राहुल-अलिखेश ने दाग दिया राजनीतिक गोल, बीजेपी हलकान

  • डैमेज कंट्रोल के लिए आज बीजेपी का आंदोलन का एलान
  • धक्केे खाये, गिरफ्तारी झेली छात्रों के मुद्दों पर डंटे रहे राहुल-अलिखेश

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राहुल गांधी ने खरगे को बधाई देने के बहाने पहले सांसदों को बुलाया, फिर जिप टाई बांटी और उसके बाद घेर लिया पीएम आवास। राहुल गांधी का पूरा साथ दिया यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने। अखिलेश को पहले ही पता था कि राहुल गांधी क्या करने वाले हैं। लिहाजा वह तैयार थे और पूरी टीम के साथ पीएम आवास पहुंच गये। राहुल-अखिलेश के इस कदम से बीजेपी भौचक्की रह गयी और उसकी कुछ समझ में नहीं आया कि क्या किया जाए। राहुल-अखिलेश की कूटनीति और आक्रमकता के जाल में बीजेपी ऐसी फंसी की राजनीतिक गोल खा गयी। छात्रों की जंग की कमान राहुल-अखिलेश ने अपने हाथों में लेकर पीएम मोदी और उनकी टीम की रणनीति की ऐसी हवा निकाल दी जिसकी भरपाई के लिए लिए आज भाजपा, कांग्रेस/सपा के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो गयी। नीट पेपर लीक का पूरा नैरेटिव राहुल-अखिलेश ने ऐसा गढ़ा कि पीएम मोदी और सरकार को नहीं सूझ रहा कि क्या जवाब दिया जाए।

पलटवार की तैयारी में बीजेपी

राहुल-अखिलेश की रणनीति का एक अहम पहलू यह भी रहा कि विरोध केवल बयान तक सीमित न रहे। दोनों नेताओं की सड़क पर मौजूदगी और गिरफ्तारी की तस्वीरें की साझा भागीदारी ने विजुअल राजनीति को अंबुजा सीमेंट जैसा मजबूत कर दिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि छात्र मुद्दे पर विपक्ष साझा मंच पर खड़ा है। उधर भाजपा ने भी पलटवार की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ विरोध कार्यक्रमों का ऐलान किया है और आरोप लगाया है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। इससे साफ है कि अब लड़ाई केवल आरोप प्रत्यारोप की नहीं बल्कि जनता के सामने अपनी-अपनी राजनीतिक कहानी स्थापित करने की भी है। यही वजह है कि यह टकराव केवल एक दिन का विरोध प्रदर्शन नहीं माना जा रहा। यह उस बड़ी राजनीतिक जंग का हिस्सा है जिसमें दोनों पक्ष यह तय करना चाहते हैं कि छात्रों के मुद्दे पर जनता किसकी बात को अधिक विश्वसनीय मानती है। आने वाले दिनों में संसद सड़क और सोशल मीडिया—तीनों इस नैरेटिव की अगली लड़ाई के मैदान बनने वाले हैं।

सपा प्रमुख ने शिक्षा मंत्री पर किया करारा प्रहार

प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी को घसीटते हुए अपने साथ लेकर गई थी। देर रात पुलिस ने दोनों नेताओं को छोड़ दिया। अखिलेश यादव के आजाद होने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की गई है। वहीं अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। सपा की ओर से बताया गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ सभी सांसदों और नेताओं को छोड़ दिया गया है। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं से धरना खत्म करने की अपील की गई है जो पुलिस की कार्रवाई के बाद धरना प्रदर्शन कर रहे थे। रिहा होने के बाद अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों के साथ मारपीट हुई और उनके साथ पुलिस ने अन्याय किया है। नीट में ये लोग फेल हुए इसलिए अपना गुस्सा छात्रों पर निकाल रहे हैं। हमारी सरकार से मांग है कि छात्रों की मांगों को स्वीकार किया जाए और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री को न हटाए जाने के पीछे का दबाव समझ नहीं आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि घोटाले और भ्रष्टाचार का खुलासा न हो जाए इसलिए सरकार मंत्रियों पर दबाव नहीं बना पा रही है। विपक्ष लगातार इसी तरह संघर्ष करता रहेगा और युवा नौजवानों व छात्रों की बात करेगा। छात्रों के हक के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन बच्चों की जान गई संसद में उनके लिए श्रद्धांजलि भी नहीं दी जा सकी। सरकार जवाब देने से पीछे हट रही है। सरकार को इस मामले पर बयान देना चाहिए।

अस्पताल में सोनम वांगचुक से की जेपी नड्डा ने मुलाकात

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। वांगचुक को आगे के उपचार के लिए मंगलवार को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया था। केंद्रीय मंत्रियों की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब छात्र अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखे हुए हैं। उनके आंदोलन के बुधवार को 25 दिन पूरे हो रहे हैं। इससे पहले सोमवार को वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हस्तलिखित नोट में कहा था कि वह तब तक अपना अनशन जारी रखेंगे, जब तक प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती या उन्हें स्वयं अस्पताल में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई 10 एफआईआर दर्ज

दिल्ली पुलिस ने संसद तक के मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प के सिलसिले में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में ये एफआईआर दर्ज की गई हैं। फिलहाल मामलों की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में संसद मार्ग थाने में 4 एफआईआर और सीपी थाने में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थानों में एक-एक एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें से एक एफआईआर नई दिल्ली क्षेत्र में जो एक हाई-सिक्योरिटी जोन है संसद सत्र के दौरान बिना मंजूरी के ड्रोन उड़ाने से जुड़ी है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरएएफ जवान पर हुए हमले के मामले में भी एफआईआर दर्ज की गई है। वायरल वीडियो में कुछ लोग आरएएफ जवान को पीटते नजर आए। वे आरएएफ की गाड़ी पर पथराव और तोडफ़ोड़ भी करते दिखे। यह एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई हैं। साथ ही जांच टीमें उपद्रव के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। बताया गया कि कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए 250 से अधिक वीडियो की जांच की जा रही है। इनमें मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरे के विजुअल और पुलिस के बॉडी-वर्न कैमरों से ली गई फुटेज शामिल हैं।

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