राम मंदिर दान चोरी प्रकरण को मुद्दा बनाएगी कांग्रेस

- दिग्विजय सिंह करेंगे पदयात्रा
- दिग्विजय सिंह की राम रणनीति कांग्रेस-बीजेपी किसको होगा फायदा?
- 2 अक्टूबर से महाकाल-अयोध्या पदयात्रा पर निकलेंगे दिग्विजय सिंह राम मंदिर के लिए दिए दान का मागेंगे हिसाब
- नेपथ्य से मंच तक राम पथ से वापसी की राह तलाश रहे हैं दिग्विजय
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि वह राम मंदिर निर्माण चंदा घोटाला मामले में पदयात्रा करेंगे। उनकी पदयात्रा की शुरूआत 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से होगी और अयोध्या में खत्म होगी। उनका दावा है कि यह एक गैरराजनीतिक पदयात्रा होगी। उन्होंने यह भी कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अपने दान का हिसाब मांगने के लिए वह अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। उनका कहना है कि यह राजनीति नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने यह घोषणा ऐसे वक्त में कि है जब कांग्रेस मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर उज्जैन में सरकारी जमीन आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगा रही है। वंही इस मुद्दे पर कांग्रेस की राज्य इकाईयों से भी भाजपा को घेरने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। राजस्थान में अशोक गहलोत पहले ही इसकी जांच की मांग कर चुके हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष तो अयोध्या का दौरा भी कर चुके है जिसके तहत उन्हें हाउस अरेस्ट भी होना पड़ा।
भक्तों को धन का उपयोग कैसे किया गया जानने का अधिकार
भोपाल में मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित सद्बुद्धि यज्ञ और सामूहिक उपवास कार्यक्रम में बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ राम मंदिर के लिए दान दिया था और उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग कैसे किया गया? उन्होंने कहा कि लोगों ने भगवान राम के नाम पर पूरी श्रद्धा के साथ दान दिया। यदि उस धन का दुरुपयोग हुआ है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि धार्मिक दान से जुड़े संस्थानों को श्रद्धालुओं के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह अपने घर के बाहर एक और पट्टिका लगाएंगे जिस पर लिखा होगा दान चोरों का मेरे घर में प्रवेश वर्जित है।
पदयात्रा और कानूनी लड़ाई दोनों लड़ेंगे दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह अयोध्या में अदालत में एक मामला भी दायर करेंगे और यह जानकारी मांगेंगे कि राम मंदिर के लिए मिले दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। उनकी यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर में दान और कीमती सामान की चोरी के आरोपों की जांच एसआईटी कर रहा है। भोपाल स्थित अपने आवास के बाहर भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे और दान की चोरी करने वालों का प्रवेश वर्जित है लिखा बैनर लगाने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोई भी उनकी धार्मिक आस्था पर सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने कहा कि मैं सनातन धर्म का सच्चा अनुयायी हूं। मेरा पैतृक स्थान राघौगढ़ है जहां भगवान राघव, हनुमान जी, माता और जगदीश स्वामी के प्राचीन मंदिर पीढिय़ों से मौजूद हैं। वहां चौबीसों घंटे दीपक जलते हैं। मेरी आस्था पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपए का दान दिया था और आज भी उनके पास उसकी रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है।
कांग्रेस के भीतर मतभेद
उनकी यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उज्जैन में एक ट्रस्ट को बेहद कम कीमत पर सरकारी जमीन देने का आरोप लगा रहे हैं। भाजपा इन आरोपों से इनकार कर चुकी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार संबंधित ट्रस्ट कोई निजी संस्था नहीं बल्कि सरकारी इकाई है। ऐसे माहौल में महाकाल से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने और राम मंदिर के दान को लेकर कानूनी कार्रवाई करने का दिग्विजय सिंह का फैसला मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
जुलाई से कानूनी लड़ाई, अक्टूबर में होगी पदयात्रा
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मुताबिक वह 5 या 6 जुलाई को अपने वरिष्ठ वकील से सलाह लेने के बाद अयोध्या पहुंचेगे और वहां की अदालत में वाद दायर करेंगें। उन्होंने कहा कि यदि अदालत को दान के उपयोग में वित्तीय गड़बड़ी मिलती है तो वह अपना दान वापस मांगेंगे और उसे किसी अन्य मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था या शंकराचार्य से जुड़े किसी ट्रस्ट को दान कर देंगे।




