ग्रामीण के विरोध के बाद जागा प्रशासन, 15 साल पुरानी सड़क के लिए 20 दिन में शुरू होगा काम

15 साल से जर्जर पड़ी सड़क के विरोध में एक ग्रामीण पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पीलीभीत में विकास के दावों के बीच सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के बरहा गांव की बदहाल सड़क शनिवार को चर्चा का विषय बन गई। 15 साल से जर्जर पड़ी सड़क के विरोध में एक ग्रामीण पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गया।

राजकुमार नाम के युवक ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर ये कदम उठाया। सूचना पर एसडीएम, सीओ, सुनगढ़ी पुलिस और तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। करीब 3 घंटे की समझाइश के बाद राजकुमार नीचे उतरा।

ग्रामीणों का कहना है कि बरहा को मुख्य हाईवे से जोड़ने वाली सड़क 15 साल से खराब है। बरसात में ये तालाब बन जाती है। गड्ढों की वजह से स्कूल के बच्चे, मरीज और किसान रोज परेशान होते हैं। करीब 50 परिवार इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

मामला तब और गरमाया जब पता चला कि 8 जून को गन्ना एवं चीनी उद्योग राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने भी चौपाल में अधिकारियों को 20 दिन में सड़क बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन ने अब एक सप्ताह में टेंडर और 20 दिन में निर्माण शुरू कराने का लिखित आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी। ग्रामीणों ने साफ कहा “अब हमें आश्वासन नहीं, काम चाहिए”। अब सबकी नजरें प्रशासन के इस वादे पर टिकी हैं।

एक टूटी सड़क, एक पानी की टंकी और एक ग्रामीण का विरोध। पीलीभीत के बरहा गांव की ये तस्वीर बताती है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत क्या है।

सुनगढ़ी क्षेत्र का बरहा गांव पिछले 15 साल से एक सड़क के लिए तरस रहा है। ये वही सड़क है जो गांव को मुख्य हाईवे से जोड़ती है। बरसात में यहां चलना मुश्किल, बाकी दिन जानलेवा। स्कूल, अस्पताल, मंडी – सब इसी रास्ते से जाते हैं। कई बार शिकायत, कई बार वादे। लेकिन हुआ कुछ नहीं। आखिरकार शनिवार को राजकुमार टंकी पर चढ़ गया। 3 घंटे तक पूरा प्रशासनिक अमला उसे मनाने में लगा रहा।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि 8 जून को खुद राज्यमंत्री ने अधिकारियों को 20 दिन में काम शुरू करने को कहा था। इसके बाद भी फाइल नहीं हिली। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तब जाकर नींद टूटी। अब प्रशासन ने कहा है – 1 हफ्ते में टेंडर, 20 दिन में काम शुरू। लेकिन ग्रामीण अब भरोसा नहीं कर रहे। उनका कहना है “घोषणा नहीं, डामर चाहिए”।

ये सिर्फ बरहा की समस्या नहीं है। ये सवाल है सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता का। जब मंत्री के आदेश नहीं माने जाते, तो आम आदमी कहां जाए? अब देखना ये है कि प्रशासन 20 दिन का वादा निभाता है या ये भी फाइलों में दब जाता है। बरहा की सड़क अब विकास की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
रिपोर्ट – सुनील सक्सेना,बरेली

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