दिल्ली की गद्दी पर अब महाराष्ट्र का दावा ?
सीएम फडणवीस के नाम की गूंज

- मंत्री की राष्ट्रीय नेतृत्व वाली इच्छा और शरद पवार से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
- सीएम देवेंद्र फडणवीस को देश का नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए : मंत्री दत्तात्रय भरणे
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे द्वारा भरी सभा में दिये गये बयान ने बीजेपी की आंतरिक राजनीति को गर्म कर दिया है। उन्होंने दिल्ली की गद्दी पर महाराष्ट्र की दावेदारी पेश करते हुए कहा है कि उचित समय पर देश की कमान सीएम फडणवीस के हाथों में होनी चाहिए और वह इसके लिए प्रार्थना करेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने सार्वजनिक मंच से यह इच्छा जतायी है कि देवा भाऊ को सही समय आने पर देश का नेतृत्व करने का अवसर मिले। यह सिर्फ प्रशंसा थी राजनीतिक शुभकामना थी या फिर एक सोची समझी राजनीतिक संकेत रेखा या फिर महाराष्ट्र की सियासत से ध्यान भटकाने वाला बयान यह देखने वाली बात होगी। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति और देश के सियासी महौल में इस बयान ने ऐसा विस्फोट किया है कि राजनीति की चूलें हिल गयी है।
फडणवीस क्यों हैं भाजपा के सबसे मजबूत मुख्यमंत्रियों में?
बड़ा सवाल है कि आखिर फडणीस से ज्यादा सीनियर और होनहार नेताओं की फौज होते हुए भी फडणवीस का नाम पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर क्यों किया जा रहा है। इस सवाल का सबसे मजबूत जवाब यह हो सकता है कि फडणवीस ने खुद को सभी कौशलों में जस्टिफाई किया है। फंड रेजिंग से लेकर कूटनीति तक और सभी को साथ लेकर चलने का हुनर भी उनको आता है। आर्थिक कैपिटल का तमगा हासिल किये महाराष्ट्र के सीएम होने का उन्हें सबसे बड़ा फायदा यह मिल रहा है कि देश के बड़े बिजनेस ग्रुप का उन्हें सपोर्ट हासिल है और इसके अतिरिक्त फडणवीस युवा है और उसी स्टेट से आते हैं जहां से नितिन गडकरी आते हैं।
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए की प्रार्थना
मुंबई में भाजपा किसान मोर्चा के कार्यक्रम में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में कहा कि वह भगवान वि_ल से प्रार्थना करेंगे कि भविष्य में फडणवीस को देश का नेतृत्व करने का अवसर मिले। सामान्य परिस्थितियों में इसे किसी लोकप्रिय मुख्यमंत्री की प्रशंसा माना जा सकता था, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि यह बयान ऐसे समय आया जब महाराष्ट्र की राजनीति लगातार नए समीकरणों की चर्चा में है।
भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में कोई औपचारिक बदलाव अभी नहीं
यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में कोई औपचारिक बदलाव का संकेत मिलता है। लेकिन इतना तय है कि महाराष्ट्र से उठी इस आवाज ने राजनीतिक गलियारों में एक नया प्रश्न जरूर खड़ा कर दिया है। क्या यह केवल सम्मान का संबोधन था या भविष्य की संभावनाओं पर शुरू हुई नई राजनीतिक चर्चा इस का जवाब समय देगा लेकिन इतना तय है कि इस बयान ने बीजेपी की भीतर की राजनीति को मथ दिया है। ऐसे कई बड़े चेहरे और नाम है जो पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर खुद को परोस रहे हैं। उनमें सबसे बड़ा नाम यूपी के सीएम यागी आदित्यनाथ का भी है। उनके बारे में भी यही कहा जाता है कि आज नहीं तो कल वह देश के प्रधानमंत्री बनेगे।
पूरेबयान केहैं कुछ मायने
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भविष्य में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभाते देखने की इच्छा व्यक्त की। मुंबई में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में सीएम फडणवीस की मौजूदगी में बोलते हुए भरणे ने आषाढ़ी एकादशी के शुभ अवसर का जिक्र करते हुए फडणवीस लिए बड़ी भूमिकाओं की ओर इशारा किया। सभा को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने सीएम के योगदान की तारीफ की और कहा कि महाराष्ट्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सामूहिक भविष्य के लिए अच्छे नेताओं का महाराष्ट्र में बने रहना जरूरी है लेकिन वे स्वार्थी होकर काम नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा कि आज महाराष्ट्र दिल्ली की सत्ता से कुछ दूर है। भरणे ने कहा कि आने वाली आषाढ़ी एकादशी पर वे भगवान पांडुरंग (वि_ल) से सच्चे मन से प्रार्थना करेंगे कि देवा भाऊ देवेंद्र फडणवीस को सही समय पर देश का नेतृत्व करने का मौका मिले। यह कार्यक्रम पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान ऋण माफी योजना की घोषणा के बाद सीएम फडणवीस के सम्मान में आयोजित किया गया था। भरणे ने गठबंधन के कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि इस महत्वपूर्ण नीति की जानकारी असली लाभार्थियों तक पहुंचे।
विपक्ष क्या देख रहा है?
