पालघर में बार-बार क्यों आ रहे भूकंप? 21 जुलाई से अब तक महसूस किए गए 6 झटके
पालघर में 21 जुलाई से 6 भूकंप आ चुके हैं, जबकि नवंबर 2018 से हजारों छोटे झटके दर्ज हुए हैं. आखिर मानसून, फॉल्ट और अर्थक्वेक स्वार्म से बार-बार क्यों कांप रही है जमीन?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पालघर में 21 जुलाई से 6 भूकंप आ चुके हैं, जबकि नवंबर 2018 से हजारों छोटे झटके दर्ज हुए हैं. आखिर मानसून, फॉल्ट और अर्थक्वेक स्वार्म से बार-बार क्यों कांप रही है जमीन?
महाराष्ट्र के तटीय जिले पालघर में सोमवार रात एक घंटे के भीतर 3.4 तीव्रता के दो भूकंप दर्ज किए गए. पहला झटका रात 10:04 बजे आया, जबकि दूसरा रात 11 बजे महसूस किया गया. दोनों झटकों की तीव्रता समान थी. यह कोई इकलौती घटना नहीं है. बीते 21 जुलाई से लेकर अब तक इलाके में 6 झटके महसूस किए जा चुके हैं, जबकि पिछले महीने में ही 3 झटके दर्ज किए गए थे.
पालघर में यह सिलसिला पिछले कुछ हफ्तों से नहीं, बल्कि नवंबर 2018 से लगातार जारी है, जहां अब तक हजारों छोटे और कम तीव्रता के झटके (माइक्रो अर्थक्वेक) आ चुके हैं. पालघर मुंबई से महज 100 किमी की दूरी पर स्थित है. लेकिन आखिर पालघर की जमीन के नीचे ऐसा क्या चल रहा है?
1. अब तक पालघर में कितने झटके लगे?
साइंटिफिक स्टडी के मुताबिक, नवंबर 2018 के बाद से पालघर जिले और इसके आसपास के इलाकों में हजारों छोटे-बड़े झटके आ चुके हैं. इनमें से अधिकांश झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 1.5 से 3.8 के बीच रही है. अंतरराष्ट्रीय जर्नल साइंसडायरेक्ट में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, पालघर में दिसंबर 2018 और मई 2024 के बीच 10,000 से ज्यादा छोटे भूकंप (4.1 तीव्रता से कम या बराबर) दर्ज किए जा चुके हैं.
2. पालघर किस प्लेट पर स्थित है?
भू-वैज्ञानिक दृष्टि से पालघर भारतीय प्लेट पर स्थित है. भारतीय प्लेट लगातार उत्तर-पूर्व दिशा की ओर खिसक रही है और एशियाई प्लेट से टकरा रही है. पालघर जिला भारत के भूकंपीय क्षेत्र III (Seismic Zone III) के अंतर्गत आता है, जिसे मध्यम जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है. यह क्षेत्र भारतीय प्रायद्वीपीय ढाल के पश्चिमी तट और दक्कन ट्रैप की बेसाल्टिक चट्टानों की संरचना से ढका हुआ है.
3. यहां इतने झटके क्यों लग रहे हैं?
पालघर में आ रहे भूकंपों के पीछे मुख्य रूप से दो वैज्ञानिक कारण हैं.
अर्थक्वेक स्वार्म: जब किसी क्षेत्र में बिना किसी बड़े मुख्य भूकंप के एक ही स्थान पर लगातार छोटे-छोटे झटके आते रहते हैं, तो इसे ‘अर्थक्वेक स्वार्म’ कहा जाता है. पालघर नवंबर 2018 से इसी दौर से गुजर रहा है. हाइड्रो-सीस्मिसिटी/ मानसून का असर: वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून के दौरान बारिश का भारी पानी जमीन की ऊपरी परत से रिसाव करके नीचे पुरानी भूगर्भीय दरारों और भ्रंशों (फॉल्ट लाइंस) तक पहुंच जाता है. पानी के जमाव से चट्टानों के बीच द्रव दबाव बढ़ जाता है, जिससे दक्कन की बेसाल्ट चट्टानें आपस में फिसलने लगती हैं और कंपन पैदा होता है. यही कारण है कि बारिश के मौसम और उसके ठीक बाद पालघर में झटकों की संख्या बढ़ जाती है.
4. आगे क्या हो सकता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘स्वार्म’ जैसी गतिविधियों में जमीन के नीचे संचित ऊर्जा धीरे-धीरे छोटे झटकों के रूप में बाहर निकलती रहती है. इसलिए आने वाले समय में भी कम तीव्रता के झटके जारी रह सकते हैं.
अंतरराष्ट्रीय जर्नल साइंसडायरेक्ट में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, पालघर में लगातार आ रही इस सीस्मिक गतिविधि ने क्षेत्र के भूकंपीय खतरे का नए सिरे से सटीक मूल्यांकन करना अनिवार्य बना दिया है. स्टडी में 50 वर्षों में 10% और 2% संभावना के साथ पीक ग्राउंड एक्सीलरेशन (PGA) का प्रोबेबिलिस्टिक मूल्यांकन किया गया है, जो बताता है कि भले ही ये झटके अभी छोटे हैं, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है.
5. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
पालघर जिले की वर्तमान अनुमानित आबादी 30 से 35 लाख के बीच है. डहाणू, तलासरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग इन झटकों से सीधे प्रभावित होते हैं. जिले के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में पारंपरिक रूप से बने मिट्टी, ईंट और बिना पक्के बीम वाले मकान स्थित हैं. भले ही 3.0 से 3.5 तीव्रता का भूकंप भारी तबाही न मचाए, लेकिन लगातार हो रहे कंपन से इन मकानों की दीवारों में दरारें आ रही हैं, जिससे ढहने का खतरा बना रहता है. पालघर मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) से महज 100 किमी दूर है. यदि भविष्य में किसी बड़ी फॉल्ट लाइन के कारण अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो इसका असर पूरे तटीय महाराष्ट्र और मुंबई के घनी आबादी वाले ढांचों पर पड़ सकता है.
‘स्वार्म’ और ‘सामान्य भूकंप’ में अंतर
साधारण भूकंपों में एक बड़ा झटका आता है और उसके बाद छोटे आफ्टरशॉक आते हैं. इसके विपरीत, पालघर में हो रहा अर्थक्वेक स्वार्म बिना किसी बड़े झटके के महीनों या सालों तक सैकड़ों छोटे झटकों के रूप में जारी रहता है. पालघर और आसपास के तटीय जिलों में स्थानीय प्रशासन को तुरंत इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू करना चाहिए.



