उद्धव ठाकरे के राम रक्षा स्तोत्र आंदोलन से घबराई महाराष्ट्र सरकार, फडणवीस को कहनी पड़ी ये बात

उद्धव ठाकरे को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे कम से कम 'राम रक्षा स्तोत्र' के दो पन्ने पढ़कर दिखाएं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आंदोलन करना उचित नहीं है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है राजनेता एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

फडणवीस सरकार में विकास हो या न हो लेकिन विपक्ष को तोड़ने का काम ज़ोरों पर है। ऐसे में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी ने पार्टी से बगावत करने वाले 6 सांसदों पर कानूनी वार किया है.

इस दौरान उनके विलय के दावों को गैरकानूनी बताया गया है. शिवसेना (यूबीटी) ने अपने छह बागी लोकसभा सदस्यों को कानूनी नोटिस भेजा है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल ने कहा है कि उसका विरोधी शिंदे गुट के साथ विलय कानूनन संभव नहीं है. इन्ही सब गतिविधियों के बीच उद्धव ठाकरे और सीएम देवेंद्र फडणवीस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

दरअसल उद्धव ठाकरे का राम रक्षा स्तोत्र आंदोलन एक हालिया राजनीतिक-धार्मिक अभियान है जिसके चलते राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है और सत्ताधारी दल की नींद उडी हुई है। इसी बीच सीएम फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे कम से कम ‘राम रक्षा स्तोत्र’ के दो पन्ने पढ़कर दिखाएं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आंदोलन करना उचित नहीं है।

फडणवीस की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर 18 जुलाई को नागपुर में ‘राम रक्षा’ आंदोलन करने की घोषणा की है। इससे पहले मुंबई में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किया गया था।

‘राम रक्षा स्तोत्र आंदोलन’ आखिर है क्या। दरअसल शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इसी जुलाई में शुरू किया। यह मुख्य रूप से अयोध्या राम मंदिर के दान और निर्माण में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रित है, जिसमें उद्धव ठाकरे बीजेपी और आरएसएस पर राम भक्तों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हैं।

इस आंदोलन का उद्देश्य हिंदुत्व की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करना, राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दान के कथित दुरुपयोग को उजागर करना और महाराष्ट्र में अपनी पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाना है, खासकर नागपुर जैसे आरएसएस के गढ़ में।

आंदोलन की शुरुआत 5 जुलाई को मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर में हुई, जहां उद्धव ठाकरे ने राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा और हनुमान स्तोत्र का पाठ और आरती की। इसके बाद उन्होंने ‘राम रक्षा आंदोलन’ की घोषणा की, जो राम की रक्षा के नाम पर एक व्यापक अभियान है।

इसका चरम 18 जुलाई 2026 को नागपुर के रामनगर मंदिर में होने वाला कार्यक्रम है, जहां उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ राम रक्षा स्तोत्र का सामूहिक पाठ करेंगे। मंदिर प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति दी है लेकिन राजनीतिक बैनर, नारे या स्लोगन पर रोक लगा दी है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि कोई शर्त नहीं है, और अगर बड़ी भीड़ जुटे तो मंदिर के बाहर स्टेज लगाकर संबोधन होगा। यह आंदोलन अयोध्या राम मंदिर निर्माण में दान के कथित गबन और ट्रस्ट की जवाबदेही की मांग से जुड़ा है, जिसे उद्धव ठाकरे ‘राम भक्तों के साथ धोखा’ बता रहे हैं।

राजनीतिक रूप से यह आंदोलन काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि नागपुर आरएसएस का मुख्यालय है। उद्धव ठाकरे इससे आरएसएस-बीजेपी के पारंपरिक हिंदुत्व वोटरों तक पहुंचना चाहते हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि असली राम भक्ति उनकी पार्टी में है, न कि सत्ताधारी गठबंधन में।

