एक तंज… और सियासत में मचा तूफान

सीता के पति का नाम लेकर, नीता के पति के लिए काम कर रही है सरकार

काक्रोच जनता पार्टी के कार्यक्रम में कामरा के व्यंग ने मचा दी खलबली
वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन, सरकार बनी मौन, सीजेपी केआंदोलन का सियासी दलों का समर्थन
विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया पर मोदी सरकार निशाने पर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कुणाल कामरा ने फिर वही किया जिसके लिए वह जाने जाते हैं। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे काक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होकर एक ऐसी लाइन बोली जिसने राजनीति के पूरे इकोसिस्टम को हिला दिया। सीजेपी के मंच पर माइक था सामने आंदेालन कर रहे लोग और फिर आया वह वाक्य जिसने सोशल मीडिया की टाइमलाइन से लेकर टीवी स्टूडियो तक आग लगा दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कामरा ने कहा कि सीता के पति का नाम लेकर नीता के पति के लिए काम कर रहे हैं। बस इतना कहना था कि तालियां भी बजीं ट्रोल आर्मी भी सक्रिय हुयी और समर्थकों ने इसे सत्ता पर सबसे तीखा व्यंग्य बताया तो विरोधियों ने इसे मर्यादा की सीमा लांघने वाला हमला करार दिया। वहीं सोनम वांगचुक की अनशन अभी चल रही है। फिलहान अनशन से न हटने का फैसला किया है। उन्होंने लोगों से 2० जुलाई को संसद चलने को कहा है। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉक्टरों से उनकी नियमित जांच करने को कहा है।

चुनाव नहीं लड़ते कामरा

कामरा की राजनीति अलग है। वह चुनाव नहीं लड़ते घोषणापत्र नहीं लिखते और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं करते। उनका हथियार एक माइक्रोफोन और कुछ वाक्य हैं। लेकिन यही कुछ वाक्य कई बार नेताओं के घंटों लंबे भाषणों से ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा कर देते हैं। यही वजह है कि उनका हर नया शो केवल कॉमेडी नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिक्रिया का इंतजार भी बन जाता है।

व्यंग्य का तीर या राजनीतिक बारूद?

भारतीय राजनीति में आरोप नए नहीं हैं। विपक्ष लंबे समय से सरकार पर बड़े उद्योग समूहों के पक्ष में नीतियां बनाने का आरोप लगाता रहा है। सरकार हर बार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि उसके फैसले देश की अर्थव्यवस्था और निवेश को मजबूत करने के लिए हैं। कामरा ने इसी राजनीतिक आरोप को एक व्यंग्यात्मक पंक्ति में समेटने की कोशिश की। यह पहला मौका नहीं है जब कुणाल कामरा किसी राजनीतिक बयान को लेकर चर्चा में आए हों। वह इससे पहले भी कई मामलों में विवादों का सामना कर चुके हैं। मड्डहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री (तत्कालीन) एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध हुआ। उनके शो रद्द करने की मांग उठी और कानूनी कार्रवाई भी हुई। इसके अलावा वह कई बार केंद्र सरकार भाजपा और अन्य राजनीतिक नेताओं पर अपने व्यंग्य के कारण विवादों में रहे हैं। यही वजह है कि उनका हर नया बयान केवल मनोरंजन की खबर नहीं रह जाता बल्कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बन जाता है।

सीधे रिलायंस समूह पर हमला

कुणाल कामरा की ताजा टिप्पणी का ज्यादा शोर इसलिए भी सुनाई दे रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और बड़े उद्योग समूहों के रिश्तों को लेकर विपक्ष लगातार हमले कर रहा है वह सवाल उठा रहा है। पिछले कई वर्षों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के अनेक नेताओं ने संसद से लेकर चुनावी सभाओं तक यह आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों से चुनिंदा बड़े कॉरपोरेट घरानों को असमान रूप से लाभ मिला है। दूसरी ओर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी इन आरोपों को लगातार राजनीतिक प्रचार बताती रही है। सरकार का कहना है कि उसकी आर्थिक नीतियां किसी एक उद्योग समूह के लिए नहीं बल्कि निवेश रोजगार विनिर्माण और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए बनायी गयी हैं। भाजपा नेताओं का तर्क रहा है कि देश में सडक़ रेल बंदरगाह रक्षा उत्पादन डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश के बिना तेज आर्थिक विकास संभव नहीं है। सरकार यह भी कहती रही है कि परियोजनाएं तय नियमों और निविदा प्रक्रियाओं के तहत दी जाती हैं तथा किसी भी कारोबारी समूह के खिलाफ या पक्ष में राजनीतिक आधार पर निर्णय नहीं लिए जाते। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें कामरा का व्यंग्य सामने आया। उन्होंने किसी नीति बजट या सरकारी योजना का तकनीकी विश्लेषण नहीं किया बल्कि विपक्ष के लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को एक प्रतीकात्मक व्यंग्यात्मक और बेहद संक्षिप्त वाक्य में पिरोने की कोशिश की। यही वजह है कि उनका बयान महज एक कॉमेडी पंचलाइन बनकर नहीं रह गया बल्कि उसी पुराने राजनीतिक विवाद का नया संस्करण बन गया जो वर्षों से भारतीय राजनीति का हिस्सा रहा है।

