खतरे में अमित शाह की कुर्सी, राहुल के समर्थन में आये राउत और दीपके मांग लिया इस्तीफा

राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और सवाल किया कि वह संसद में आने से और इस मामले पर सफाई देने से क्यों डरे हुए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक बार फिर भाजपा के लिए मुश्किलों भरा दौर शुरू हो गया है। भले ही केंद्र में भाजपा की सरकार हो लेकिन विपक्ष ने भाजपा की नाक में दम कर रखा है।

विपक्ष छात्रों पर हुए अत्याचार को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह से सवाल दाग रहा है। दरअसल 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस का बल प्रयोग एक बड़ा विवाद बन गया है। उस दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र इकट्ठा हुए थे।

वे परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और संसद की तरफ मार्च निकालना चाहते थे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण शुरू हुआ, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, पानी की बौछार और पैलेट गन का इस्तेमाल किया। कई छात्र घायल हो गए। यह घटना पूरे दिन चली और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई।

कांग्रेस ने इस पर गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई बहुत ज्यादा और बर्बर थी। उन्होंने इसे छात्रों पर अत्याचार बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा कि पैलेट गन और इतनी सख्ती का आदेश किसने दिया। उन्होंने अमित शाह से जवाब मांगा और जवाबदेही तय करने की मांग की।

भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस के अनुसार, छात्र सिर्फ अपनी पढ़ाई और भविष्य के लिए लड़ रहे थे। उनके ऊपर इस तरह बल प्रयोग करना गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पुलिस ने IYC दफ्तर के पास पत्थरों से भरा ट्रक खड़ा किया था, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और सवाल किया कि वह संसद में आने से और इस मामले पर सफाई देने से क्यों डरे हुए हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह दावा भी किया कि गृह मंत्री के इस रुख से अपराधबोध दिखाई देता है। राहुल गांधी ने X पर पोस्ट में कहा कि छात्र न्याय के हकदार हैं और उनके साथ प्रदर्शन के दौरान हुई कथित बर्बरता की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, छात्र न्याय के हकदार हैं। एक दिन पहले राहुल गांधी ने कहा था कि दिल्ली में छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं और उन्हें पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

वहीं राहुल गांधी की इस मांग के बाद अन्य लोगों का भी समर्थन आ रहा है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने राहुल गांधी की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘अमित शाह को निश्चित रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए.’

सीजेपी चीफ ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया होगा. दीपके ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और न्यायपालिका समेत कई संस्थानों पर सवाल उठाए.

उन्होंने ये टिप्पणियां छत्रपति संभाजीनगर में अपने घर लौटने के बाद कीं. अभिजीत दीपके ने कहा, ‘अमित शाह को निश्चित रूप से इस्तीफा देना चाहिए. एक और बात कही जा रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी को बाहर से चंदा मिल रहा है या आंदोलन को बाहर से चलाया जा रहा है. अगर ऐसा है तो यह अमित शाह जैसे व्यक्ति की विफलता को दर्शाता है. अगर CJP को बाहर से चलाया जा रहा है तो वह किस तरह के ‘चाणक्य हैं? 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश अमित शाह ने ही जारी किया होगा, किसी और ने नहीं.’

न सिर्फ अभिजीत दीपके बल्कि इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त करने की मांग की. इस पर शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी का गृहमंत्री अमित शाह पर जो अटैक है, उसमें गलत क्या है. राहुल गांधी देश की भावना को व्यक्त कर रहे हैं. अमित शाह का इस्तीफा तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था. संजय राउत ने कहा, “उनका इस्तीफा तो बहुत पहले होना चाहिए था. जब पुलवाला हुआ था, 40 जवानों आरडीएक्स से मारा गया, किसकी जिम्मेदारी है?

