किडनी में सालों से फंसी थी बड़ी पथरी, AIIMS गोरखपुर के डॉक्टरों ने दूरबीन से कर दिया बड़ा कमाल
AIIMS गोरखपुर में 39 वर्षीय महिला की लंबे समय से पथरी से क्षतिग्रस्त और लगभग निष्क्रिय किडनी को लेप्रोस्कोपिक नेफ्रेक्टॉमी से सफलतापूर्वक निकाला गया। मरीज की रिकवरी तेज रही।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: लंबे समय से किडनी में फंसी बड़ी पथरी किसी मरीज के लिए कितनी गंभीर समस्या बन सकती है, इसका एक जटिल मामला AIIMS गोरखपुर में सामने आया। यहां डॉक्टरों की टीम ने 39 वर्षीय महिला की लगभग निष्क्रिय हो चुकी किडनी को लेप्रोस्कोपिक नेफ्रेक्टॉमी यानी दूरबीन विधि से सफलतापूर्वक निकाल दिया। जटिल सर्जरी के बावजूद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई और उसकी स्थिति संतोषजनक बताई गई।
बड़ी पथरी ने किडनी को पहुंचाया गंभीर नुकसान
महिला लंबे समय से पेट में दर्द और गांठ की शिकायत से परेशान थीं। जनरल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार पीपल से परामर्श के बाद जांच कराई गई। CT स्कैन में किडनी काफी फैली हुई मिली, जबकि रीनल पेल्विस में लंबे समय से फंसी बड़ी पथरी के कारण किडनी को व्यापक नुकसान पहुंचा था। DTPA रीनल स्कैन में प्रभावित किडनी की कार्यक्षमता लगभग नगण्य पाई गई। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए क्षतिग्रस्त किडनी को निकालने का निर्णय लिया गया।
फाइब्रोसिस और चिपकाव के कारण चुनौतीपूर्ण था ऑपरेशन
पुरानी पथरी के कारण किडनी के आसपास सूजन, फाइब्रोसिस और आसपास के अंगों से चिपकाव होने की वजह से सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी। प्रमुख रक्त वाहिकाओं और आसपास के अंगों को सुरक्षित रखते हुए टीम ने दूरबीन विधि से सावधानीपूर्वक डिसेक्शन किया और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी डॉ. धर्मेंद्र कुमार पीपल ने की। टीम में डॉ. सलमान खान, डॉ. अमोघ जायसवाल, डॉ. राजेश और डॉ. निखिल शामिल रहे। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. भूपेंद्र सिंह ने संभाली। विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के मार्गदर्शन में नर्सिंग और OT टीम ने भी सहयोग किया।
छोटे चीरे से कम दर्द, मरीज की रिकवरी तेज
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में बड़े चीरे के बजाय छोटे चीरे किए जाते हैं। इससे सर्जिकल ट्रॉमा और ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द अपेक्षाकृत कम हो सकता है। हाई-डेफिनिशन कैमरे से अंदर की संरचनाओं का स्पष्ट दृश्य मिलने से जटिल डिसेक्शन में भी मदद मिलती है। AIIMS गोरखपुर के जनरल सर्जरी विभाग में हर्निया, पायलोप्लास्टी, फंडोप्लिकेशन, किडनी स्टोन और अन्य मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं। कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. विभा दत्ता ने सफल सर्जरी के लिए पूरी टीम को बधाई दी।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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