आखिरकार झुकना ही पड़ा : छात्र संग्राम के दबाव में टूटी चुप्पी

  • अब डैमेज कंट्रोल की राह में सरकार
  • राहुल-अखिलेश ने छात्र आंदोलन को दी राजनीतिक धार
  • आधी रात के वीडियो के बाद तेज हुई इस्तीफे की मांग
  • वांगचुक का टूटा अनशन छात्रों से सवांद की शुरूआत
  • विपक्ष बोला- अब सिर्फ बयान नहीं जवाबदेही चाहिए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। किसानों के बाद छात्रों के आंदोलन ने भी सरकार को हठधर्मिता से हटकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। कई दिनों से सड़कों पर डटे छात्र संसद में लगातार हमलावर विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और बढ़ते जनदबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आखिर आधी रात वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। ऐसा तब हुआ जब पूरे देश में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठना शुरू हो गये थे। जिस बेरहमी से छात्रों को पीटा गया और पुलिस ने बदसलूकी की उन वीडियो को देखकर देश की जनता का गुस्सा सांतवे आसमान पर है। अब सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया लेकिन विपक्ष और धरना दे रहे छात्र सरकार से पूछ रहे हैं कि इस बात की क्या गारंटी है कि भव्ष्यि में पेपर लीक नहीं होगा। छात्र इसे समाधान नहीं बल्कि डैमेज कंट्रोल बता रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं रहा बल्कि सरकार की जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।

छात्रों ने बदल दिया राजनीति का एजेंडा

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि छात्र आंदोलन ने देश की राजनीति का एजेंडा बदल दिया है। अब बहस केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है सवाल जवाबदेही शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक विश्वसनीयता का भी है। सरकार अपनी घोषणाओं को समाधान बता रही है जबकि विपक्ष उन्हें देर से उठाया गया कदम मान रहा है। ऐसे में अंतिम फैसला जनता करेगी कि क्या यह निर्णायक कार्रवाई की शुरुआत है या फिर सिर्फ बढ़ते जनदबाव के बीच किया गया डैमेज कंट्रोल।

आक्रमाक अंदाज में चला विपक्ष

इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष ने अपनी सभी राजनीतिक चालें बेहद आक्रामक अंदाज में चलीं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने विरोध को केवल प्रेस कान्फ्रें स तक सीमित नहीं रखा। दोनों राजनेता सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हुए पुलिस कार्रवाई का सामना किया और प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर पूरे आंदोलन का राजनीतिक केंद्र बदल दिया। यही कारण है इस मुद्दे पर विपक्ष को पालिटिक्ल माइलेज मिलने के बाद सरकार दबाव में आयी और पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई होगी। लेकिन विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि मामला इतना गंभीर है तो शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही। राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दल लगातार यही मांग दोहरा रहे हैं कि केवल घोषणाएं नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सीमित विरोध बन गया जनआंदोलन

दिलचस्प बात यह है कि जिस आंदोलन को शुरुआती दिनों में सीमित विरोध माना जा रहा था वही अब संसद सड़क और सोशल मीडिया तीनों जगह राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है। एक ओर सरकार इसे कानून और व्यवस्था तथा सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के रूप में पेश कर रही है तो दूसरी ओर विपक्ष इसे जनता के दबाव में आई सरकार की प्रतिक्रिया बता रहा है। यही वजह है कि अब लड़ाई केवल पेपर लीक की नहीं बल्कि राजनीतिक नैरेटिव की भी बन गई है। बीजेपी भी अब पूरी तरह पलटवार के मोड में दिखाई दे रही है। पार्टी ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। यानी अब मुकाबला केवल संसद के भीतर नहीं रहेगा बल्कि सड़कों और जनसभाओं में भी तेज होगा।

फेरबदल की शुरूआत बदले गये उच्च शिक्षा सचिव

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और अनियमितताओं खासकर नीट से जुड़े विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। नियुक्ति समिति ने राजस्थान कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की विश्वसनीयता को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और व्यापक सुधारों की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना हालिया परीक्षा विवादों से प्रभावित छात्रों का भरोसा बहाल करना और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना शामिल हो सकता है।

पीएम मोदी का बयान पेपर लीक पर महज एक पट्टी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने देशभर में नीट परीक्षा के पेपर लीक को लेकर बढ़ते जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडिया संदेश पर अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में प्रधानमंत्री की घोषणा के समय और तरीके पर सवाल उठाते हुए तीखी आलोचना की। पार्टी ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में इस मुद्दे पर बोलने या प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सीधे संवाद करने के बजाय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बयान जारी किया है। संपादकीय में कहा गया कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पिछले महीनों से नई दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग को लेकर पुलिस की लाठीचार्ज का भी सामना करना पड़ा है।

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