लद्दाख की बर्फ हो या राजस्थान का रेगिस्तान, हर मोर्चे पर दुश्मन होगा ढेर
भारतीय सेना देश के अलग-अलग इलाकों में तैनात रहती है. इसलिए, यह जरूरी है कि हथियार हर तरह के मौसम में ठीक से काम करे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय सेना देश के अलग-अलग इलाकों में तैनात रहती है. इसलिए, यह जरूरी है कि हथियार हर तरह के मौसम में ठीक से काम करे. इसी वजह से सेना ने 450 Carl Gustaf Mark-IV (84mm) हल्के रॉकेट लॉन्चर खरीदने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया है.
भारतीय सेना अपनी पैदल सेना (Infantry) को और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. सेना ने 450 Carl Gustaf Mark-IV (84mm) हल्के रॉकेट लॉन्चर खरीदने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया है. बताया जा रहा है कि ये नए लॉन्चर पुराने Mark-III सिस्टम की जगह लेंगे.
ये नए Mark-IV लॉन्चर ज्यादा हल्के, अधिक सटीक और भरोसेमंद होंगे. इनका वजन 7 किलोग्राम से कम होगा, जिससे सैनिक इन्हें आसानी से लेकर चल सकेंगे. इन लॉन्चरों की प्रभावी मारक क्षमता 350 से 800 मीटर तक होगी. साथ ही ये -20 डिग्री से +50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने में सक्षम होंगे. यानी ये LAC पर लद्दाख की ऊंची बर्फीली चोटियों से लेकर LoC में राजस्थान के रेगिस्तान तक हर तरह के मोर्चे में इस्तेमाल किए जा सकेंगे.
एक साल में सेना को सौंपने होंगे लॉन्चर
RFP के अनुसार, चुनी गई कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिलने के 12 महीने यानी एक साल के भीतर सभी लॉन्चर सेना को सौंपने होंगे. इसके अलावा कंपनी को 15 साल तक तकनीकी सहायता (Product Support) और 24 महीने की वारंटी भी देनी होगी. सरकार ने इस टेंडर में यह भी साफ किया है कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियां इसमें हिस्सा नहीं ले सकेंगी.
हर मौसम में करेगा काम
भारतीय सेना देश के अलग-अलग इलाकों में तैनात रहती है. इसलिए, यह जरूरी है कि हथियार हर तरह के मौसम में ठीक से काम करे. इसी वजह से, RFP में यह शर्त रखी गई है कि लॉन्चर -20 डिग्री से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में बिना किसी रुकावट के काम करने में सक्षम हो. इसका मतलब है कि इसे हिमालय के बर्फीले इलाकों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक, कहीं भी तैनात किया जा सकता है.
सीमा की सुरक्षा होगी और मजबूत
इस सिस्टम से भारतीय सेना की एंटी-टैंक और बंकर नष्ट करने की क्षमता मजबूत होगी और सीमा पर तैनात पैदल सैनिकों की मारक शक्ति में बड़ा इजाफा होगा. माना जा रहा है कि इससे पैदल सैनिकों को अपने दुश्मनों को ढेर करने में आसानी होगी. साथ ही सीमा की सुरक्षा भी पहले से ज्यादा और मजबूत होगी.



