जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामला: आखिर क्यों उठी CJI सूर्यकांत से केस अलग करने की मांग?

जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत से अलग बेंच को भेजने की मांग उठी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत से अलग बेंच को भेजने की मांग उठी है.

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने सीजेआई को पत्र लिखकर कहा है कि सीजेआई की टिप्पणी से ही सीजेपी का उदय हुआ, जिसके प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज हुआ. ऐसे में सीजेआई को इस मामले की सुनवाई किसी और बेंच को देनी चाहिए.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच कर रही है, लेकिन अब इस मामले को सीजेआई सूर्यकांत से दूसरी बेंच को भेजने की मांग उठी है.

सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील शिव कुमार त्रिपाठी ने सीजेआई को एक पत्र लिखा है और कहा है कि सीजेआई की टिप्पणी से ही कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) का जन्म हुआ था और उसी के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज हुआ. ऐसे में सीजेआई को इस मामले को अन्य बेंच को सुनवाई के लिए भेजना चाहिए, ताकि सिर्फ न्याय हो नहीं, बल्कि होता हुए दिखे भी.

दरअसल, सीजेपी की शुरुआत मई 2026 में CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई थी, जिसने नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन किया था या यूं कहें कि प्रदर्शनकारी छात्रों का नेतृत्व किया था. सीजेपी ने ही 20 जुलाई को संसद मार्च निकाला था और इस दौरान हजारों प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ चले थे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था.

पैलेट गन का भी इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग

वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया था, जो एक घातक हथियार माना जाता है. बीते गुरुवार को घातक हथियारों (पैलेट गन) पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों और पुलिस द्वारा पैलेट गन का उपयोग ‘असाधारण परिस्थितियों में’ करने की अनुमति है.

यह याचिका सूचना विभाग के पूर्व विशेष निदेशक और केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) यशोवर्धन आजाद ने दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने और 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

वहीं, इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी. याचिकाकर्ता ने प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिक सभाओं को तितर-बितर करने के लिए पंप एक्शन राइफलों या प्रोजेक्टाइल एक्शन गन से दागे जाने वाले पूर्णतः या आंशिक रूप से पैलेट (छर्रों) के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने की भी मांग की थी, जिसपर अदालत ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति है और जब तक इसके उपयोग के नियमों में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक इसे अवैध नहीं माना जा सकता.

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