फडणवीस को लेकर राउत ने कर दी ऐसी भविष्यवाणी, अपनों ने ही कर दिया खेल खराब

संजय राउत ने भविष्यवाणी की है कि केंद्र की मोदी सरकार की कैबिनेट में होने वाली फेरबदल का असर महाराष्ट्र में दिखेगा। राउत के बयान के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में माहौल गर्म है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा इन दिनोसातवें आसमान पर है। दरअसल उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत की भविष्यवाणी से बीजेपी के गठबंधन में ही नूराकुश्ती शुरू हो गई है।

संजय राउत ने भविष्यवाणी की है कि केंद्र की मोदी सरकार की कैबिनेट में होने वाली फेरबदल का असर महाराष्ट्र में दिखेगा। राउत के बयान के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में माहौल गर्म है।

अटकलों का दौर शुरू हो गया है। दरअसल संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल होने की संभावना है और भाजपा के राज्य राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने की संभावना है। उन्होंने दावा करते हुए कहा- ‘इस बात की प्रबल संभावना है कि केंद्र सरकार में फडणवीस को वित्त मंत्रालय दिया जाएगा। अगर फडणवीस केंद्र में जाते हैं, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले होंगे। एकनाथ शिंदे फिर कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे,”

साथ ही उन्होने कहा कि अगर फडणवीस केंद्र सरकार में जाते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि वे महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के रूप में बावनकुले के नाम की सिफारिश करेंगे। मुझे विदर्भ में बावनकुले सही नेता लगते हैं। मैंने हमेशा से चंद्रशेखर बावनकुले को देवेंद्र फडणवीस के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त नेता माना है। बावनकुले सबसे संवाद करते हैं और सबका ख्याल रखते हैं। गिरीश महाजन का रिकॉर्ड बहुत खराब है, इसलिए उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है,”

संजय राउत ने कहा, “ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि फडणवीस केंद्र सरकार में जाएंगे। अगर फडणवीस 2029 से पहले भारत के प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो हमें बहुत खुशी होगी। एक मराठी नागरिक होने के नाते, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उद्धव ठाकरे ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। वैसे भी, 2029 के बाद महाराष्ट्र में भाजपा के सत्ता में आने की संभावना कम ही है। इसलिए फडणवीस 2029 से पहले जो चाहें कर सकते हैं।” इसी दौरान राउत ने सोनम के आसान को लेकर भाजपा सरकार को घेरते हुए क्या कुछ कहा आप इस वीडियो में देखिये-

दरअसल राउत के इस दावे के साथ ही एनडीए में खींचतान शुरू हो गई। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता बच्चू कडू ने सीएम पद के लिए एकनाथ शिंदे का नाम उछाल दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हर कोई चाहता है कि महाराष्ट्र का ही कोई नेता देश का नेतृत्व करे। एक समय था जब पूरे देश पर मराठों का शासन था। उसी तरह, हर कोई देवेंद्र फडणवीस से उम्मीद करता है कि वे दिल्ली जाएं और देश के सपनों को साकार करें।

अगर फडणवीस दिल्ली जाते हैं, तो राज्य का नेतृत्व एकनाथ शिंदे को सौंप देना चाहिए। भाजपा महाराष्ट्र में सत्ता में इसलिए लौटी क्योंकि एकनाथ शिंदे ने बगावत करके शिवसेना को विभाजित कर दिया था। इसलिए, अगर देवेंद्र फडणवीस दिल्ली जाते हैं, तो विशुद्ध रूप से नैतिकता के आधार पर, एकनाथ शिंदे को ही मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए, चाहे सीटों की संख्या कितनी भी हो।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत के इस बयान पर कि एकनाथ शिंदे कभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एमएलसी बच्चू काडू ने टिप्पणी करते हुए कहा, “संजय राउत की भविष्यवाणियां कभी सच नहीं हुईं।

