कॉकरोच इज बैक, दीपके ने संभाली कमान

- सोनम को अस्पताल अब अभिजीत देंगे सरकार को चुनौती
- संसद की ओर बढ़ रही है नई सियासी बगावत!
- 20 जुलाई का संसद मार्च बनेगा सरकार की नई परीक्षा?
- सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर विपक्ष आगबबूला
- 20 दिन का अनशन अब अस्पताल से होगा आंदोलन
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर शुरू हुआ अनशन अब सिर्फ एक व्यक्ति की सेहत का सवाल नहीं रह गया है। यह उस राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है जिसमें एक तरफ सरकार कानून अदालत और मेडिकल सलाह का हवाला दे रही है तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बता रहे हैं। सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की कार्रवाई ने आंदोलन की आग में घी का काम किया है। सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद आंदोलन की कमान सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने संभाली हैं और अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान कर दिया है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जंतर मंतर पर आगे क्या होगा। असली सवाल यह है कि क्या यह टकराव संसद की दहलीज तक पहुंचेगा। इतिहास गवाह है कि अनेको बार आंदोलनों की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व नहीं बल्कि वह क्षण होता है जब सत्ता और सड़क आमने सामने दिखाई देते हैं। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश मेडिकल सलाह और बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। दूसरी ओर आंदोलनकारी आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हटाया गया और प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग हुआ। दोनों पक्ष अपनी- अपनी कहानी सुना रहे हैं लेकिन देश जिस तस्वीर को देख रहा है उसमें पुलिस अस्पताल अनशन संसद मार्च और बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी एक साथ मौजूद हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक किरदार शायद सोनम वांगचुक नहीं बल्कि वह आंदोलन बन सकता है जो उनके बाद भी जारी रखने की घोषणा की गई है। दीपके ने साफ कर दिया है कि 20 को संसद मार्च हर हाल में होगा और अनशन भी जारी रहेगा। यानी संघर्ष का केंद्र अब एक व्यक्ति से हटकर संगठन और रणनीति की ओर बढ़ रहा है। यहीं से राजनीति का अगला अध्याय शुरू होता है। यदि आंदोलन शांतिपूर्ण रहते हुए भी लंबा खिंचता है तो सरकार पर संवाद का दबाव बढ़ सकता है। यदि टकराव बढ़ता है तो विपक्ष को नया राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
आंदोलन खत्म नहीं होगा
सोनम वांगचुक को धरना स्थल से पुलिस द्वारा जर्बदस्ती हटाने के बाद काकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने प्रदर्शन स्थल से लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि मैं आज से अपना अनशन शुरू कर रहा हूं। 20 जुलाई को हमारा मार्च भी होगा और मेरा अनशन जारी रहेगा। ये लोग सोचते हैं कि सोनम सर को अंदर ले जाकर और यहां से उठाकर वे प्रोटेस्ट खत्म कर देंगे आंदोलन खत्म नहीं होगा। पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि सोनम सर को घसीटकर ले जाया गया है और गाली गलौज करने और यहां से ले जाने की जो कायरतापूर्ण हरकत की गई है उससे यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। यह प्रोटेस्ट जारी रहेगा। हम यहीं रहेंगे और 20 तारीख को यहीं से पार्लियामेंट तक मार्च शुरू होगा। पुलिसवालों ने गुंडों वाली हरकत की है। दीपके ने लोगों से अपील की कि जो लोग दिल्ली आना चाहते हैं वह आ जाएं। हम यहीं बैठे रहेंगे। अभिजीत दीपके ने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस ने मुझे भी पीटा और जंतर मंतर जाने से रोका। मुझे पीटा गया सड़क पर घसीटा गया और कहा कि देखते हैं तुम जंतर मंतर कैसे जाते हो। यहां कई विधायक और सांसद हैं जिन्हें भी गेट पर रोक दिया गया है और अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है।
जंतर मंतर पर लोगों को पीट रही है पुलिस : दिपके
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि दिल्ली पुलिस जंतर मंतर पर सख्ती कर रही है। लोगों को पीट रही है और सोनम सर को जबरदस्ती ले जा रही है। एक दूसरी पोस्ट में वह लिखते हैं कि दिल्ली पुलिस ने मुझे पीटा है और हिरासत में रखा है। कॉकरोच इज बैक नाम के एक्स हैंडल से लिखा गया कि सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके का वीडियो मैसेज जब उन्हें पुलिस ने छोड़ा जब पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से किडनैप कर लिया था। पुलिस ने उन्हें पीटा है। सीजेपी के प्रोटेस्ट करने वालों पर जंतर मंतर पर बुरी तरह लाठीचार्ज किया गया है।
सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता : संजय सिंह
सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने का विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता। जिस युवा पर लठ्ठ चला रहे हो, यही आपका तख्त उखाड़ेगा। एक शख्स सोनम वांगचुक जो पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर है, उनकी मांगें सुनने के बजाय उसको जबरन गिरफ्तार कर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया।
भाजपा वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं : डिंपल यादव
समाजवादी पार्टी से सांसद डिंपल यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, सोनम वांगचुक को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं । यह तानाशाही है। डिंपल यादव ने दूसरे पोस्ट में कहा, भाजपा वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना देश की आत्मा को दबाना है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने सोनम वांगचुक जंतर-मंतर से हटाए जाने का विरोध करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, ये कौन सा तरीका है शांतिपूर्ण प्रदर्शन खत्म करने का। सफेद कपड़ा लाकर 20 दिनों की हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को अस्पताल उठा ले गई पुलिस।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया : चंद्रशेखर
भीम आर्मी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर लिखा, लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार! दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। सांसद ने आगे कहा, इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के साथ भी यही हुआ। देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया। अब सोनम वांगचुक जी के सत्याग्रह के साथ भी वही व्यवहार किया जा रहा है। क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया? हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक को उत्तम स्वास्थ्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करे।
शांतिपूर्ण अनशन करना भी अब आसान नहीं रहा : पुष्पेंद्र सरोज
दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक सांसद और युवा होने के नाते मैं पहले भी यहां आया था और लोगों को बहुत उम्मीदें थीं। जो व्यक्ति 20 दिनों से भूख हड़ताल पर है, उसके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। आज उन्हें चादर से ढका गया, बैरिकेड्स हटाए गए और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वहीं, पुष्पेंद्र सरोज ने एक्स पर लिखा, क्या लोकतंत्र में अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण अनशन करना भी अब आसान नहीं रहा? जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि यह है कि क्या सरकार संवाद का रास्ता चुनेगी या विरोध की आवाज को अनसुना करती रहेगी?




