आदिवासी किसानों के साथ धरने पर BJP सांसद मनसुख वसावा, सरकार को घेरा

नर्मदा में वन भूमि विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है... आदिवासी किसानों के साथ धरने पर बैठे BJP सांसद मनसुख वसावा ने सरकार के... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के नर्मदा जिले में वन भूमि पर खेती करने के अधिकार को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है.. विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर यह विवाद उस समय.. और गरमा गया, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनसुख वसावा.. और नंदोद की विधायक दर्शनाबेन देशमुख आदिवासी किसानों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचीं.. और उनके साथ बैठकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं.. मामला नर्मदा जिले के खोपी गांव और उसके आसपास के इलाकों से जुड़ा है.. जहां पिछले कुछ दिनों से आदिवासी किसान वन भूमि पर खेती करने की अनुमति.. और अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.. इस विरोध प्रदर्शन में खोपी समेत आसपास के करीब 11 गांवों के आदिवासी किसान शामिल बताए जा रहे हैं.. किसानों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से वन भूमि पर खेती करने के मामले में अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग रवैया अपनाया जा रहा है..

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सूरत जिले के उमरपाड़ा तालुका में आदिवासी किसानों को वन भूमि पर खेती करने की अनुमति दी जा रही है.. जबकि नर्मदा जिले की सीमा से जुड़े करीब 12 गांवों के किसानों को कथित तौर पर इसी तरह की जमीन पर खेती करने से रोका जा रहा है.. किसानों का आरोप है कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है.. और वन विभाग की कार्रवाई एक समान नहीं है..

इसी कथित भेदभाव को लेकर स्थानीय किसानों और वन विभाग के बीच पिछले कुछ दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई है.. किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से जमीन और खेती से जुड़े अपने अधिकारों को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखते आए हैं.. लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई.. इसके बाद विरोध प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ.. और मामला धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता चला गया.. हालात उस समय और गंभीर हो गए.. जब करीब दो दिन पहले खोपी गांव में एक जनसभा आयोजित की गई.. इस सभा में बीजेपी सांसद मनसुख वसावा और नंदोद की विधायक दर्शनाबेन देशमुख भी मौजूद थी.. बताया जा रहा है कि बैठक में बड़ी संख्या में आदिवासी किसान शामिल हुए.. और उन्होंने वन भूमि पर खेती करने से रोके जाने को लेकर अपनी शिकायतें नेताओं के सामने रखी..

इस दौरान मनसुख वसावा ने कथित तौर पर आदिवासी किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की अपील की.. उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन के रास्ते पर चलने की बात कही.. और किसानों से अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया.. इसके बाद शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान विवादित वन भूमि की ओर पहुंचे.. किसानों का उद्देश्य वहां खेती शुरू करना बताया गया.. हालांकि, प्रदर्शनकारियों के अनुसार.. मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें खेती करने से रोकने की कोशिश की.. इसी दौरान किसानों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच कथित तौर पर विवाद और झड़प की स्थिति पैदा हो गई..

वहीं इस टकराव के बाद किसानों में नाराजगी और बढ़ गई.. विरोध में शामिल किसानों ने उसी स्थान पर धरना शुरू कर दिया.. बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में किसान पूरी रात मौके पर डटे रहे.. उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट और ठोस कार्रवाई नहीं की जाती.. तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे.. वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी सांसद मनसुख वसावा ने सूरत के कलेक्टर को पत्र भी लिखा.. पत्र के माध्यम से उन्होंने वन भूमि को लेकर पैदा हुए विवाद और आदिवासी किसानों की शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की.. वसावा ने प्रशासन से किसानों की समस्याओं का समाधान करने और पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच कराने की मांग उठाई..

इसी बीच विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर मनसुख वसावा और नंदोद की विधायक दर्शनाबेन देशमुख एक बार फिर खोपी गांव के विवादित स्थल पर पहुंचीं.. दोनों नेता वहां मौजूद आदिवासी किसानों के साथ धरने पर बैठ गए.. बीजेपी के इन दोनों नेताओं का किसानों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचना इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू बन गया है.. एक तरफ आदिवासी किसान वन भूमि पर खेती के अधिकार की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.. तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ बीजेपी के ही सांसद और विधायक उनके साथ धरने पर बैठ गए हैं.. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर वन भूमि के इस विवाद को लेकर सरकार.. और उसके स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच स्थिति क्या है..

 

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