पहलगाम में हमारे टूरिस्ट को मारा गया. किसकी जिम्मेदारी है, गृहमंत्री की है न? आप उनको क्यों बचाते हो? अभी जंतर मंतर पर जिस तरीके बच्चों के आंदोलन को क्रूता से खत्म करने की कोशिश की गई, गोलियां-पैलेट गन चलाई गईं, संसद मार्ग की जनरल पुलिस डायरी में उसका रिकॉर्ड है पूरा, जिम्मेदारी अमित शाह जी की है.” इसके आगे उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राहुल जी ने जो इस्तीफा मांगा है, ये सिर्फ उनकी मांग नहीं है, मैं मानता हूं कि देश के पूरे युवाओं की मांग की है.”

उन्होंने आगे कहा, ”सदन में बहुत से ऐसे नेता बैठे हैं, जिनकी राजनीति की शुरूआत छात्र आंदोलन से हुई है. मुझे आश्चर्य और दुख भी है कि किसी को नहीं लगा कि जो बच्चे लाठी खा रहे हैं, अनशन चल रहा है, उनके साथ जाकर बैठें और संवेदना व्यक्त करें, उनको थोड़ा सा समझाएं. हमेशा यहां इमरजेंसी की बात होती है. इमरजेंसी की शुरूआत छात्र आंदोलन से हुई थी. बिहार में हुई और फिर गुजरात में हुई. तो आपलोग छात्र आंदोलन से इतने डरते क्यों हैं?”

इसके साथ ही राज्यसभा सांसद राउत ने ये भी कहा, ”एक आंदोलन इस देश में हुआ है, बच्चों की मांग है कि इस देश की शिक्षा व्यवस्था में जो भ्रष्टाचार है वो खत्म हो लेकिन प्रधानमंत्री डर गए, गृहमंत्री डर गए. मैं तो एक फिल्म बनाने वाला हूं ‘लापता गृहमंत्री’. कहां हैं गृहमंत्री? हर बात पर जो बयान देते हैं, हर बात का जो क्रेडिट लेते हैं. इतना बड़ा आंदोलन हो गया, बच्चों पर लाठीचार्ज हो गया, पैलेट गन चल गई लेकिन गृहमंत्री का एक बयान तक नहीं आया है. प्रधानमंत्री रात को 12 बजे बयान देते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, ”पेपर लीक के मामले में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में लोग पकड़े गए. कई जो पकड़े गए हैं वो बीजेपी के सदस्य हैं. नीट का एग्जाम सिर्फ एक परीक्षा नहीं है बल्कि उनके जीवन और भविष्य का निर्णय करने वाली व्यवस्था है. अगर ये व्यवस्था सरकार के सिस्टम की असफलता से बर्बाद हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी पड़ेगी.” एंटी पेपर लीक को लेकर लाए गए बिल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ”नए कानून में क्या है? यह वही पुराना कानून है.

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने X पर कहा कि बीजेपी के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं। पहला- अमित शाह का साथ देना और छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करना और इसकी राजनीतिक कीमत चुकाना। दूसरी- अमित शाह को हटाना और किसी हद तक अपनी साख बचाना। यह कोई बहुत मुश्किल स्थिति नहीं है। इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।

वहीं इस मामले पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों में कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी थे। फेशियल रिकग्निशन से सैकड़ों ऐसे लोगों की पहचान हुई। पुलिस ने दावा किया कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देते लेकिन जब मार्च संसद की तरफ बढ़ा तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था।

गृह मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई बड़ा बयान नहीं दिया है, लेकिन बीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई की और कहा कि 18 साल से कम उम्र के छात्रों को रिहा किया जाए जिन पर कोई आपराधिक केस न हो। अदालत ने पुलिस कार्रवाई की जांच की भी बात कही।

कुलमिलाकर दोस्तों यह प्रदर्शन सिर्फ NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं था। यह युवाओं की नाराजगी, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल और बेरोजगारी जैसी बड़ी समस्याओं को दिखाता है। कई राज्यों में भी समर्थन में प्रदर्शन हुए।

विपक्ष इसे मोदी सरकार की छात्र-विरोधी नीति बता रहा है। वहीं सरकार कहती है कि विपक्ष राजनीतिक फायदा उठा रहा है। गौरतलब है कि यह मामला इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना ये होगा कि शाह के इस्तीफे को लेकर विपक्ष और जनता किस तरह का आंदोलन करती है।

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