सरकारी डॉक्टर सोनम वांगचुक की नियमित जांच करें: दिल्ली हाईकोर्ट

अदालत ने कहा- प्रत्येक नागरिक का जीवन कीमती

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की अदालत इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल के द्वारा दिए गए आश्वासन से हम संतुष्ट हैं। यह निर्देश दिए जाते हैं कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा सोनम वांगचुक्की नियमित जांच की जाए और डॉक्टरों की सलाह पर उचित हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारण किया। कोर्ट में सरकारी वकील की दलील,दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम का स्वास्थ्य नियमित तौर पर चेक हो रहा है। अदालत ने पूछा कि क्या सरकारी डॉक्टर सोनम वांगचुक की जांच कर रहे हैं। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि नहीं उनकी तरफ से जब भी हमें अनुमति जाएगी सरकारी डॉक्टर उनकी नियमित जांच करना शुरू कर देंगे। तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि अब सरकारी चिकित्सक उनकी नियमित जांच करेंगे। आवश्यकता पडऩे पर उचित कदम उठाए जाएंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के आश्वासन के बाद अदालत ने कहा की प्रत्येक नागरिक का जीवन कीमती है। किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार अपने जीवन को अंत करने के लिए नहीं देखा जा सकता।

गिरते स्वास्थ्य के बीच 2० जुलाई को संसद चलो का आह्वान

ब्लड शुगर 8० एमजी/डीएल और ऑक्सीजन सैचुरेशन 97प्रतिशत होने के बाद भी देश के जानेमाने जलवायु कार्यकर्ता नौजवानों के साथ खड़े हंै और लड़ाई को आगे जारी रखने की बात कही है। उधर देश के जानेमाने लोगों ने उनसे अनशन तोडऩे की अपील की है। हालांकि भूख हड़ताल के 19 दिन होने के बाद भी सरकार को भी प्रतिनिधि उनकी सुधि लेने नही गया है। सरकार की हठधर्मिता का विपक्ष तो आलोचना कर ही रहा है। अब सोशल मीडिया पर भी लोग मोदी सरकार को कोस रहे हैं। वहीं डॉक्टरों ने बताया कि वे होश में हैं और मानसिक रूप से सतर्क हैं, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता है। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जारी नवीनतम मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 59 वर्षीय वांगचुक बहुत कमजोर हैं और 24 घंटे मेडिकल निगरानी में हैं। उनका वजन घटकर 57.15 किलोग्राम हो गया है; पिछले 24 घंटों में इसमें 4०० ग्राम की कमी आई है और उपवास शुरू करने के बाद से अब तक लगभग 8.9 किलोग्राम वजन कम हुआ है। उनका ब्लड प्रेशर 1०5/76 एमएमएचजी ब्लड शुगर 8० एमजी/डीएलऔर ऑक्सीजन सैचुरेशन 97प्रतिशत दर्ज किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि वे होश में हैं और मानसिक रूप से सतर्क हैं, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता है। अपने अभियान को और तेज़ करते हुए, सीजेपी ने एक दिन की सामूहिक भूख हड़ताल की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने नागरिकों से 2० जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील दोहराई है। वे एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, बार-बार पेपर लीक होने के लिए जवाबदेही और शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं।

वीडियो संदेश में अपनी बात रखी

श्री वांगुचक ने एक वीडियो संदेश में कहा कि मेरी हालत अच्छी नहीं है, लेकिन बहुत खराब भी नहीं है। कमजोर आवाज और ढलते शरीर के साथ यह बात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कल देर रात जंतर-मंतर से ये वीडियो जारी क ी। नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बडिय़ों और पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज 19वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस आंदोलन को 19 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नाम के एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक ग्रुप ने अपने फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई में शुरू किया था, जो अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका है। वीडियो मैसेज में वांगचुक ने समर्थकों से यह भी आग्रह किया कि वे उनसे उपवास खत्म करने के लिए न कहें, बल्कि 2० जुलाई को संसद तक संगठन के नियोजित चलो संसद मार्च में शामिल हों। उन्होंने कहा, मुझसे उपवास तोडऩे के लिए कहने के बजाय, कृपया 2० जुलाई को मेरे साथ शामिल हों… संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में।

अन्य छात्र नेता भी अनशन में दे रहे साथ

इस विरोध प्रदर्शन में वांगचुक अकेले नहीं हैं। छात्र संगठनों के सदस्यों सहित कई अन्य लोग भी जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं। एक अलग मंच पर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेता नेहा, मनीष और आमीन ने खराब होती सेहत के बावजूद अपना उपवास जारी रखा। उपवास के दौरान नेहा का वजन 5.85 किलोग्राम कम हुआ है, जबकि मनीष और आमीन का वजन क्रमश: 8.2 किलोग्राम और 8.3 किलोग्राम कम हुआ है। तीनों का ब्लड शुगर लेवल कम दर्ज किया गया है। छात्र संगठन ने यह भी बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगडऩे के बाद जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव दानिश, बराक हॉस्टल के अध्यक्ष ऋषिकेश और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता दीपक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजनीतिक नेताओं ने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की।

शशि थरूर ने वांगचुक से अनशन खत्म करने को कहा

इस विरोध-प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि ंइस अनशन ने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है और छात्रों के मुद्दों की लड़ाई अब संसद में ले जानी चाहिए। थरूर ने एक खुले पत्र में लिखा, श्री सोनम वांगचुक-जी से मेरी दिली अपील है: कृपया अपना अनशन खत्म करें। आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है; अनशन का मकसद यही होता है। आगे के लंबे सफर के लिए भारत को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है।

टीएमसी, सपा, शिवसेना-यूबीटी व आप भी साथ में

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और ्र्रक्क के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की थी। वहीं, अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला और अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी जंतर-मंतर पर विरोध स्थल का दौरा किया और अपना समर्थन जताया। उधर पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, शिक्षाविद जयंती घोष, स्कॉलर निवेदिता मेनन और शिक्षाविद अनुराधा चेनॉई शामिल थे।

Related Articles

Back to top button