कॉकरोच के बाद किसान सांसत में सरकार की जान

  • खेत-खलिहानों से निकलाअन्नदाता
  • दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत
  • शंभू बार्डर सीज, प्रमुख किसान नेता हिरासत में व्यापक ट्रैफिक एडवाइजरी
  • किसानों ने बदली रणनीति इस बार निजी वाहनों के बजाए पब्लिक ट्रांस्पोर्ट के जरिये पहुंच रहे हैं दिल्ली

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जेन जी के मार्च टू पार्लियामेंट के बाद आज दिल्ली किसानों की महापंचायत का गवाह बनी। किसानों ने खेत खलिहानों से निकल कर दिल्ली की तरफ कूच कर दिया और जत्थों की शक्ल में वह किसान घाट पर इकट्ठा हो रहे हैं। खबर लिखे जाने तक वहां किसानों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। किसानों के कूच से सरकार की जान निकल गयी है और आनन-फानन में एक बार फिर शंभू बार्डर समेत हरियाणा के वह एंट्री प्वाइंट सील कर दिये गये जिनके रास्ते किसान दिल्ली में प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि इस बार किसानों ने अपनी रणनीति बदली है और वह निजी वाहनों के बजाए पब्लिक ट्रांस्पोर्ट का सहारा लेकर दिल्ली पहुंच रहे हैं ताकि उन्हें सरकार दिल्ली पहुंचने से पहले रोक न पाए। किसान घाट जहां महापंचायत का आयोजन होना है वहां का नजारा भी देखने लायक है। प्रमुख किसान नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है और महापंचायत के इर्द गिर्द हजारों की तादात में पुलिस फोर्स मौजूद हैं। किसान प्रस्तावित भारत अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में सरकार को घेर रहे हैं।

बोले किसान- हम टकराव नहीं चाहते, हमें अपनी बात कहने का हक

किसान संगठनों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधाते हुए कहा है कि उनका आंदोलन हरियाणा सरकार से टकराव के लिए नहीं बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में है। फतेहगढ़ साहिब में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए। वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने हरिद्वार में छात्रों के आंदोलन कांवड़ यात्रा वन गुज्जरों के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार की आलोचना की। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों वाहनों के साथ किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान फतेहगढ़ साहिब में एकत्र हुए जहां से आगे की रणनीति बनाई जा रही है। उनका उद्देश्य केवल चार घंटे के लिए दिल्ली स्थित किसान घाट पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना और अपनी बात सरकार तक पहुंचाकर वापस लौटना है। लेकिन शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने और रास्ते बंद करने की खबरें मिल रही हैं। यदि किसानों को रातभर रास्तों पर रोका गया और उन्हें परेशानी हुई तो इसकी जिम्मेदारी हरियाणा की सैनी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की होगी। सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों से बातचीत करने या भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पूरा मसौदा देश के सामने रखने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि सुबह किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत कई किसानों को गिरफ्तार किया गया। इससे यह साफ हो गया है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाना चाहती है।

सरकार के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक परीक्षा

किसान घाट पर होने वाली महापंचायत से पहले शंभू बॉर्डर समेत दिल्ली से जुड़े कई प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा का ऐसा घेरा खड़ा कर दिया गया है जिसने पूरे घटनाक्रम को सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक परीक्षा बना दिया है। बड़े किसान नेता हिरासत में लिए जा चुके हैं बैरिकेड कई स्थानों पर खड़े हैं और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक एडवाइजरी जारी कर दी है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी को हिरासत में लिया जा चुका है।

सामान्य नजर नहीं आ रही दिल्ली

राजधानी के भीतर भी हालात सामान्य नहीं दिख रहे हैं। सत्याग्रह मार्ग, वेलोड्रोम रोड, राजघाट डीटीसी डिपो रोड और किसान घाट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित रहने की संभावना जताई गई है। जरूरत पडऩे पर दिल्ली गेट, राजघाट क्रॉसिंग, गुरु नानक चौक, शांतिवन चौक और आईपी फ्लाईओवर सहित कई प्रमुख मार्गों से यातायात डायवर्ट किया जा सकता है। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को पहले से यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है। किसान संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और उससे जुड़े कृषि हितों के मुद्दों पर केंद्रित है। वहीं प्रशासन का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यही वजह है कि एहतियाती कदम पहले से उठाए गए हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश और किसानों के हित में नहीं : पंधेर

किसान नेता पंधेर ने दावा किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश और किसानों के हित में नहीं है। अमेरिका के बड़े कृषि उत्पादकों के मुकाबले भारतीय छोटे और मध्यम किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री लगातार पंजाब आते हैं और अपनी राजनीतिक गतिविधियां करते हैं लेकिन जब पंजाब के किसान देश की राजधानी दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें रास्ते में रोक दिया जाता है। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या पंजाब भी देश का हिस्सा है या नहीं। उनका कहना था कि किसानों को केवल हरियाणा की सड़क का उपयोग करते हुए दिल्ली पहुंचना था और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था।

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