वंदे मातरम् विवाद पर कपिल सिब्बल का PM मोदी से सवाल- क्या मुख्यमंत्री रहते उन्होंने पूरा गीत गाया?

अमित शाह ने वंदे मातरम् मामले पर कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वंदे मातरम् के सिर्फ दो पैरा ही गाने के पार्टी के फैसले का मकसद कानून की खुली अवहेलना कर वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण करना है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमित शाह ने वंदे मातरम् मामले पर कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वंदे मातरम् के सिर्फ दो पैरा ही गाने के पार्टी के फैसले का मकसद कानून की खुली अवहेलना कर वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण करना है.

वंदे मातरम् को लेकर विवाद बना हुआ है. केंद्र सरकार जहां कांग्रेस पर वंदे मातरम् का अपमान करने का आरोप लगा रही है तो कांग्रेस का कहना है कि यह बीजेपी के लोगों का नकली राष्ट्रवाद है. अब पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सवाल किया है कि क्या पीएम नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते कभी पूरा वंदे मातरम् गाया. या फिर वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते?

कपिल सिब्बल ने आज शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में लिखा, “अमित शाह का कहना है कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी के वंदे मातरम् के 2 पैरा गाने का फैसला राष्ट्र विरोधी है. मेरा सवाल है- क्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 1950 से लेकर अपने किसी प्राइवेट या आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा पैरा गाया है? मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान वंदे मातरम् का पूरा पैरा गया है? क्या वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते ऐसा किया? तब तो आप भी देश विरोध हो. आपकी वोट-बैंक की राजनीति का पर्दाफाश हो गया!”

बीजेपी के लोग नकली राष्ट्रवादी: कांग्रेस

दूसरी ओर, कांग्रेस ने वंदे मातरम् को लेकर अमित शाह द्वारा निशाना साधे जाने के बाद पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी छात्रों और राम मंदिर से जुड़ी चंदा चोरी जैसे अहम विषयों से ध्यान भटकाना चाहती है और इसे के लिए राष्ट्र गीत को लेकर विवाद खड़े करना चाहती है, जबकि उसके लोग झूठे और नकली राष्ट्रवादी हैं.

पार्टी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ट्राइड (परखे जा चुके) और टायर्ड (थक चुके) हैं तथा अब उन्हें जल्द ही रिटायर हो जाना चाहिए. रमेश ने दावा किया कि पीएम मोदी, गृह मंत्री शाह और बीजेपी छात्रों के मुद्दे तथा राम मंदिर से चंदा चोरी तथा आस्था के साथ धोखा जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि कांग्रेस उनके जाल में फंसने वाली नहीं है.

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