चैतर वसावा केस में बड़ा खुलासा, सरकारी वकील के बयान से हड़कंप, CM-गृहमंत्री पर उठे सवाल
चैतर वसावा केस में अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में आम आदमी पार्टी के MLA चैतर वसावा पर लगाए गए झूठे मामले की सच्चाई अब सबके सामने आ रही है.. AAP के वरिष्ठ नेता और MLA गोपाल इटालिया ने इस पूरे प्रकरण को खुलकर लोगों के सामने रखा.. और उन्होंने कहा कि चैतर वसावा पर जो केस दर्ज किया गया है.. वह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है.. चैतर वसावा आदिवासी समाज के हक के लिए लड़ रहे हैं.. इसलिए उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है.. गोपाल इटालिया के खुलासे के बाद आदिवासी समुदाय में भारी गुस्सा है.. और लोग एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं..
आपको बता दें कि डेडियापाड़ा में हाल ही में हुई एक बड़ी जनसभा में हजारों आदिवासी भाई-बहन खुद-ब-खुद इकट्ठा हुए.. कोई बड़े आयोजन की जरूरत नहीं पड़ी.. लोग अपने आप पहुंच गए.. उन्होंने चैतर वसावा के समर्थन में नारे लगाए और अन्याय के खिलाफ हुंकार भरी.. यह जनसैलाब दिखाता है कि आदिवासी समुदाय अब जागरूक हो चुका है.. वे सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं कि चैतर वसावा पर लगे झूठे केस को वापस लिया जाए..
गोपाल इटालिया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि चैतर वसावा ने आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जमीन और जंगल अधिकारों की लड़ाई लड़ी.. वे गरीब आदिवासियों की आवाज बने.. लेकिन भाजपा सरकार को यह पसंद नहीं आया.. इसलिए उन्हें फंसाने के लिए झूठा मामला दर्ज कर दिया गया..
इटालिया ने दस्तावेज और सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि.. यह केस कमजोर है और सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से किया गया है.. डेडियापाड़ा का मैदान उस दिन लोगों से भरा पड़ा था.. दूर-दूर के गांवों से आदिवासी परिवार पहुंचे.. महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल थे.. पारंपरिक वेशभूषा में लोग नजर आए.. हाथों में बैनर और पोस्टर थे जिन पर चैतर वसावा हमारे नेता.. आदिवासी एकता जिंदाबाद और झूठे केस वापस लो लिखा था..
सभा में गोपाल इटालिया और अन्य AAP नेताओं ने भाषण दिए.. उन्होंने बताया कि चैतर वसावा पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद हैं.. असल में चैतर वसावा भाजपा की गलत नीतियों का विरोध करते रहे.. वे आदिवासी जमीन बचाने, जंगल अधिकार दिलाने और विकास के नाम पर हो रही लूट के खिलाफ खड़े हुए.. युवाओं ने कहा कि 2027 के चुनाव में इस अन्याय का जवाब दिया जाएगा..
वहीं यह जनसभा दिखाती है कि आदिवासी समुदाय पहले से ज्यादा जागरूक हो गया है.. वे अब अपनी समस्याओं को समझ रहे हैं.. और एकजुट होकर लड़ रहे हैं.. पहले लोग डरते थे, लेकिन अब वे कोर्ट, सड़क और चुनाव के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.. सभा के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ.. सरकारी वकील ने कोर्ट में बताया कि मुख्यमंत्री.. और गृह मंत्री के निर्देशों के बाद सुखवंती बेन की जमीन से जुड़ी अर्जी का कोई विरोध नहीं किया गया.. यह बात भाजपा के दावों को झुठलाती है..
लोगों ने इसे भाजपा की पोल खुलने के रूप में देखा.. गोपाल इटालिया ने कहा कि एक तरफ चैतर वसावा जैसे आदिवासी नेता को झूठे केस में फंसाया जा रहा है.. वहीं दूसरी तरफ सत्ता के लोगों की जमीन के मामलों में आसानी से काम हो जाता है.. यह दोहरा मापदंड साफ दिखाता है.. आदिवासी समाज पूछ रहा है कि अगर सुखवंती बेन की अर्जी पर मुख्यमंत्री.. और गृह मंत्री के निर्देश पर कोई विरोध नहीं हुआ.. तो चैतर वसावा पर इतनी सख्ती क्यों.. यह सवाल पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बन गया है..



