चढ़ावा चोरी पर गरमाई सियासत, विपक्ष के सवालों को मिला समर्थन? भागवत के बयान पर चर्चा तेज
होसबाले ने रामलला के दरबार में हुई इस हेराफेरी को अत्यंत निंदनीय बताया है। होसबाले ने कहा कि पीढ़ियों के खून-पसीने, संघर्ष और बलिदान से यह भव्य मंदिर बना है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जो हो जाए वही कम है, जिस राम मंदिर को लेकर चुनावी मुद्दा बनाया उसी पर जीत का दावा किया। आज उसी मंदिर से चढ़ावा चोरी हो रहा है। लेकिन भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। वहीं विपक्ष और जनता इस मुद्दे को जमकर उठा रही है।
खैर BJP-RSS पर उठते सवालों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सीधी हुंकार भरी है। उन्होंने साफ कह दिया है कि इस महापाप के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने नागपुर में मीडिया के सामने आते ही भागवत ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अलग से कोई घुमावदार बात नहीं की। भागवत ने सीधे तौर पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बड़े बयान को आगे कर दिया। भागवत ने दो टूक कहा, ‘कल ही दत्तात्रेय होसबाले जी ने इस पर पूरा बयान जारी किया है, आप सब उसे ही देखें।’
होसबाले ने रामलला के दरबार में हुई इस हेराफेरी को अत्यंत निंदनीय बताया है। होसबाले ने कहा कि पीढ़ियों के खून-पसीने, संघर्ष और बलिदान से यह भव्य मंदिर बना है। यह पूरे हिंदू समाज की अटूट आस्था का केंद्र है। रामलला की दान पेटी पर हाथ साफ करने वालों ने सिर्फ पैसा नहीं चुराया, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के भरोसे का कत्ल किया है।
इस नीच हरकत से पूरा समाज गहरे सदमे और गुस्से में है। दरअसल होसबाले ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा था कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना ने राम भक्तों और पूरे समाज की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है. उन्होंने कहा था कि जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और उसकी संस्तुतियों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.
इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए ट्रस्ट से मंदिर के प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा जताई. सरकार्यवाह होसबाले ने दावा किया था, ‘हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं.’ उन्होंने पूरे हिंदू समाज से अपील की कि वह इस कठिन समय में धैर्य और संयम बनाए रखें ताकि इस तरह की सभी साजिशों को विफल किया जा सके.
हालांकि इस बीच कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी राजनीतिक यात्रा राम मंदिर आंदोलन के आसपास खड़ी रही है. उनका कहना है कि 1990 के दशक से RSS का सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर रहा है.
कर्नाटक सरकार में मंत्री का यह भी आरोप है कि चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में सच्चाई सामने आने से रोकने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि इस मामले पर लोगों के सवालों को सीमित करने या नियंत्रित करने की मांग यह दिखाती है कि इस पूरे मामले में खुलकर जवाब देने से बचने की कोशिश हो रही है.
खरगे का दावा है कि BJP और RSS ने पहले ही इतनी मजबूत राजनीतिक ताकत हासिल कर ली है कि अब वे नहीं चाहते कि लोग इस तरह के मामलों में सवाल पूछें. उनका कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में जनता को सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है.
यह आरोप भी है कि BJP और RSS ने राम के नाम पर राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरह से लाभ उठाया है. उनके अनुसार, अगर चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश की जाती है, तो इससे यह संदेश जाता है कि सत्ता और राजनीतिक फायदे को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.
विपक्ष का कहना है कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जानी चाहिए. उनका आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या राम मंदिर आंदोलन का मकसद केवल आस्था था या इसके पीछे राजनीतिक और आर्थिक फायदे भी जुड़े थे.
हालांकि, BJP, RSS और विश्व हिंदू परिषद इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं. उनका कहना है कि चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही उनका कहना है कि इस घटना के आधार पर पूरे राम मंदिर आंदोलन या इन संगठनों की नीयत पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी विवाद के बीच 6 जुलाई को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक होने जा रही है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े पर विचार होगा. राम मंदिर के चढ़ावे से चोरी की ख़बरों के बाद ट्रस्ट पर लगाकर भरोसे की कमी बढ़ती जा रही है. अब सवाल यह है कि आखिरकार इस बैठक में क्या होगा?
अयोध्या में होने वाली ट्रस्ट की इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्र के भविष्य पर फैसला होना है. इसके साथ ही यह भी मंथन होगा कि राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था के लिए क्या किसी प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए या नहीं? यह एक बड़ा फैसला होगा, अगर राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति होती है तो राम मंदिर से जुड़े सभी प्रशासनिक अधिकार CEO के पास चले जाएंगे.
इसके अलावा अगर चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफ़ा स्वीकार किया जाता है, तो इनका विकल्प कौन होगा? चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के बड़े नेता हैं और अनिल मिश्रा लंबे समय से संघ से जुड़े रहे हैं. अनिल मिश्रा अयोध्या-अंबेडकरनगर के स्थानीय नागरिक होने के नेता ट्रस्ट में नंबर 2 की पोजीशन पर माने जाते रहे हैं.
हालाँकि आधिकारिक तौर पर अनिल मिश्रा सिर्फ सदस्य ही हैं. लेकिन अनिल मिश्रा के पास असीमित शक्तियां हैं. ऐसे में संघ और विहिप दोनों ही इनके विकल्प पर विचार विमर्श जरूर कर चुके होंगे. अगर दोनों की छुट्टी होती है तो इनके सापेक्ष विहिप और संघ जरूर अपने दूसरे व्यक्तियों को ट्रस्ट में शामिल करेंगे. क्योंकि विहिप और संघ दोनों ही किसी भी कीमत पर राम मंदिर ट्रस्ट से अपना कंट्रोल नहीं छोड़ना चाहेंगे.
अगर चंपत राय का इस्तीफ़ा होता है तो विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद की रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. वहीं संघ की तरफ से एक प्रचारक का नाम भी सामने आ रहा है, जो कि पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट हैं. हालाँकि दोनों ही नामों पर अंतिम फैसला राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ही लिया जाएगा. एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या चंपत राय की ट्रस्ट से परमानेंट छुट्टी कर दी जाएगी या सिर्फ महासचिव पद से हटाया जाएगा?
इस सवाल का जवाब अभी तक किसी को भी नहीं मिल पा रहा है. राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. इस रिपोर्ट पर ट्रस्ट के सदस्य चर्चा करेंगे और राम मंदिर के प्रशासनिक कामकाज में सुधारों का फाइनल रूप भी दिया जा सकता है. राम मंदिर से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर न्यास के सदस्य बातचीत करेंगे. अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक ज़रूर होगी लेकिन निगाहें संघ और विहिप पर टिकी होंगी.



