जंतर-मंतर प्रदर्शन पर SC में सुनवाई, दिल्ली पुलिस बोली- हालात काबू करने के लिए बल प्रयोग जरूरी था

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर छात्र प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने से इनकार किया. पुलिस ने बताया कि भीड़ ने बैरिकेड तोड़े, प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रह गया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर छात्र प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने से इनकार किया. पुलिस ने बताया कि भीड़ ने बैरिकेड तोड़े, प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रह गया था.

नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ हाल ही में दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया गया था.

इस बीच दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने की बात से इनकार किया है.

डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस सचिन शर्मा द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में पुलिस ने बल प्रयोग का बचाव करते हुए कहा कि जब भीड़ में शामिल कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर बैरिकेड्स तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, तब प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रह गया था.

यह हलफनामा पुलिस की कथित ज्यादतियों की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया है और इसका मकसद चार संबंधित याचिकाओं का एक संयुक्त जवाब भी है.

भीड़ के बेकाबू होने से झड़प शुरू हुई

दिल्ली पुलिस द्वारा हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस ने ज़रूरत के हिसाब से बल का इस्तेमाल किया. लगभग 5,000 पुलिसकर्मी 3 किलोमीटर के दायरे में फैले 30,000 से ज़्यादा लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे.

हलफनामे में कहा गया कि जब भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो गई, तब झड़प शुरू हुई, जिसमें प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए. पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान 240 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों/वर्दीधारी अधिकारियों और लगभग 200 आम नागिरक/प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं.

संसद मार्च की इजाजत नहीं दी गई थी

हलफनामे में कहा गया है कि ज़रूरत से ज़्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि अलग-अलग जगहों पर बहुत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जिनमें असामाजिक तत्व और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल थे जो प्रदर्शन में घुस आए थे.

दिल्ली पुलिस ने इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि चूंकि संसद मार्च के लिए कोई इजाज़त नहीं दी गई थी, इसलिए यह जमावड़ा गैर-कानूनी था और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास गैरकानूनी सभा द्वारा किया गया एक अवैध कृत्य था.

पुलिस का यह भी कहना है कि अदालत में दायर याचिकाएं चुनिंदा तस्वीरों, अधूरे वीडियो क्लिप और बिना पुष्टि वाली मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है. ये पुलिस अधिकारियों की कानूनी कार्रवाई को दिखाए बिना एकतरफ़ा तस्वीर पेश करती हैं.

कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल पर क्या कहा

वहीं कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोप पर पुलिस का कहना है कि वीडियो के अनुसार, कीलों वाली लाठी से जुड़ी एक अकेली घटना हुई थी, लेकिन वह भी प्रदर्शनकारी के हाथ में थी, पुलिस के हाथ में नहीं. पुलिस का कहना है कि वह लाठी नहीं, बल्कि एक डंडा था जिस पर राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ था.

हलफनामे में कहा गया है कि लाठियां एक स्वीकार्य हथियार हैं और अधिकारी केवल भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों के समूहों ने बिना किसी उकसावे के उन पर हमला करना शुरू कर दिया था. हलफनामे में कहा गया है कि हिंसा को नियंत्रित करने के लिए अनुमत तरीकों के अनुसार ही सभी उपाय किए गए.

हलफनामें यह दावा भी किया गया है कि सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिस अधिकारियों (स्पॉटर्स) के वीडियो भीड़ नियंत्रण के उपाय को गलत संदर्भ में दिखाते हैं. हलफनामे में उल्लेख किया गया है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के स्पॉटर्स रणनीतिक रूप से भीड़ में शामिल हो गए, जो न तो गैरकानूनी है और न ही असामान्य. पुलिस ने कहा कि यह रणनीति स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि जैसे सार्वजनिक समारोहों में भी अपनाई जाती है.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया

पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड की कई परतों को तोड़कर हिंसा शुरू करने के बाद ही उसे बल प्रयोग करने के लिए विवश होना पड़ा. पुलिस का आरोप है कि ऐसे वीडियो मौजूद हैं जिनमें प्रदर्शनकारियों के बड़े समूह अकेले पुलिस अधिकारियों को पीटते नजर आए, उनके सुरक्षा उपकरण उतारते हुए, उन्हें घसीटते हुए और फुटपाथ पर धकेलते हुए दिखाई दिए.

हलफनामे में यह भी बताया गया है कि करीब 2873 व्यक्तियों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, बलात्कार, पीओसीएसओ आदि सहित गंभीर आपराधिक आरोप हैं. दिल्ली आयुक्त द्वारा गठित एसआईटी द्वारा इनकी जांच की जाएगी. हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस द्वारा बल प्रयोग की जांच कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली समिति द्वारा की जा सकती है और दिल्ली पुलिस इस समिति के साथ सहयोग करेगी.

फेसियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर सफाई

वहीं प्रदर्शन स्थल पर फेसियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर पुलिस ने इसे अनुपातिक पुलिसिंग कदम बताया. पुलिस ने कहा कि यह सॉफ्टवेयर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति की प्रोफाइल अपने आप दर्ज नहीं करता. पुलिस के मुताबिक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बिना भेदभाव निगरानी या निजी जानकारी जुटाने के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता, जब तक उस व्यक्ति का पहले का आपराधिक रिकॉर्ड न हो.

पुलिस ने कहा कि सिर्फ फेसियल रिकग्निशन के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती. यह पता करने के लिए फील्ड वेरिफिकेशन भी किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था या नहीं. हलफनामे में कहा गया है कि सॉफ्टवेयर सिर्फ गंभीर अपराधों के पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान करता है. ट्रैफिक चालान जैसे छोटे मामलों वाले लोगों की पहचान इसके जरिए नहीं की जाती.

Related Articles

Back to top button