महाराष्ट्र में सत्ता गठबंधन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राम रक्षा स्तोत्र एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है, जो भगवान राम की रक्षा और शक्ति का वर्णन करता है। इसे तुलसीदास जी से जोड़ा जाता है और हिंदू भक्त रोजाना जाप करते हैं। उद्धव ठाकरे ने इसे हिंदू जागरण का माध्यम बनाया है। आंदोलन का विस्तार महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में हो रहा है, जहां पार्टी कार्यकर्ता स्तोत्र पाठ और आरती का आयोजन कर रहे हैं।

यह उद्धव ठाकरे की रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसमें वे धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय दिखकर अपनी ‘मराठी मानुस’ और हिंदुत्व इमेज को मजबूत करना चाहते हैं, खासकर 2024 के बाद की राजनीतिक चुनौतियों के बीच।आलोचक इसे शुद्ध राजनीतिक चाल मानते हैं, जबकि समर्थक इसे राम भक्ति और पारदर्शिता की लड़ाई बताते हैं। आंदोलन ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है।

हालांकि यह आंदोलन जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। बढ़ती लोकप्रियता देख बीजेपी खेमे में टेंशन का माहौल है। और इसी कड़ी में है सीएम फडणवीस का ये बयान जिसमें मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मेरी सिर्फ इतनी अपेक्षा है कि उद्धव ठाकरे कम से कम राम रक्षा स्तोत्र के दो पन्ने पढ़ लें। भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आंदोलन करना ठीक नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पिछली बार भी वे राम रक्षा नहीं पढ़ पाए थे। अगर वे तैयार हों तो मैं उनके साथ बैठकर राम रक्षा का पाठ करने को तैयार हूं। मुझे पूरा राम रक्षा स्तोत्र कंठस्थ है। अगर किसी को याद नहीं है तो कम से कम पढ़ना तो आना चाहिए। यह कैसा आंदोलन है कि आप ‘राम रक्षा’ आंदोलन शुरू करते हैं, लेकिन राम रक्षा स्तोत्र पढ़ भी नहीं सकते?

इतना ही नहीं दोस्तों मुख्यमंत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर उद्धव ठाकरे की हालिया टिप्पणी को भी खारिज कर दिया। उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा था कि वांगचुक की बुद्धिमत्ता का उपयोग देश के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार ऐसे लोगों को देशद्रोही बताकर जेल भेज रही है।

उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने वांगचुक की खराब होती सेहत को लेकर उनसे फोन पर बात की थी और केंद्र सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा, उद्धव ठाकरे एक निराश, हताश और परेशान व्यक्ति हैं। उनका राजनीतिक अस्तित्व लगातार कमजोर हो रहा है। सोनम वांगचुक हो या कोई और मुद्दा, वे केवल अपनी हताशा के कारण बयान दे रहे हैं।

दरअसल हाल ही में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कॉकरोच जनता पार्टी और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया. मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए.

साथ ही उन्होंने वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि उनका जीवन बेहद कीमती है. जो की भाजपाइयों को नागवार गुजरी। जो की साबित करता है कि इस तानाशाह सरकार में मानवता रह ही नहीं गई है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का धरना पिछले 24 दिनों से जारी है. संगठन की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और इस वर्ष मई में हुई नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.

प्रश्नपत्र लीक होने के बाद नीट की पुनः परीक्षा पिछले महीने आयोजित की गई थी. बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था, जबकि शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.

डॉक्टरों के अनुसार, अनशन के कारण वांगचुक की तबीयत बिगड़ गई है. रविवार को चिकित्सकों ने बताया कि उनका रक्तचाप कम हो गया है और अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन 8 किलोग्राम से ज्यादा घट चुका है. कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की है.

जिसे लेकर उद्धव ठाकरे ने भी कहा कि सभी राजनीतिक दलों को ‘‘बिना किसी राजनीतिक झंडे के’’ कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भी इस आंदोलन के समर्थन में आगे आना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगने में कुछ भी गलत नहीं है.

ठाकरे ने कहा कि 20 जुलाई को जब कॉकरोच जनता पार्टी नयी दिल्ली में संसद तक मार्च निकालेगी, तो उसी दिन शिवसेना (यूबीटी) भी महाराष्ट्र में प्रदर्शन कर इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताएगी। गौरतलब है कि ये मुद्दे अभी न सिर्फ महाराष्ट्र में बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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