गोपालपुर के सामुदायिक भवन की यह हालत क्यों? गंदगी के बीच पढ़ रहे मासूम
मिर्जापुर पंचायतों में ग्रामीणों की सुविधा और सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले सामुदायिक भवनों पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर पंचायतों में ग्रामीणों की सुविधा और सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले सामुदायिक भवनों पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती है।
निर्माण के बाद इनके रख-रखाव, साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों और पंचायतों की होती है। बावजूद इसके जिले के कई ग्रामीण इलाकों में सरकारी भवनों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। कहीं भवन जर्जर हो चुके हैं तो कहीं साफ-सफाई के अभाव में वे उपयोग के लायक तक नहीं बचे हैं।
ऐसी ही बदहाली की तस्वीर मड़िहान तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा गोपालपुर से सामने आई है। यहां पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने के लिए संचालित सामुदायिक भवन इन दिनों गंदगी और अव्यवस्था की गिरफ्त में है। भवन की हालत देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह बच्चों की शिक्षा और देखभाल के लिए बनाया गया केंद्र है या फिर जानवरों और कचरे का बसेरा?
टूटे गेट और जर्जर बरामदे ने बढ़ाई परेशानी
गोपालपुर स्थित सामुदायिक भवन में प्रवेश करते ही अव्यवस्था साफ दिखाई देती है। भवन का गेट क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है, जबकि बरामदे की स्थिति भी खराब है। जगह-जगह गंदगी और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे माहौल में छोटे-छोटे बच्चों का नियमित रूप से आना-जाना उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों के मुताबिक भवन की नियमित देखरेख और साफ-सफाई नहीं होने के कारण परिसर धीरे-धीरे बदहाल होता जा रहा है। भवन का उपयोग जिन नौनिहालों के लिए होना चाहिए, वही बच्चे अव्यवस्था के बीच समय बिताने को मजबूर हैं।
गंदगी से पटे शौचालय, बच्चों के सामने बड़ी समस्या
सामुदायिक भवन परिसर में बने शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। शौचालय खराब होने के साथ ही गंदगी से पटे हुए हैं। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए साफ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा बेहद जरूरी है, लेकिन यहां की स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आ रही है।
विशेष रूप से छोटी बच्चियों को शौचालय जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदे और खराब शौचालयों के चलते संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की उम्र को देखते हुए साफ-सफाई में थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर समस्या का कारण बन सकती है।
चारों तरफ कचरा, संक्रामक बीमारियों का खतरा
भवन के आसपास जगह-जगह कचरा और गंदगी दिखाई देने की बात ग्रामीणों ने कही है। खुले में पड़ा कचरा न केवल वातावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि इससे मच्छर, मक्खियों और अन्य कीट-पतंगों के पनपने की आशंका भी बनी रहती है।
छोटे बच्चों के आसपास इस तरह की गंदगी होना उनके स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते सफाई व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
डस्टबिन भी झाड़ियों और घास-फूस के बीच पड़ा
सबसे हैरान करने वाली स्थिति भवन के पास रखे जाने वाले डस्टबिन को लेकर सामने आई है। कचरा खुले में न फेंकने और उसे डस्टबिन में डालने के उद्देश्य से उपलब्ध कराया गया डस्टबिन भी उपयोगी स्थान पर नजर आने के बजाय झाड़ियों और घास-फूस के बीच पड़ा बताया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब कचरा रखने के लिए उपलब्ध संसाधन ही उचित स्थान पर नहीं होंगे तो स्वच्छता व्यवस्था कैसे कायम होगी? ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता को लेकर किए जाने वाले दावे धरातल पर कहीं कमजोर दिखाई दे रहे हैं।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरि,मिर्जापुर



