अंतिम संस्कार के लिए कमर तक पानी में उतरे परिजन, मिर्जापुर की व्यवस्था पर उठे सवाल
मिर्जापुर के नटवा पुल के नीचे जलभराव के बीच परिजन शव को कमर तक पानी में लेकर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। घटना ने शहर की जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े किए।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मिर्जापुर के नटवा पुल के नीचे का एक दृश्य व्यवस्था के उन दावों पर सवाल खड़े करता है, जो अक्सर कागजों और भाषणों में सुनाई देते हैं। जलभराव के बीच परिजन एक शव को कमर तक गहरे पानी से लेकर अंतिम संस्कार के लिए जाते नजर आए। यह सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि शहर में बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल है।
कमर तक पानी में शव लेकर पहुंचे परिजन
बताया गया कि नटवा पुल के नीचे भारी जलभराव के बीच एक मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। पानी इतना अधिक था कि परिजन शव को लेकर कमर तक पानी में आगे बढ़ते दिखाई दिए।
इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया। किसी परिवार के लिए अंतिम विदाई का समय पहले ही बेहद भावुक होता है, ऐसे में रास्ते और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।
जलभराव ने खोली व्यवस्था की पोल
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर नाराजगी है। उनका सवाल है कि यदि शहर में किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा तक के लिए सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध नहीं है, तो विकास के दावों को किस नजरिए से देखा जाए।
नटवा पुल के नीचे लंबे समय से जलभराव की समस्या होने की बात स्थानीय स्तर पर उठती रही है। हालांकि, इस विशेष घटना के संबंध में संबंधित विभाग या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए जलभराव के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
अंतिम विदाई की गरिमा भी व्यवस्था की जिम्मेदारी
किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार केवल धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार के लिए अंतिम विदाई का क्षण होता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षित रास्ता, जलनिकासी और स्वच्छ वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय व्यवस्था की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
नटवा पुल की यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सवाल केवल जलभराव का नहीं, बल्कि नागरिक सुविधाओं और जवाबदेही का है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान करेगा, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अंतिम विदाई के लिए ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी, मिर्ज़ापुर
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