ममता को बड़ा झटका, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पदों से दिया इस्तीफा!
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है... चंद्रिमा भट्टाचार्य के सभी पदों से इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किल वक्त और भी कठिन हो गया है.. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी पहले से संकट में थी.. अब उस पर एक और बड़ा झटका लगा है. ममता बनर्जी की बेहद करीबी और पार्टी की राइट हैंड मानी जाने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है.. यह खबर पूरे बंगाल में सियासी हलचल मचा रही है..
चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से टीएमसी की मजबूत स्तंभ रही हैं.. वे ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानी जाती थीं.. पार्टी संगठन से लेकर सरकार के महत्वपूर्ण कामों तक में उनकी भूमिका अहम रही है.. लेकिन अब उन्होंने अचानक सभी पद छोड़ने का फैसला कर लिया है.. वहीं यह फैसला टीएमसी के लिए बहुत बड़ा सियासी झटका है.. पार्टी में पहले से उठापटक चल रही थी.. इस इस्तीफे से संकट और गहरा गया है..
जानकारी के अनुसार चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया है.. उन्होंने ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपना फैसला बताया.. इस पत्र में उन्होंने साफ कहा कि वे न सिर्फ संगठनात्मक पदों से अलग हो रही हैं.. बल्कि पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी साइनिंग अथॉरिटी के पद से भी तुरंत कदम पीछे खींच रही हैं.. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है..
जानकारी के मुताबिक चंद्रिमा भट्टाचार्य बंगाल की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं.. वे ममता बनर्जी की लंबे समय से करीबी रही हैं.. पार्टी में उन्हें राइट हैंड कहा जाता था.. ममता दीदी के भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी में उनका नाम शामिल था.. वे संगठन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती थीं.. सरकार में भी उनकी पकड़ अच्छी थी.. पार्टी के वित्तीय मामलों और प्रशासनिक फैसलों में उनकी साइनिंग अथॉरिटी बहुत महत्वपूर्ण थी..
चंद्रिमा ने टीएमसी की स्थापना के बाद से ही पार्टी के साथ काम किया.. वे कई बार चुनाव लड़ चुकी हैं.. और पार्टी की रणनीति बनाने में शामिल रहीं.. उनके इस्तीफे की खबर आते ही टीएमसी कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया.. कई कार्यकर्ता हैरान हैं कि इतनी करीबी नेता अचानक क्यों अलग हो गईं.. पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी को करारी हार मिली.. यह हार पार्टी के लिए बड़ा झटका थी.. हार के बाद पार्टी में आंतरिक कलह शुरू हो गई.. कई नेता असंतोष जता रहे थे.. संगठन कमजोर पड़ता नजर आ रहा था.. ऐसे में चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा पार्टी के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है..
वहीं चुनाव हार के बाद ममता बनर्जी और उनकी टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.. विपक्षी पार्टियां हमला बोल रही हैं.. पार्टी के अंदर भी असहमति बढ़ रही है.. चंद्रिमा का जाना इन समस्याओं को और बढ़ा सकता है.. पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह इस्तीफा सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं.. बल्कि बड़े असंतोष का संकेत हो सकता है.. ममता बनर्जी टीएमसी की सर्वेसर्वा हैं.. वे पार्टी की पहचान हैं.. चंद्रिमा उनकी सबसे भरोसेमंद सहयोगी थीं.. दोनों के बीच लंबे समय का रिश्ता रहा.. चंद्रिमा के इस्तीफे से ममता दीदी को व्यक्तिगत.. और राजनीतिक दोनों स्तर पर झटका लगा है..
आपको बता दें कि अभी तक ममता बनर्जी या टीएमसी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.. लेकिन पार्टी के अंदर चर्चाएं तेज हो गई हैं.. कुछ नेता मानते हैं कि ममता दीदी चंद्रिमा को मनाने की कोशिश करेंगी.. कुछ का कहना है कि यह इस्तीफा पार्टी में बदलाव का संकेत है.. जानकारी के अनुसार टीएमसी में लंबे समय से कुछ असंतोष चला आ रहा था.. चुनाव हार ने इसे बढ़ा दिया.. कई पुराने नेता महसूस करते थे कि उनकी उपेक्षा हो रही है..
वहीं युवा नेताओं को ज्यादा महत्व मिल रहा था.. संगठन में पारदर्शिता की कमी थी.. वित्तीय मामलों में भी कुछ सवाल उठ रहे थे.. चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे नेता.. जो पार्टी की मजबूत नींव थे.. उनका जाना इन समस्याओं को उजागर करता है.. वे लंबे समय से पार्टी के संगठन को संभाल रही थीं.. उनका इस्तीफा दिखाता है कि पार्टी के अंदर गहरी नाराजगी है.. वहीं इस घटना ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है.. विपक्षी पार्टियां, जैसे भाजपा और कांग्रेस, इसे टीएमसी की कमजोरी बता रही हैं.. वे कह रही हैं कि ममता बनर्जी की पार्टी अब टूटने लगी है..



