संसद में परीक्षा सुधार का दांव पार्टी के भीतर सुलगते सवाल

  • सोशल मीडिया पर तरह-तरह के पोस्ट अपनों को तवज्जो न मिलने के शिकायत
  • संसद में आज पेश हो रहा है अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026
  • विपक्षी सांसदों ने छात्रों की पिटाई के मामले में दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में समय कभी-कभी घड़ी से नहीं घटनाओं से चलता है। कल तक जिस मुद्दे पर सरकार बचाव की मुद्रा में दिखायी दे रही थी आज उसी मुद्दे पर संसद में सुधार का रोडमैप लेकर उतरी है। आज सरकार ने लोक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को पटल पर पेश किया है। इस विघेयक को चर्चा के बाद पारित किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि देर शाम तक इस विधेयक पर चर्चा होगी। इस बिल का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली के खिलाफ कानूनी व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाना है। राजनीति की भाषा में इसे डैमेज कंट्रोल कहा जा रहा है। प्रशासन की भाषा में सुधार की शुरुआत और विपक्ष की भाषा में जनदबाव का परिणाम। लेकिन इतना तय है कि शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अब केवल एक मंत्री के इस्तीफे या फिर एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। सरकार का संदेश साफ है कि व्यवस्था सुधरेगी जवाबदेही तय होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून और कड़ा होगा। सत्ता पक्ष इसे निर्णायक पहल बता रहा है। लेकिन राजनीति का स्वभाव यह है कि कोई भी फैसला केवल अपने शब्दों से नहीं उसके समय से भी परखा जाता है। और यहीं से बहस शुरू होती है। विपक्ष कह रहा है कि यदि दबाव न बनता तो सुधारों की यह गति शायद इतनी तेज नहीं होती। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि सुधार किसी राजनीतिक दबाव का नहीं संस्थागत आवश्यकता का परिणाम हैं। इन दो दावों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि कौन सही है बल्कि यह कि क्या अब परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा पहले जैसा लौट सकेगा? यह तो रहा सिक्के का एक पहलू सिक्के का दूसरा पहलू भी जोर शोर से उपर उठने के तैयारी मे हैं और वह सरकार को बेचैन करने के लिए काफी है।

सांसदों ने दिया संसद में स्थगन प्रस्ताव नोटिस

विपक्षी सांसदों ने आज लोकसभा और राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर 2० जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की मांग की। यह नोटिस 20 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित बड़े पैमाने पर संसद चलो प्रदर्शन के बाद दिए गए हैं। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसमें सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया था। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने लोकसभा में अलग-अलग स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग पर चर्चा की मांग की। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन सहित अत्यधिक और घातक बल का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ के दृष्टि खोने की आशंका भी जताई गई है। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की मांग की। डीएमके सांसद टीआर बालू ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर नीट पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित रूप से घातक हथियारों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की।

सुधार का प्रथम कदम संसद में बिल पेश

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पेश किया। यह कदम नीट पेपर लीक के खिलाफ कई सप्ताह तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। शून्यकाल के दौरान सदन में जारी विपक्ष सदस्यों के हंगामे के बीच मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने सदन की मेज थपथपाते हुए अपना समर्थन दिया। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने विधेयक पर संशोधन प्रस्तुत करने के लिए दोपहर एक बजे तक का समय निर्धारित किया। स्पीकर ओम बिरला ने कहा यह महत्वपूर्ण विधेयक है। इससे सदन और देश की मंशाओं पर व्यापक चर्चा होगी। सभी दल के लोग इस विषय पर बहुत दिनों से मांग कर रहे थे। ये सुधार का प्रथम कदम है। स्पीकर ने आगे कहा कि मैं सोचता हूं कि सदन में इस विधेयक पर चर्चा हो। सभी इस पर अपने मत व्यक्त करें ताकि किस तरीके से हम देश के अंदर पेपर लीक को रोकने का एक समुचित कदम उठा सकें। इसी बीच विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा बरकरार रहा। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सदस्यों से अनुरोध करते हुए कहा इस विषय पर बोलने का आपको (विपक्षी सदस्यों को) बोलने का पर्याप्त समय दिया जाएगा। सदन की जितनी सहमति होगी उतना समय इस विधेयक पर चर्चा के लिए दिया जाएगा। मेरा आग्रह है कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन का सहयोग करें और चर्चा करें।

इस्तीफे के विरोध में विरोध के स्वर

भारतीय राजनीति में संकट केवल विपक्ष से नहीं आते और कभी-कभी वह सवाल जो समर्थकों के बीच से भी उठते उनके उत्तर कठिन होते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया हो या फिर वैचारिक संगठन और लोगों के निजी एकांउट। ज्यादातर जगहों पर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का विरोध हो रहा है और कहा जा रहा है कि उनका इस्तीफा नहीं होना चाहिए था। लोग इस स्थिति के लिए अपनो को सरकार के भीतर नजरअंदाजी का कारण बता रहा है और उनका कहना है कि दिल्ली को हाईजैक कर इस्तीफा कराया गया जोकि गलत है। हालांकि अपनो का गुस्सा अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर है और देखने वाली बात यह होती है कि सरकार इससे कैसे निबटेगी।

सांसदों ने सरकार पर लगाया आरोप कानून के नाम पर छात्रों को सरकार कर रही गुमराह

मॉनसून सत्र में आज सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने सरकार पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार करने, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी और गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की भी मांग दोहराई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सूचना की अभी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि इसकी पुष्टि ही नहीं हुई है, तो फिर इस पर बहस का क्या औचित्य है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सार्वजनिक परीक्षाओं संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले भी इस विषय पर कानून बना चुकी है। उन्होंने पूछा कि यदि पहले के कानून पर्याप्त थे, तो नए संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और सवाल किया कि क्या सरकार को पढ़े-लिखे छात्रों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा था। यदि सरकार वास्तव में कार्रवाई करना चाहती, तो अब तक जांच एजेंसियां ठोस नतीजे सामने ला चुकी होतीं। झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक पर गंभीर चर्चा चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के आश्वासन देती रही है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए विपक्ष की राय लेकर कानून बनाया जाना चाहिए। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में पैलेट गन से कई राउंड फायरिंग हुई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई क्यों की गई।

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