बांदा में तिरंगे का अपमान? सरकारी दफ्तरों में नहीं हुआ ध्वजारोहण
देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया।
शहरों से लेकर गांवों तक तिरंगा शान से लहराया और सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों तथा सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी बीच उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आई कथित तस्वीरों और आरोपों ने सरकारी व्यवस्था और राष्ट्रीय पर्व की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि बांदा में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी कार्यालय परिसर और कचहरी परिसर स्थित उप डाकघर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण नहीं हुआ। राष्ट्रीय पर्व के दिन दो सरकारी परिसरों में तिरंगा नहीं फहराए जाने की बात सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं में नाराजगी बताई जा रही है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब इन सरकारी परिसरों में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम क्यों नहीं हुआ? यदि ध्वजारोहण नहीं हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या प्रशासन की ओर से इसकी कोई निगरानी की गई?
तिरंगा देश की आन, बान और शान
15 अगस्त देश के इतिहास का वह गौरवशाली दिन है, जब भारत अंग्रेजी शासन से स्वतंत्र हुआ था। हर वर्ष इस दिन देशभर में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता सेनानियों और देश के वीर सपूतों को नमन किया जाता है।
सरकारी कार्यालयों में भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में यदि किसी सरकारी परिसर में राष्ट्रीय पर्व के दिन ध्वजारोहण नहीं होता है, तो यह महज एक औपचारिक कार्यक्रम छूट जाने का मामला नहीं माना जा सकता, बल्कि इससे प्रशासनिक जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
दो सरकारी परिसरों में ध्वजारोहण नहीं होने का आरोप
बांदा में सामने आए मामले के अनुसार, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी कार्यालय परिसर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कथित तौर पर ध्वजारोहण नहीं हुआ। इसके अलावा कचहरी परिसर स्थित उप डाकघर को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
दो अलग-अलग सरकारी परिसरों में राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर तिरंगा नहीं फहराए जाने की बात सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जहां सरकारी संस्थानों को राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और प्रोटोकॉल का पालन कराने में उदाहरण पेश करना चाहिए, वहीं ऐसी स्थिति सामने आना चिंता का विषय है।
हालांकि, मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से इस कथित चूक को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।
अधिवक्ताओं और आम लोगों में नाराजगी
कचहरी परिसर से जुड़े लोगों और अधिवक्ताओं ने कथित तौर पर इस मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल सरकारी कैलेंडर में दर्ज एक तारीख नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदानों की याद दिलाने वाला राष्ट्रीय पर्व है।
ऐसे दिन सरकारी कार्यालय में तिरंगा न फहराए जाने की स्थिति सामने आती है तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाया कि जब स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को लेकर पहले से तैयारियां होती हैं और प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रमों की जानकारी रहती है, तो फिर किसी सरकारी कार्यालय में ध्वजारोहण नहीं होने की स्थिति कैसे पैदा हुई?
जिम्मेदार अधिकारी कहां थे?
इस पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
क्या संबंधित अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो ध्वजारोहण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या कार्यालय स्तर पर कार्यक्रम के लिए कोई जिम्मेदारी तय की गई थी? और यदि जिम्मेदारी तय थी तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ?
इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय पर्व के आयोजन की निगरानी किस तरह की गई, यह भी जांच का विषय बन गया है।
मामला तिरंगे के सम्मान से जुड़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित होने या न होने तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
देश का तिरंगा प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव और सम्मान का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सरकारी परिसरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराना उस गौरव को सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में यदि किसी सरकारी परिसर में निर्धारित कार्यक्रम नहीं हुआ है तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाना जरूरी है।
प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल
इस घटना ने केवल संबंधित कार्यालयों की कार्यप्रणाली ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां की जाती हैं। अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित की जाती हैं और राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण तरीके से मनाने की अपेक्षा रहती है।
ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगरानी तंत्र ने समय रहते स्थिति का संज्ञान क्यों नहीं लिया।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं ने मामले की जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों को लेकर सरकारी कार्यालयों में स्पष्ट जिम्मेदारी और प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब जवाब का इंतजार
बांदा में सामने आया यह मामला फिलहाल आरोपों के स्तर पर है और संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। यदि वास्तव में दोनों सरकारी परिसरों में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण नहीं हुआ, तो इसके कारण और जिम्मेदारी की जांच प्रशासन के लिए अहम होगी।
फिलहाल सवाल यही है कि जब पूरा देश तिरंगे को सलाम कर रहा था, तब बांदा के इन सरकारी परिसरों में राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं फहराया गया?
रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा



