मनोज सोरठिया का BJP पर बड़ा हमला, कहा- आदिवासियों का भला BJP में नहीं
आम आदमी पार्टी के नेता मनोज सोरठिया ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि आदिवासियों का हित बीजेपी में सुरक्षित नहीं है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आप नेता मनोज सोरठिया ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी में बने रहने से आदिवासी समाज का भला नहीं हो सकता.. उन्होंने दावा किया कि वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा बीजेपी सांसद मनसुखभाई वसावा के साथ किया गया.. व्यवहार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आदिवासी क्षेत्रों में किस प्रकार सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है.. मनोज सोरठिया ने कहा कि यदि एक सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है.. तो आम आदिवासी नागरिकों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.. उनके अनुसार यह घटना केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है.. बल्कि आदिवासी समाज के साथ हो रहे कथित अन्याय, प्रशासनिक रवैये और व्यवस्था की कार्यशैली को भी उजागर करती है..
और उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व एक जनप्रतिनिधि करता है.. उसी क्षेत्र में यदि उसे भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिलता.. तो सामान्य नागरिकों की परेशानियों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.. उनके अनुसार आदिवासी समाज लंबे समय से अपने अधिकारों, सम्मान.. और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है.. इसके बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है..
मनोज सोरठिया ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा लगातार आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं.. उन्होंने जंगल, जमीन और जल जैसे मूलभूत मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी है.. और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उठाया है.. हालांकि, उस समय बीजेपी ने उनके मुद्दों को राजनीतिक बताकर खारिज करने की कोशिश की थी.. लेकिन आज जो घटनाएं सामने आ रही हैं.. वे इस बात की ओर संकेत करती हैं कि चैतर वसावा जिन मुद्दों को लगातार उठाते रहे, वे निराधार नहीं थे..
उनके अनुसार वर्तमान परिस्थितियां यह साबित करती हैं कि आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.. उन्होंने कहा कि समय के साथ यह स्पष्ट होता जा रहा है कि.. जिन समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था.. वे वास्तव में ज़मीनी स्तर पर मौजूद थी.. इसलिए अब उन मुद्दों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है..
मनोज सोरठिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की नीतियां आदिवासी समाज के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में विफल रही हैं.. उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आज भी अपने संवैधानिक.. और कानूनी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.. कई मामलों में उन्हें प्रशासनिक दबाव, उपेक्षा.. और कथित अन्याय का सामना करना पड़ता है.. उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है.. और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए.. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अब संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी होगी.. उनका मानना है कि जब तक समाज एकजुट होकर अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रखेगा.. तब तक व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव संभव नहीं होगा.. उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की..
मनोज सोरठिया ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की एकजुटता.. और उसकी आवाज होती है.. यदि समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेगा.. और संगठित होकर अपनी बात रखेगा.. तो सरकार और प्रशासन को भी उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा.. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी ही सबसे बड़ा परिवर्तन ला सकती है.. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की नीतियां आदिवासी समाज के हितों के अनुरूप नहीं हैं.. उनके अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, भूमि अधिकार.. और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अनेक मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है.. उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में आदिवासी समाज के विकास के प्रति गंभीर होती.. तो इन समस्याओं का समाधान बहुत पहले हो जाना चाहिए था..



