प्रवीण राम का बीजेपी पर बड़ा हमला, कहा- गुजरात में सत्ता परिवर्तन जरूरी
AAP गुजरात राज्य किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम ने किसानों की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा... उन्होंने कहा कि...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में किसानों से जुड़े मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है.. आम आदमी पार्टी गुजरात राज्य किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम ने किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर.. बीजेपी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.. उनका कहना है कि बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था.. लेकिन आज जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है..
प्रवीण राम का आरोप है कि किसानों की आय दोगुनी होने के बजाय खेती की लागत.. और किसानों का खर्च लगातार बढ़ता गया है.. किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर पहले से कहीं अधिक खर्च करना पड़ रहा है.. ऐसे में किसान अपनी मेहनत के बावजूद आर्थिक दबाव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं.. AAP किसान मोर्चा के अध्यक्ष प्रवीण राम ने गुजरात के किसानों की मासिक आय को लेकर भी एक आंकड़ा सामने रखा.. उनके मुताबिक गुजरात में किसानों की मासिक आय करीब 12,600 रुपये है.. वहीं, उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के तहत किसानों की मासिक आय करीब 26,700 रुपये है..
वहीं इन आंकड़ों को आधार बनाते हुए प्रवीण राम ने सवाल उठाया कि.. अगर किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था.. तो फिर गुजरात का किसान आज भी आर्थिक संकट से क्यों जूझ रहा है.. किसान की मेहनत बढ़ रही है.. खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन उसके हाथ में बचने वाली रकम पर्याप्त क्यों नहीं है.. प्रवीण राम ने कहा कि किसानों की समस्या केवल उनकी आमदनी तक सीमित नहीं है.. खेती की बढ़ती लागत भी आज किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी है.. खेत तैयार करने से लेकर फसल की बुवाई, सिंचाई, दवाइयों के छिड़काव, कटाई.. और फसल को बाजार तक पहुंचाने तक हर चरण में किसान को खर्च करना पड़ता है.. यदि फसल का उचित दाम नहीं मिलता.. तो किसान की पूरी मेहनत और निवेश पर असर पड़ता है..
वहीं उन्होंने बीजेपी सरकार के उस वादे पर भी सवाल उठाया.. जिसमें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही गई थी.. प्रवीण राम का कहना है कि किसानों को उम्मीद थी कि उनकी आमदनी बढ़ेगी.. खेती लाभ का साधन बनेगी और किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे.. लेकिन आज भी बड़ी संख्या में किसान अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और खेती के खर्च के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.. प्रवीण राम ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही थी.. उनकी आय और संपत्ति में तो बढ़ोतरी हुई है.. लेकिन किसान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया.. उन्होंने कहा कि सरकार और सत्ता में बैठे लोगों को किसानों के जीवन की वास्तविक परिस्थितियों को समझने की जरूरत है..
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.. वह गर्मी, सर्दी और बारिश की परवाह किए बिना खेत में मेहनत करता है.. प्राकृतिक आपदाओं, बाजार की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के बीच किसान अपनी फसल तैयार करता है.. इसके बावजूद यदि उसकी आमदनी पर्याप्त नहीं बढ़ती.. तो यह केवल किसान की नहीं बल्कि पूरी कृषि व्यवस्था की चिंता का विषय है..
AAP नेता ने गुजरात और पंजाब के बीच भी तुलना करते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार की नीतियों को बेहतर बताते हुए दावा किया कि पंजाब में किसानों को सरकार की.. ओर से कई सुविधाएं और राहत मिल रही हैं.. उनका कहना है कि पंजाब में किसानों की मासिक आय गुजरात के किसानों की तुलना में अधिक होने का दावा यह सवाल खड़ा करता है कि.. गुजरात में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं..
प्रवीण राम ने कहा कि किसानों के लिए केवल घोषणाएं और वादे पर्याप्त नहीं हैं.. किसान को ऐसी नीतियों की जरूरत है.. जिनसे उसकी वास्तविक आय बढ़े, खेती की लागत कम हो.. और उसकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित हो.. किसानों को समय पर बिजली, सिंचाई, खाद, बीज.. और अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाजार में उनकी फसल के लिए बेहतर मूल्य की व्यवस्था भी जरूरी है..
उन्होंने कहा कि किसान जब अपनी फसल लेकर बाजार में पहुंचता है.. तब उसे केवल उत्पादन की लागत ही नहीं बल्कि परिवहन, मजदूरी.. और अन्य खर्चों का भी सामना करना पड़ता है.. ऐसे में फसल का दाम यदि उसकी लागत और मेहनत के अनुरूप नहीं मिलता.. तो किसान के लिए खेती करना लगातार कठिन होता जाता है.. AAP किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि किसानों की आय को केवल कागजों पर बढ़ाने की बात करने से उनकी जिंदगी नहीं बदलेगी.. किसानों की वास्तविक स्थिति खेत और गांव में जाकर समझनी होगी.. सरकार को यह देखना होगा कि किसान के पास फसल बेचने के बाद वास्तव में कितनी रकम बचती है.. और उसकी आय तथा खर्च के बीच कितना अंतर है..
उन्होंने बीजेपी सरकार से किसानों के हित में स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि अगर किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया था.. तो सरकार को यह बताना चाहिए कि उस लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति हुई है.. किसानों की वर्तमान आय क्या है.. उनकी उत्पादन लागत कितनी बढ़ी है.. और सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए हैं.. इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने आना चाहिए..