उन्होंने किस ज्योतिषी से सलाह ली? हमें नहीं पता कि संजय राउत ने किस ज्योतिषी से परामर्श लिया, लेकिन उनकी कही बात बेतुकी है।” उन्होंने कहा कि देवभाऊ को निश्चित रूप से दिल्ली जाकर देश की बागडोर संभालने की तैयारी करनी चाहिए। मेरा तो यही मानना ​​है कि एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहिए।

राउत के बयान से पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायक आदित्य ठाकरे ने 2 जुलाई, को मीडियाकर्मियों से कहा था कि देवेंद्र फडणवीस जल्द ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा था कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का प्रयास कर सकते हैं। साथ ही आदित्य ने कहा यह देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा का आखिरी सत्र होगा। मेरी बात याद रखना। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति हमेशा नहीं रहेगी।

दरअसल देवेंद्र फडणवीस भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। 2014 से महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, खासकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी नेताओं में उनका नाम लिया जाता है। इसी कारण समय-समय पर यह अटकलें लगती रही हैं कि उन्हें दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

हालांकि अभी तक भाजपा की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है कि फडणवीस को केंद्र में भेजा जाएगा। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के रूप में फडणवीस राज्य में पूरी मजबूती के साथ काम कर रहे हैं और नेतृत्व परिवर्तन जैसी कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद संजय राउत के बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म जरूर कर दिया है।

इस पूरे मामले को समझने के लिए महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को भी देखना जरूरी है। राज्य में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और सहयोगी दलों की सरकार है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं जबकि एकनाथ शिंदे महत्वपूर्ण सहयोगी नेता बने हुए हैं। ऐसे में यदि भविष्य में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसका असर सिर्फ भाजपा पर नहीं बल्कि पूरे सत्ता समीकरण पर पड़ सकता है।

संजय राउत के बयान का एक राजनीतिक पहलू भी माना जा रहा है। वहीं कई सियासी पंडितों का कहना है कि राउत लगातार सत्ताधारी गठबंधन के भीतर मतभेदों को उजागर करने की कोशिश करते हैं। फडणवीस के दिल्ली जाने की चर्चा भी उसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। इससे भाजपा और उसके सहयोगियों के बीच राजनीतिक असहजता पैदा करने का प्रयास माना जा रहा है।

इस बीच राउत ने सिर्फ भविष्यवाणी ही नहीं की बल्कि अपनी राजनीतिक मांग भी सामने रखी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भाजपा नेतृत्व बदलाव करता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा अपना ही मुख्यमंत्री बनाएगी और चंद्रशेखर बावनकुले जैसे नेता को आगे ला सकती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि फडणवीस का नाम केंद्रीय राजनीति के लिए इसलिए भी लिया जाता है क्योंकि उनके पास प्रशासनिक अनुभव काफी ज्यादा है। वे महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और संगठन में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। यदि भविष्य में केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो उनका नाम चर्चा में आ सकता है, लेकिन फिलहाल इसे केवल राजनीतिक अटकल माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में हाल के दिनों में कई राजनीतिक घटनाओं ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकातों को लेकर भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी हुई है। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दिया है। ऐसे माहौल में फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें और ज्यादा चर्चा का विषय बन गई हैं।

लेकिन फर्ज कीजिये अगर देखा जाए और मान लिया जाए कि फडणवीस को केंद्र में मंत्री बनाया जाता है, तो भाजपा के सामने महाराष्ट्र में नया नेतृत्व तय करने की चुनौती होगी। राज्य भाजपा में कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं, लेकिन फडणवीस जैसा जनाधार और प्रशासनिक अनुभव बहुत कम नेताओं के पास है।

इसलिए किसी भी बदलाव का असर राज्य की राजनीति पर दूरगामी हो सकता है। दूसरी ओर, विपक्ष इस पूरे मामले को भाजपा के अंदर संभावित बदलावों के संकेत के रूप में पेश कर रहा है। संजय राउत और अन्य विपक्षी नेता लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन पूरी तरह स्थिर नहीं है।

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