आंदोलनकारियों के आगे झुकी सरकार, फिर भी क्यों नहीं खत्म हुआ पूरा विवाद?
झारखंड में JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं रद्द हुईं, लेकिन CBI जांच, 11वीं-13वीं JPSC, एज रिलैक्सेशन और पुरानी नियुक्तियों पर अब भी कई पेच फंसे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: झारखंड में JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं रद्द हुईं, लेकिन CBI जांच, 11वीं-13वीं JPSC, एज रिलैक्सेशन और पुरानी नियुक्तियों पर अब भी कई पेच फंसे हैं.
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया.
साथ ही कहा कि TDPL एजेंसी की ओर से कराई गई परीक्षाएं भी रद्द की जाएंगी. इसके अलावा 2014 से अब तक भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की व्यापक जांच का आदेश दिया गया है.
हेमंत सोरेन के ऐलान के बाद भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने अनशन खत्म कर दिया, लेकिन एक गुट अभी भी CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़ा है. दरअसल, सरकार के फैसले के बाद भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब आने बाकी हैं. यही वजह है कि यह मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने से खत्म होता नहीं दिख रहा…
1. JSSC-CGL पास करने वालों का क्या होगा?
JSSC-CGL रद्द होने से सबसे ज्यादा असर उन कैंडिडेंट्स पर पड़ा है, जिन्होंने परीक्षा पास की, सिलेक्शन प्रॉसेस पूरा किया और कुछ मामलों में नौकरी भी हासिल कर ली. परीक्षा रद्द होने के बाद सेलेक्टेड कैंडिडेट्स ने सरकार के फैसले का विरोध शुरू कर दिया है. सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों का क्या होगा, उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी या उनकी नियुक्ति को लेकर कोई अलग कानूनी व्यवस्था होगी. यह मामला अदालत पहुंच सकता है. जिन उम्मीदवारों की परीक्षा या नियुक्ति रद्द हुई है, उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने की स्वतंत्रता है. ऐसे में सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती मिलना तय है.
2. CBI जांच की मांग अभी भी अधूरी
छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगों में CBI जांच भी शामिल थी. लेकिन सरकार ने यह मांग अभी तक नहीं मानी है. फिलहाल सरकार ने CID/SIT की जांच और 2014 से अब तक हुई परीक्षाओं की व्यापक जांच की बात कही है. छात्रों का सवाल है कि अगर इतने सालों में कई एजेंसियों और निजी कंपनियों की भूमिका सामने आ रही है, तो जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से क्यों नहीं कराई जा रही. छात्रों ने कहा है कि सरकार जब तक CBI जांच के लिए तैयार नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा.
3. TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द, लेकिन पूरी लिस्ट और प्रक्रिया क्या है?
सरकार ने TDPL से कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें परीक्षा, परिणाम और चयन जैसी प्रक्रियाओं को भी निरस्त करने की बात सामने आई है. लेकिन कौन-कौन सी परीक्षाएं रद्द होंगी? किनके रिजल्ट्स पर इसका असर पड़ेगा? जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, उनके साथ क्या होगा? नई परीक्षाएं कब होंगी? सरकार को इन सवालों को लेकर लिखित आदेश और एग्जाम की लिस्ट न तो जारी की है और न ही आंदोलन कर रहे छात्रों को मुहैया कराई है. इसलिए सिर्फ मौखिक घोषणा से विवाद खत्म होना मुश्किल है.
4. 11वीं-13वीं JPSC पर अभी भी सवाल
सबसे संवेदनशील मामला 11वीं-13वीं JPSC से जुड़ा है. छात्रों का दावा है कि इस परीक्षा की मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में भी TDPL की भूमिका रही थी. ऐसे में जब सरकार TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की बात कर रही है तो 11वीं-13वीं JPSC को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा. सरकार ने इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं की है. 11वीं-13वीं JPSC को लेकर अलग से स्पष्ट आदेश सामने आना जरूरी है. 14वीं JPSC को रद्द करने का ऐलान सरकार पहले ही कर चुकी है.
5. एज रिलैक्सेशन का क्या होगा?
लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में देरी और परीक्षाओं के रद्द होने का सीधा असर कैंडिडेट्स की उम्र पर पड़ा है. इसलिए आंदोलनकारी एज रिलैक्सेशन की मांग भी कर रहे थे. इसे लेकर भी कोई उचित निर्णय लिया गया है या नहीं, इसकी जानकारी सरकार की ओर से नहीं मिली है. क्योंकि दोबारा परीक्षा कराने का फैसला काफी नहीं होगा. पुराने कैंडिडेट्स को दोबारा मौका देने के लिए उम्र सीमा में छूट देनी होगी.
6. 2014 से जांच का दायरा कितना बड़ा होगा?
मुख्यमंत्री ने 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की बात कही है. हेमंत सोरेन के 17 अगस्त के बयान के मुताबिक, CID और SIT की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. सोरेने ने कहा कि अलग-अलग समय में काम करने वाली कंपनियों के बीच एक जटिल नेटवर्क की बात सामने आई है. इसका मतलब है कि मामला सिर्फ JSSC-CGL या मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं रहेगा. अब सवाल ये है कि 2014 से हुई कितनी परीक्षाएं जांच के दायरे में आएंगी और अगर पुरानी परीक्षा में गड़बड़ी मिलती है तो उसके परिणाम और नियुक्तियों का क्या होगा? यही सबसे लंबा और कानूनी पेच हो सकता है.
NEET से क्यों अलग है झारखंड का मामला?
NEET जैसे मामले में केंद्र की एक परीक्षा पर सवाल था, जो देशभऱ में एकसाथ कराई गई थी. इधर झारखंड का विवाद JPSC, JSSC, अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं, आउटसोर्स एजेंसी TDPL और सालों पुरानी परीक्षा व्यवस्था तक फैला हुआ है.
सरकार ने भी जांच का दायरा 2014 तक ले जाने की बात कही है. इसलिए यहां सिर्फ री-एग्जाम कराना समाधान नहीं होगा. इसके साथ रीएग्जाम, पुरानी नियुक्तियों को लेकर भी स्पष्टता जाहिर करनी होगी. यानी हेमंत सोरेन के ऐलान के बाद भी असली लड़ाई अभी बाकी है.



