मंजलपुर उपचुनाव में कांग्रेस का बड़ा दांव, भिखाभाई रबारी को टिकट

गुजरात की 145-मंजलपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष भिखाभाई रबारी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारतीय राजनीति में उपचुनाव हमेशा विशेष महत्व रखते हैं.. ये केवल किसी रिक्त विधानसभा या लोकसभा सीट को भरने का माध्यम नहीं होते.. बल्कि राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत.. स्थानीय मुद्दों पर उनकी पकड़.. और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता की भी परीक्षा लेते हैं.. कई बार उपचुनावों के परिणाम भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाले संकेत भी बन जाते हैं.. गुजरात के वडोदरा जिले की 145-मंजलपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबला बन गया है.. जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं..

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता और गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी को उम्मीदवार घोषित किया है.. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई है.. दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने सतीश गोविंदभाई पटेल को मैदान में उतारा है.. निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा.. जबकि मतगणना 3 अगस्त 2026 को की जाएगी..

वहीं यह उपचुनाव इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि मंजलपुर विधानसभा क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता योगेश पटेल का 2 जून 2026 को निधन हो गया.. वे 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे.. योगेश पटेल गुजरात विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायकों में गिने जाते थे.. और उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आठ बार विधानसभा चुनाव जीते.. और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.. उनके निधन से न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि पूरे वडोदरा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई..

मंजलपुर विधानसभा क्षेत्र वडोदरा शहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.. वडोदरा गुजरात का प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है.. इस विधानसभा क्षेत्र में पटेल, रबारी, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा विभिन्न सामाजिक समुदायों के मतदाता बड़ी संख्या में रहते हैं.. यहां उद्योग, व्यापार, शिक्षा और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, रोजगार.. और यातायात जैसी समस्याएं चुनावी चर्चा का केंद्र रहती हैं.. इसलिए इस सीट का राजनीतिक महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है.. बल्कि पूरे वडोदरा जिले की राजनीति पर इसका प्रभाव पड़ता है..

मंजलपुर विधानसभा सीट का गठन वर्ष 2012 में परिसीमन के बाद हुआ था.. इससे पहले योगेश पटेल लगातार रावपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते रहे थे.. परिसीमन के बाद उन्होंने मंजलपुर से चुनाव लड़ना शुरू किया.. और यहां भी लगातार जीत दर्ज की.. इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है.. योगेश पटेल की लोकप्रियता, संगठन पर मजबूत पकड़.. और जनता के बीच उनकी सक्रियता ने भाजपा को लगातार बढ़त दिलाई.. लेकिन अब उनके निधन के बाद पहली बार भाजपा को बिना उनके नेतृत्व के चुनाव लड़ना पड़ रहा है.. ऐसे में यह उपचुनाव भाजपा के लिए अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है.. जबकि कांग्रेस के लिए इसे राजनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है..

कांग्रेस ने इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने अनुभवी नेता भीखाभाई रबारी पर भरोसा जताया है.. भीखाभाई रबारी गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं.. और लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं.. वे वडोदरा क्षेत्र में अच्छी राजनीतिक पहचान रखते हैं.. और स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं.. और उन्होंने 1990 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी की सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया था.. प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के कारण उन्हें कांग्रेस का वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता माना जाता है..

भीखाभाई रबारी की उम्मीदवारी को कांग्रेस की रणनीतिक चाल माना जा रहा है.. वे रबारी समुदाय से आते हैं.. जिसका गुजरात के कई इलाकों में प्रभाव है.. कांग्रेस का मानना है कि उनकी सामाजिक स्वीकार्यता, लंबे राजनीतिक अनुभव.. और स्थानीय पहचान का लाभ चुनाव में मिल सकता है.. पार्टी उन्हें एक ऐसे उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत कर रही है.. जो क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं.. और जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं.. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है..

भीखाभाई रबारी का राजनीतिक सफर कई दशकों का रहा है.. उन्होंने कांग्रेस संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं.. और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका अदा की है.. हालांकि गुजरात में कांग्रेस पिछले कई वर्षों से सत्ता से बाहर है.. लेकिन पार्टी अब भी कई क्षेत्रों में मजबूत संगठन बनाए रखने का प्रयास कर रही है.. मंजलपुर उपचुनाव कांग्रेस के लिए अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने.. और जनता के बीच विश्वास बहाल करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है..

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है.. उनके नाम की घोषणा पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा 9 जुलाई 2026 को की गई.. सतीश पटेल लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं.. और स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता माने जाते हैं.. पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर स्थानीय सामाजिक.. और राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने का प्रयास किया है.. हालांकि टिकट चयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं भी हुईं.. लेकिन अंततः भाजपा नेतृत्व ने सतीश पटेल पर भरोसा जताया..

भाजपा इस चुनाव में अपने विकास मॉडल, मजबूत संगठन.. और दिवंगत योगेश पटेल की राजनीतिक विरासत को प्रमुख मुद्दा बनाएगी.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास, बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश, रोजगार.. और शहरी सुविधाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रही है.. पार्टी को विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा की मजबूत छवि का लाभ भी चुनाव में मिलेगा..

 

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