आंदोलन से पहले अचानक स्कूल पहुंचे कमिश्नर, बच्चों के बीच बैठकर खाया खाना
गोरखपुर के अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के आंदोलन की तैयारी के बीच मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह अचानक पहुंचे। उन्होंने कक्षाओं, भोजन, सुरक्षा और शिक्षकों की व्यवस्था परखी।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अटल आवासीय विद्यालय, सहजनवां के छात्र-छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन की तैयारी की चर्चा के बीच मंगलवार को मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह अचानक विद्यालय पहुंच गए। बिना पूर्व सूचना हुए निरीक्षण में उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा, भोजन और आवासीय व्यवस्थाओं को करीब से देखा। बच्चों के बीच बैठकर भोजन करने और सीधे संवाद करने का उनका अंदाज भी चर्चा में रहा।
विद्यालय में कक्षा छह से 11 तक 818 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। निरीक्षण के दौरान 11 पीजीटी और 26 टीजीटी शिक्षक कार्यरत मिले। अधिकारियों ने बताया कि आठ गेस्ट फैकल्टी का चयन अगले 15 दिनों में किया जाएगा।
कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से पूछे सवाल
मंडलायुक्त ने कक्षा छह, सात, 10 और 11 के विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने विभिन्न विषयों की पढ़ाई को लेकर सवाल पूछे और शिक्षण व्यवस्था की स्थिति समझी। बच्चों से शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने गुरु की भूमिका भी बताई।
उन्होंने कहा कि जिस तरह शिल्पी पत्थर को तराशकर सुंदर मूर्ति बनाता है, उसी तरह शिक्षक अपने विद्यार्थियों को तराशकर सफलता की राह दिखाता है।
बच्चों के साथ खाया भोजन, सुरक्षा पर दिए निर्देश
मेस की व्यवस्था जांचने के लिए मंडलायुक्त खुद बच्चों के साथ बैठकर भोजन करने लगे। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता के बारे में बच्चों से भी जानकारी ली। विद्यार्थियों ने भोजन को अच्छा बताया।
विद्यालय की साफ-सफाई पर भी निर्देश दिए गए। सीढ़ियों के खुले स्थान पर सुरक्षा की दृष्टि से ग्रिल लगाने को कहा गया, ताकि आवासीय परिसर में बच्चों की सुरक्षा और मजबूत हो सके।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में किया पौधारोपण
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाया और पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया।
छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद के दौरान परिसर में उत्साह का माहौल नजर आया। निरीक्षण के समय उपश्रमायुक्त, एसडीएम सहजनवां, उप प्रधानाचार्य सहित शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी मौजूद रहे।
आंदोलन की चर्चा के बीच प्रशासन के इस औचक निरीक्षण को बच्चों की समस्याओं और विद्यालय की व्यवस्थाओं को करीब से समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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