तीन ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत, चंद्रलोक अस्पताल के डॉक्टर पर मुकदमा
पीलीभीत बाईपास स्थित चंद्रलोक अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि करीब 16 दिनों के भीतर मरीज के पैर के तीन ऑपरेशन किए गए, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बरेली में पैर के संक्रमण का इलाज कराने पहुंचे एक मरीज की मौत के बाद निजी अस्पताल की इलाज व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
पीलीभीत बाईपास स्थित चंद्रलोक अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि करीब 16 दिनों के भीतर मरीज के पैर के तीन ऑपरेशन किए गए, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर बारादरी पुलिस ने चंद्रलोक अस्पताल के डॉक्टर डॉ. हिमांशु अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, डॉक्टर ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है।
पैर में संक्रमण के बाद चंद्रलोक अस्पताल में कराया गया भर्ती
जानकारी के मुताबिक, इज्जतनगर क्षेत्र की आशुतोष सिटी निवासी अनूप कुमार डायबिटीज से पीड़ित थे। उनके पैर में संक्रमण होने के बाद परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए पीलीभीत बाईपास स्थित चंद्रलोक अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों के अनुसार, अनूप को 30 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनके पैर के ऑपरेशन किए। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में 1 जून, 6 जून और 14 जून को अनूप के पैर के तीन ऑपरेशन किए गए। परिवार का आरोप है कि इतने उपचार के बावजूद मरीज की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और बाद में उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
16 दिन के भीतर तीन ऑपरेशन कराने का आरोप
मृतक के भाई अरुण कुमार ने अस्पताल के इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मरीज के पैर में संक्रमण की समस्या के इलाज के दौरान लगातार ऑपरेशन किए गए, लेकिन उसकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती गई। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि उपचार के बाद अनूप की स्थिति बेहतर होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद अस्पताल में मरीज की भर्ती और डिस्चार्ज से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए।
डिस्चार्ज रिकॉर्ड को लेकर भी परिजनों ने उठाए सवाल
अरुण कुमार के मुताबिक, अस्पताल के रिकॉर्ड में उनके भाई अनूप को 18 जून को डिस्चार्ज दिखाया गया था। हालांकि, परिवार का आरोप है कि रिकॉर्ड में डिस्चार्ज की तारीख दर्ज होने के बावजूद मरीज को करीब दो दिन और अस्पताल में भर्ती रखा गया। परिजनों ने इस स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल से घर लाने के बाद अनूप की तबीयत दोबारा बिगड़ गई। हालत में सुधार नहीं होने पर परिवार ने उसे दूसरे अस्पताल में ले जाने का फैसला किया।
वेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत
परिजनों के मुताबिक, अनूप की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें वेदांता अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर बनी रही। काफी प्रयासों के बावजूद 26 जून को इलाज के दौरान अनूप कुमार की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद परिजनों ने चंद्रलोक अस्पताल में हुए इलाज और मरीज की मौत को लेकर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से शिकायत की।
सीएमओ कार्यालय में की गई शिकायत
अनूप की मौत के बाद परिजनों ने मामले की शिकायत सीएमओ कार्यालय में की। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। सीएमओ की समिति ने मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की। इसके बाद प्रकरण को विशेषज्ञ राय के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में मेडिकल विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि मरीज की उपचार प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
भाई की तहरीर पर डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा
मामले में अनूप के भाई अरुण कुमार ने पुलिस को तहरीर दी। तहरीर के आधार पर बारादरी पुलिस ने चंद्रलोक अस्पताल के डॉ. हिमांशु अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब अस्पताल में मरीज की भर्ती से लेकर उसके इलाज, ऑपरेशन, डिस्चार्ज और बाद में दूसरे अस्पताल में हुए उपचार से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि अस्पताल में मरीज का उपचार किस स्थिति में किया गया था और तीनों ऑपरेशन के पीछे चिकित्सकीय कारण क्या थे।
अस्पताल के दस्तावेजों की होगी जांच
जांच के दौरान पुलिस अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, भर्ती संबंधी दस्तावेज, ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड, दवाओं और उपचार की जानकारी तथा डिस्चार्ज से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में ले सकती है। इसके अलावा दूसरे अस्पताल में हुए इलाज से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड भी मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मरीज की मौत किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में हुई और उसके पैर के संक्रमण तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का मौत से क्या संबंध था।
डॉक्टर ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, चंद्रलोक अस्पताल के डॉक्टर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मरीज के इलाज और ऑपरेशन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं की गई। डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को भी गलत बताया है। उनका कहना है कि मरीज की स्थिति और उसके उपचार से संबंधित सभी तथ्यों की जांच होने के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। इस तरह मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक ओर जहां मृतक के परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डॉक्टर ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ राय पर टिकी जांच
मरीज की मौत के मामले में अब पुलिस जांच के साथ-साथ मेडिकल विशेषज्ञों की राय भी अहम होगी। तीन ऑपरेशन, मरीज की डायबिटीज की स्थिति, पैर में संक्रमण, बाद में बिगड़ी तबीयत और दूसरे अस्पताल में हुए इलाज समेत सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मरीज की मौत के लिए किसी चिकित्सकीय लापरवाही की भूमिका थी या उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति इसके पीछे वजह बनी।
पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच
फिलहाल बारादरी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पताल और अन्य संबंधित स्थानों से इलाज से जुड़े दस्तावेज जुटाने के साथ ही परिजनों के बयान और मेडिकल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
बरेली में मरीज की मौत से जुड़े इस मामले में अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की नजर है। परिजन जहां अस्पताल के उपचार पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं डॉक्टर ने किसी भी तरह की लापरवाही से साफ इनकार किया है। ऐसे में मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, ऑपरेशन रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की राय यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि उपचार में निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
रिपोर्ट:-सुनील सक्सेना, बरेली



