बच गये बादल सुलग गया पंजाब

- सुरक्षाकर्मी ने बचाई जान बादल को आयी मामूली चोट
- महाराष्ट्र के नांदेड़ में माता साहेब गुरुद्वारा के पास एक निहंग हमलावर ने कृपाण से बादल पर किया हमला
- घटनाएं अलग लेकिन सियासी मायने जुड़ते दिखायी दे रहे हैं
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भाजपा और अकाली दल के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलने की अटकलों के बीच सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र से आ रही है जहां माता साहिब गुरूद्वारे में दर्शन करने गये पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर निहंग के वेश में आये व्यक्ति ने कृपाण से हमला किया। हमले के बाद अफरा तफरी मच गयी। हमले के दौराना हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना से पंजाब की सियासत मे भूचाल आ गया है। वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा के चुनाव की तैयारियों के बीच बदलते सियासी समीकरण और इसी दौर में सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ के गुरुद्वारे में जानलेवा हमला। घटनाएं अलग अलग हैं लेकिन पंजाब की सियासत में इनके मायने एक दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। कभी भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पंजाब की राजनीति में एक दूसरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे। फिर रास्ते अलग हुए अब चुनावी बिसात दोबारा सज रही है तो पुराने रिश्तों की वापसी की चर्चा भी फिर उठने लगी है। ऐसे वक्त में सुखबीर बादल पर हमला होता है और दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका हालचाल लेते हैं। सवाल इसलिए बड़ा है कि क्या यह महज एक नेता के प्रति मानवीय चिंता है या पंजाब की बदलती राजनीतिक तस्वीर में इसका कोई व्यापक संदेश भी पढ़ा जा सकता है जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं लेकिन राजनीति में घटनाएं अपने पीछे सवाल छोड़ जाती हैं और कभी कभी वही सवाल आने वाले चुनाव की कहानी लिखते हैं।
बादल पर वार सुलग गयी पंजाब की राजनीति
नांदेड़ के गुरुद्वारे में कृपाण चली तो निशाना सुखबीर सिंह बादल थे लेकिन वार की गूंज महाराष्ट्र की सीमा पार कर सीधे पंजाब की सियासत में सुनाई दी। हमलावर सामने था खतरा बेहद करीब था और तभी सुरक्षा ड्यूटी में तैनात इंस्पेक्टर संतोष केंद्रे ने जिस तेजी से हमलावर को रोका उसने सुखबीर बादल की जान बचा ली। बादल घायल हुए हमलावर पकड़ा गया और जांच शुरू हो गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। क्योंकि सुखबीर बादल पर यह पहला जानलेवा हमला नहीं है। दिसंबर 24 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर भी उन पर गोली चलाने की कोशिश हुई थी। तब भी वह बच गए थे और अब नांदेड़ में एक बार फिर जान पर हमला। दो घटनाएं दो जगहें दो तरीके और बीच में पंजाब की राजनीति का वही चेहरा। यहीं से सवाल पैदा होता है कि क्या दोनों घटनाएं महज संयोग हैं? क्या इनके पीछे कोई साझा सूत्र है? या फिर अलग अलग घटनाओं को जोड़कर देखना ही जल्दबाजी होगी? इन सवालों का जवाब जांच एजेंसियां तलाशेंगी और फिलहाल किसी राजनीतिक साजिश का कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने पर पहरा भी नहीं लगा है। खासकर तब जब निशाने पर कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि पंजाब के एक बड़े क्षेत्रीय दल का अध्यक्ष हो और राज्य चुनावी मोड में प्रवेश कर चुका हो।
बादल की पत्नी हरसिमरत कौर ने पीएम मोदी का व्यक्त किया आभार
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर आज हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उनका हालचाल जाना था। सुखबीर सिंह की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। हरसिमरत कौर ने एक्स पर पोस्ट किया है कि प्रधानमंत्री जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने सरदार सुखबीर सिंह बादल जी की सेहत के बारे में जानने के लिए व्यक्तिगत रूप से फोन किया और महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक गुरुद्वारा साहिब के अंदर उन पर हुए कायराना हमले के बाद उनके जल्द ठीक होने की कामना की। इस मुश्किल समय में आपकी चिंता समर्थन और शुभकामनाएं हम सभी परिवार वालों हमारी पार्टी और पंजाब के लोगों के लिए बहुत मायने रखती है। आपके इस नेक व्यवहार से मैं बहुत प्रभावित हूं। मैं इस बात के लिए भी आपकी आभारी हूं कि आपने इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया और केंद्रीय जांच एजेंसियों को जांच में महाराष्ट्र पुलिस के साथ तालमेल बिठाने के निर्देश दिए।
गृह मंत्री कोभी शुक्रिया
एक और सोशल मीडिया पोस्ट में हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह का अभार व्यक्त किया। एक्स पर उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र के एक गुरुद्वारे में सुखबीर सिंह बादल जी पर हुए हमले के बाद उनका हाल-चाल जानने के लिए संपर्क करने पर मैं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं उन्होंने लिखा कि इस मुश्किल समय में आपकी व्यक्तिगत चिंता और दिलासा देने वाली बातों के लिए मैं आपका आभारी हूं। इस दुखद घटना की प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के आपके संकल्प के लिए धन्यवाद। यह घटना महान सिख धर्म के मूल सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
महसूस हो रही है सियासी गर्मी
27 का पंजाब अभी दूर जरूर है लेकिन उसकी सियासी गर्मी महसूस होने लगी है। आप सत्ता बचाने की तैयारी में है। कांग्रेस वापसी की जमीन तलाश रही है। भाजपा पंजाब में अपने विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है और शिरोमणि अकाली दल अपनी खोयी हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में है। यानी मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं बल्कि पंजाब में राजनीतिक जगह पर कब्जे का भी है। इसी बीच भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित नए समीकरणों की चर्चा फिर शुरू होना और सुखबीर बादल पर दूसरा गंभीर हमला इन दोनों घटनाओं ने राजनीतिक सवालों को और धार दे दी है। क्योंकि राजनीति में सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि घटना के पीछे मकसद क्या था। यह भी मायने रखता है कि घटना के बाद राजनीतिक मैदान में कौन मजबूत होता है किसका नैरेटिव बनता है और किसके पक्ष में सहानुभूति की लहर पैदा होती है। सुखबीर बादल पर हमला किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम था यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन यह पूछना बिल्कुल जायज है कि अगर हमला राजनीतिक नहीं भी था तो उसका राजनीतिक असर किस पर पड़ेगा?




