E20 पर AAP का सरकार पर बड़ा वार, टाउन हॉल की अनुमति रद्द

सूरत में E20 नीति को लेकर AAP ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया... E20 के मुद्दे पर आयोजित टाउन हॉल मीटिंग की वेन्यू अनुमति... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आम आदमी पार्टी गुजरात ने केंद्र सरकार की E20 नीति के खिलाफ जनता के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए सूरत में एक टाउन हॉल मीटिंग का आयोजन किया था.. इस कार्यक्रम में E20 पेट्रोल से जुड़े मुद्दों.. आम वाहन मालिकों की परेशानियों और पुरानी गाड़ियों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जानी थी.. लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले ही टाउन हॉल के लिए दी गई अनुमति अचानक रद्द कर दी गई..

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को रोकने के लिए जानबूझकर अनुमति रद्द की गई.. हालांकि, अनुमति रद्द होने के बावजूद पार्टी के नेता पीछे नहीं हटे.. AAP गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, विधायक गोपाल इटालिया.. और राज्य संगठन महासचिव मनोज सोरठिया हॉल के बाहर ही पहुंचे.. और वहीं खड़े होकर E20 नीति के खिलाफ अपनी बात जनता के सामने रखी.. नेताओं ने सरकार पर दबाव बनाने और विरोध की आवाज को रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि हॉल बंद होने से उनकी लड़ाई बंद नहीं होगी..

E20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है.. केंद्र सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है.. सरकार का कहना है कि इससे भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी.. विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा.. और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी.. सरकार के अनुसार, देश ने 2025-26 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है.. जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक हासिल करने की योजना थी.. सरकार का तर्क है कि E20 नीति अचानक लागू नहीं की गई.. बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया है.. वर्ष 2001 से इथेनॉल ब्लेंडिंग के प्रयोग शुरू किए गए और समय के साथ पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई गई..

लेकिन दूसरी तरफ E20 को लेकर आम लोगों और विपक्षी दलों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं.. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सरकार लोगों को उनकी जरूरत.. और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने का पर्याप्त विकल्प नहीं दे रही है.. पार्टी का कहना है कि खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं.. AAP का दावा है कि पुरानी गाड़ियों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में कमी आ सकती है.. इसके अलावा, पार्टी के अनुसार कुछ वाहन मालिकों ने इंजन के प्रदर्शन, फ्यूल सिस्टम.. और सर्विसिंग से जुड़ी परेशानियों की शिकायत भी की है.. वाहन मालिकों का एक वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि अगर पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है.. तो फिर ईंधन की कीमतों में उसी अनुपात में राहत क्यों नहीं दी जा रही है..

हालांकि इन दावों को लेकर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है.. केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल क्षेत्र का पक्ष है कि E20 के अनुरूप बनाए गए नए वाहनों में इस ईंधन का इस्तेमाल सुरक्षित है.. सरकार के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद बाजार में आए नए वाहनों को E20 के अनुकूल बनाया गया है.. वहीं पुराने वाहनों के मामले में वाहन की उम्र, इंजन तकनीक.. और निर्माता की सिफारिश जैसे कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं.. सरकार का यह भी कहना है कि E20 से माइलेज में कुछ कमी हो सकती है.. लेकिन इसके बदले देश को ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरणीय लाभ मिल सकते हैं.. सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को भी फायदा हो रहा है.. क्योंकि गन्ने और मक्का जैसी फसलों से तैयार होने वाले इथेनॉल के लिए बाजार का विस्तार हुआ है..

लेकिन आम आदमी पार्टी और कुछ विशेषज्ञ इस नीति के दूसरे पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं.. इनमें पानी की खपत, खाद्य फसलों का इस्तेमाल, किसानों को मिलने वाला वास्तविक लाभ.. और पुराने वाहनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं.. इसी मुद्दे को जनता के बीच ले जाने के लिए AAP गुजरात ने सूरत के सरथाना स्थित SMC कम्युनिटी हॉल में टाउन हॉल मीटिंग आयोजित करने की योजना बनाई थी.. पार्टी की योजना थी कि इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों की मौजूदगी में E20 नीति पर चर्चा की जाए.. और जनता को इसके संभावित फायदे और नुकसान के बारे में जानकारी दी जाए..

कार्यक्रम में खास तौर पर माइलेज में संभावित कमी, बार-बार सर्विसिंग की जरूरत, पुराने वाहनों के इंजन.. और फ्यूल सिस्टम पर प्रभाव तथा कम इथेनॉल या शुद्ध पेट्रोल के विकल्प जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी थी.. लेकिन 9 अगस्त 2026 को होने वाले इस कार्यक्रम से पहले ही हॉल की अनुमति रद्द कर दी गई.. AAP ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सवाल उठाया कि अगर सरकार को अपनी नीति पर पूरा भरोसा है.. तो फिर E20 पर सार्वजनिक चर्चा से डरने की जरूरत क्यों पड़ रही है.. पार्टी का आरोप है कि जनता के बीच इस मुद्दे पर चर्चा को रोकने के लिए प्रशासनिक दबाव का इस्तेमाल किया गया..

 

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