हनुमान वेशधारी का वीडियो वायरल, धर्म और राजनीति पर नई बहस

आलोचकों का कहना है कि भगवान हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और किसी राजनीतिक रैली में उनके स्वरूप का उपयोग करने से धार्मिक भावनाओं का राजनीतिकरण होने का आरोप लग सकता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय जनता पार्टी अब शायद भगवान से भी बड़ी हो चुकी है। तभी तो कभी पीएम मोदी को कुछ लोग अवतार बताते हैं तो कभी भाजपाई भगवान के नाम पर वोट ले जाते हैं।

लेकिन अब तो हद्द ही पार हो चुकी है तभी तो ये भाजपाई बजरंगबली को भी अपना प्रचारक बना रहे हैं। दरअसल हाल ही में भाजपा नेता Nitin Nabin की एक रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति भगवान हनुमान के वेश में मंच और रैली के माहौल के बीच नृत्य करता दिखाई दे रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई। लोगों ने इसे धार्मिक आस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के मिश्रण का उदाहरण बताया। वायरल वीडियो में हनुमान वेशधारी व्यक्ति भाजपा के झंडों और समर्थकों के बीच नाचता दिखाई देता है, जिसके कारण विपक्षी दलों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

इस विवाद का मुख्य कारण यह है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में धर्म और राजनीति का संबंध हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। आलोचकों का कहना है कि भगवान हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और किसी राजनीतिक रैली में उनके स्वरूप का उपयोग करने से धार्मिक भावनाओं का राजनीतिकरण होने का आरोप लग सकता है।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि किसी अन्य दल की रैली में इसी तरह किसी धार्मिक प्रतीक का उपयोग किया जाता, तो संभव है कि उस पर अधिक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती। इसी वजह से भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने के आरोप भी लगाए गए।

लेकिन इस मामले को लेकर विपक्ष आग बबूला नजर आ रहा है। वायरल वीडियो को शेयर करते हुए विपक्ष लगातार भाजपा से सवाल दाग रहा है। लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाली भाजपा अब इस नए विवाद में घिरती हुई नजर आ रही है। इसी बीच इस मामले को लेकर आप मुखिया केजरीवाल ने भी भाजपा को निशाने पर लिया।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, ”जितना नुकसान और अपमान आप लोगों ने हिंदू धर्म का किया है, शायद भारत के 5000 वर्ष के इतिहास में बाहर से आने वाले आतताइयों ने भी नहीं किया। जितना आप लोगों ने हिंदुओं को लूटा है, आज तक किसी ने नहीं लूटा। हिंदू धर्म पर आप लोग कलंक हैं।” केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए यह भी लिखा, ”ये वीडियो देखिए। ये क्या कर रहे हैं आप। शर्म आती है आपको? पूरे हिंदू समाज से माफी मांगिए।”

पूरे विवाद की शुरुआत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के एक पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं पर हिंदू धर्म और सनातन के अपमान को लेकर निशाना साधा। इसके जवाब में अरविंद केजरीवाल ने एक लाइन में प्रतिक्रिया दी। इसके बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पलटवार किया, जबकि नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने लखनऊ में नितिन नवीन की रैली का वीडियो साझा कर भाजपा पर ही भगवान हनुमान के सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

इसके बाद यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन गया। दरअसल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने X पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए कहा कि हिंदू धर्म और सनातन को कमजोर नहीं समझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता हिंदू देवी-देवताओं और सनातन के कथित अपमान पर चुप्पी साध लेते हैं।

नितिन नवीन के पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए अरविंद केजरीवाल ने केवल एक सवाल लिखा- “आप कौन हैं?” उनका यह संक्षिप्त जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया। केजरीवाल के पोस्ट पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जवाब देते हुए लिखा कि नितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और कम उम्र में इस पद तक पहुंचने वाले नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने केजरीवाल पर तंज कसते हुए लिखा, “अहंकार तो रावण का भी नहीं टिका… आप कौन?”

रेखा गुप्ता की टिप्पणी के बाद दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने X पर लखनऊ में आयोजित नितिन नवीन की एक रैली का वीडियो साझा किया। वीडियो में हनुमान के वेश में एक कलाकार रथ के आगे नृत्य करता दिखाई दे रहा है। आतिशी ने रेखा गुप्ता से सवाल किया कि जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने भगवान हनुमान के स्वरूप में कलाकार नृत्य कर रहा है, तब क्या भाजपा इसे भगवान का सम्मान मानती है। उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर भी अपनी राय रखेंगी या उन्हें इस पर बोलने से रोका गया है।

वहीं इसी विवादित वीडियो को पोस्ट करते हुए आप नेता संजय सिंह ने लिखा कि- ये क्या मज़ाक बना रखा है। BJP के नेता अपने जुलूस में भगवान बजरंग बली को हाथ में BJP का झंडा देकर नचवा रहे हैं। यही हाल रहा तो BJP, “हिंदू धर्म” खत्म करके “BJP धर्म” लागू कर देगी। अपने नेताओं को भगवान घोषित कर उनका मंदिर बनवाएगी और देश वासियों से उनकी पूजा करवाएगी।

वहीं इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके दौरे पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार लखनऊ आए हैं, तो क्या वह “दर्शन” करने नहीं जाएंगे? सपा अध्यक्ष की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

माना जा रहा है कि उनका इशारा इसी विवाद की ओर था। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नितिन नवीन का लखनऊ दौरा पूरी तरह संगठनात्मक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। इस दौरान वह प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें करेंगे तथा आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा की।

कुल मिलाकर इस घटना के बाद आलोचकों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अक्सर धार्मिक भावनाओं और प्रतीकों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग करते हैं। उनका कहना है कि जब किसी राजनीतिक मंच पर भगवानों के स्वरूप या धार्मिक प्रतीकों को प्रमुखता दी जाती है, तो राजनीति और धर्म के बीच की दूरी कम होती दिखाई देती है।

आलोचकों के अनुसार लोकतंत्र में राजनीतिक बहस का केंद्र विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनता से जुड़े मुद्दे होने चाहिए, न कि धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से भीड़ जुटाने की कोशिश। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर यह भी लिखा कि यदि किसी धार्मिक स्वरूप को मनोरंजन या प्रचार के साधन के रूप में पेश किया जाता है तो इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

दूसरी तरफ भाजपा समर्थकों का तर्क है कि भारत में धार्मिक झांकियां, रामलीला, हनुमान जयंती और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में लोग वर्षों से देवी-देवताओं का रूप धारण करते रहे हैं। उनके अनुसार किसी व्यक्ति का हनुमान जी का वेश पहनना अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता। वहीं इसे लेकर सियासी पंडितों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं भारत की राजनीति में धर्म की भूमिका पर चल रही पुरानी बहस को फिर से सामने ले आती हैं।

एक वर्ग मानता है कि धर्म और संस्कृति भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए राजनीतिक कार्यक्रमों में उनका दिखना स्वाभाविक है। वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि चुनावी राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का उपयोग सीमित होना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक विमर्श मुद्दा-आधारित बना रहे। इस कारण वीडियो वायरल होने के बाद केवल नृत्य की चर्चा नहीं हुई, बल्कि राजनीति और धर्म के संबंधों पर भी बहस छिड़ गई।

कुल मिलाकर, नितिन नवीन की रैली में हनुमान वेशधारी व्यक्ति के नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। इस पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। और भाजपा सरकार पूरी तरह से घिरती हुए नजर आ रही है। नितिन नवीन का ये यूपी दौरा उन्हें और उनकी पार्टी को भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है।

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