महाराष्ट्र से उठी इस सियासी चिंगरी पर विपक्ष ने नजरे गढ़ा दी है। विपक्ष इस घटनाक्रम को एक भावनात्मक बयान मानने के बजाय इसे बीजेपी की अंदरूनी के तौर पर देख रहा है। विपक्षी दलों के लिए यह सवाल खड़ा करने का अवसर है कि आखिर ऐसा कौन सा राजनीतिक माहौल बन रहा है जिसमें किसी मौजूदा मुख्यमंत्री के लिए सार्वजनिक मंच से देश का नेतृत्व करने की कामना की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर किसी बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही पार्टी के निर्विवाद राष्ट्रीय नेता हैं। ऐसे में विपक्ष यदि इस बयान को भाजपा के भीतर कथित शक्ति संतुलन या भविष्य की उत्तराधिकार बहस से जोडऩे की कोशिश करता है तो भाजपा का जवाब भी लगभग तय माना जाता है। पार्टी इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रशासनिक कामकाज, राजनीतिक अनुभव और किसानों के लिए गए फैसलों के प्रति एक मंत्री द्वारा व्यक्त सम्मान और शुभकामना का स्वाभाविक प्रकटीकरण बता सकती है। इसके बावजूद राजनीति केवल आधिकारिक बयानों से नहीं चलती, बल्कि संकेतों, प्रतीकों और समय के चयन से भी अपनी दिशा तय करती है। यही वजह है कि शरद पवार से फडणवीस की हालिया मुलाकात और उसके तुरंत बाद राष्ट्रीय नेतृत्व वाली टिप्पणी ने राजनीतिक विश्लेषकों तथा विपक्ष—दोनों को नए सवाल उठाने का मौका दे दिया है। आने वाले दिनों में यदि ऐसे ही स्वर भाजपा के अन्य नेताओं की ओर से भी सुनाई देते हैं तो यह तय माना जना चाहिए कि पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर बीजेपी में मंथन शुरू हो चुका है।
असामान्य हलचलों के दौर से गुजरती राजनीति
यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही असामान्य हलचलों के दौर से गुजर रही है। कुछ दिन पहले सीएम फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की मुलाकात ने भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया था। मुलाकात को दोनों पक्षों ने सामान्य बताया लेकिन राजनीति में मुलाकातों से अधिक उनके समय और संदेश को पढ़ा जाता है। ऐसे में जब उसी दौर में एक वरिष्ठ मंत्री सार्वजनिक रूप से फडणवीस को भविष्य के राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में देखने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो यह चर्चा केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहती। भारतीय जनता पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व निर्विवाद माना जाता है और पार्टी ने किसी नेतृत्व परिवर्तन का कोई संकेत नहीं दिया है। लेकिन राजनीति संभावनाओं, प्रतीकों और संदेशों की भी भाषा होती है। किसी मुख्यमंत्री के लिए राष्ट्रीय भूमिका की सार्वजनिक कामना इसलिए भी चर्चा का विषय बनती है क्योंकि ऐसे बयान सामान्य प्रशासनिक उपलब्धियों की प्रशंसा से कहीं आगे जाते हैं। यह उस राजनीतिक कद की ओर इशारा करते हैं जिसे समर्थक भविष्य में और बड़ा देखना चाहते हैं। महाराष्ट्र लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति की प्रयोगशाला रहा है। यहीं से कई ऐसे नेता निकले जिन्होंने दिल्ली की सत्ता को प्रभावित किया। आज जब फडणवीस लगातार संगठन सरकार और गठबंधन तीनों स्तरों पर भाजपा के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं तब उनके समर्थन में आया यह बयान स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया है। संबंधित खबरे 3 पर भी




